खबर लहरिया Blog चित्रकूट : बलात्कार की कोशिश में भतीजे ने महिला पर किये पत्थर से कई वार

चित्रकूट : बलात्कार की कोशिश में भतीजे ने महिला पर किये पत्थर से कई वार

चित्रकूट जिले के कर्वी कोतवाली में महिला के रिश्ते में भतीजे लगने वाले आरोपी द्वारा महिला के साथ ज़बरदस्ती दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है।

पुरुष की हवस कोई रिश्ता, उम्र या पहचान नहीं देखती। वह बस किसी तरह से अपने अंदर बड़ी कामुकता को शांत करने का रास्ता ढूंढती है। हर दिन बलात्कार के मामले होना और खबरों की हेडलाइनस में यह पढ़ना ‘ 90 साल की बुज़ुर्ग महिला से बलात्कार’, ‘ बाँदा: चार साल की मासूम के साथ बलात्कार का मामला आया सामने’, गुज़रते दिनों के साथ यह आम बनता जा रहा है या ये कहें की महिलाओं के साथ होती हिंसक घटनाओं को आम बना दिया गया है।

हाँ, एक बात यह भी है कि हर घटना का इलज़ाम हम शासन-प्रशासन पर नहीं लगा सकते। वो भी तब जब दोषी अपने खुद के घर का ही हो, अपने ही परिवार का हिस्सा हो। तो क्या उसे परिवार कहा जाएगा जहाँ पर भी महिलाएं, लड़कियां, बच्चियां सुरक्षित नहीं है? जब परिवार का ही व्यक्ति अपनी बहन-बेटियों की इज़्ज़त उतारने में लगा हो तो महिलाएं खुद का कहां, किस जगह सुरक्षित महसूस करें? कौन-सी ऐसी जगह है उनका डर उन तक न पहुंचे?

ऐसा ही एक बलात्कार का मामला चित्रकूट जिले के कोतवाली के कर्वी के अंतर्गत आया है। मामला 2 सितंबर 2021 का है।

 

रिश्तेदारी की वजह से नहीं कह पायी दुष्कर्म का सच

कर्वी कोतवाली में रहने वाली महिला का आरोप है कि अशोक पटेल जो की रिश्ते में उसका भतीजा लगता है। उसे हमेशा परेशान करता था। वह आरोपी अशोक पटेल के दुष्कर्म भरे व्यव्हार को इस डर की वजह से नहीं कह पाती क्यूंकि वह विधवा है। अगर उसने कुछ कहा तो लोग उसे ही दोषी बोलेंगे। वह रिश्तेदारी की वजह से चुप होकर आरोपी की अश्लीलता को सहती रही।

 

आरोपी ने बलात्कार की कोशिश में किया जानलेवा हमला

महिला ने बताया कि आरोपी अशोक पटेल 2 सितंबर की रात लगभग 11 बजे उसके घर में घुसा। घर में घुसने पर वह उसके साथ ज़बरदस्ती करने लगा। जब वह चिल्लाने लगी और वह अपने हीन कार्य में कामयाब नहीं हुआ तो आरोपी ने उस पर जानलेवा हमला किया।

पहले उसने महिला पर पत्थर से वार किया। वह महिला के शरीर पर बार-बार बेहरमी से पत्थर से वार करता रहा। फिर दुष्कर्म करने की कोशिश में आरोपी अशोक में महिला के नाक-कान को भी बहुत बुरी तरह चोट पहुंचाई। खुद को बचाने के लिए उसने आरोपी के सिर पर वार किया। महिला के शरीर पर गंभीर और गहरी चोटें आईं। आरोपी उसे अधमरी हालत में छोड़कर भाग निकला।

महिला ने आगे बताया कि फिर उसे अस्पताल लेकर जाया गया लेकिन उसे नहीं पता कि कौन उसे अस्पताल लेकर गया।

 

साल भर से परेशान कर रहा था आरोपी

आपको बता दें, आरोपी अशोक पटेल शहर कोतवाली क्षेत्र का निवासी है। वह महिला को तकरीबन एक साल से ज़बरन फोन करके परेशान करता आ रहा था। आरोपी महिला के रिश्ते में आता था इसलिए उसने उसकी शिकायत नहीं की। गुरुवार, 2 सितंबर की घटना के बाद पुलिस ने महिला को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया।

 

मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक की बात

इस मामले में चित्रकूट जिले के पुलिस अधीक्षक धवल जयसवाल ने बताया कि आरोपी अशोक और महिला के बीच पहले से ही संबंध था। गुरुवार, 2 सितंबर को किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। जिससे दोनों के बीच मारपीट हुई। महिला द्वारा तहरीर दी गई है। फिलहाल आरोपी को पकड़ लिया गया है। आरोपी पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी।

माना की पुलिस घर-घर जाकर ड्यूटी नहीं कर सकती। वह हर एक व्यक्ति पर नज़र नहीं रख सकती। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि महिलाओं के साथ बढ़ती हिंसाओं में पुलिस की अहम भूमिका है। अक्सर महिलाएं इन्साफ और रिपोर्ट दर्ज़ कराने के लिए कोतवाली के चक्कर काटती रहती हैं लेकिन फिर भी उनकी सुनवाई नहीं होती। अगर मामला सुनवाई तक पहुँचता भी है तो महिलाओं पर समझौता करने का दबाव बनाया जाता है। समझौता करना, घर न बिगाड़ना जैसी गौड़ नैतिक माने जाने वाली ज़िम्मेदारियाँ सिर्फ महिलाओं के सिर पर ही समाज ने थोप रखी है। मानों, पूरा समाज और प्रशासन कह रहा हो, ‘हिंसा सहो, वहीं रहो’।

पढ़े-लिखे अधिकारी न्याय की आस में आई महिलाओं का मज़ाक उड़ाते दिखाई पड़ते हैं। इसलिए महिलाएं निराश हो कर हिंसा सहने के लिए मज़बूर हो जाती हैं। अगर छेड़छाड़ या बलात्कार की घटना हो तो बिना किसी ठोस कार्यवाही और जाँच के पुलिस द्वारा यह कहा जाता है, पहले से चक्कर था। जैसा की हमने चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक धवल जयसवाल को कहते सुना। जब पुलिस की ही मानसिकता ऐसी हो तो इन्साफ कौन देगा?

अगर एक बार के लिए यह मान भी लिया जाए की महिला और आरोपी में संबंध था। फिर भी यह आरोपी द्वारा महिला के साथ ज़बरदस्ती के दुष्कर्म की घटना को सही करार नहीं देता। यहां तक की कानून भी यह कहता है कि अगर महिला की मर्ज़ी नहीं है और आप बेशक़ पति-पत्नी है फिर भी आप बिना महिला की मंज़ूरी के शारीरिक संबंध नहीं बना सकते।

इसके आलावा यह मामला इस तरफ भी रोशनी डालता है कि समाज में विधवा होना आज भी किसी दाग से कम नहीं माना जाता। जहाँ हिंसा से ग्रसित महिलाएं आज भी समाज के डर और उनके कटाक्ष की वजह से अपनी आवाज़ नहीं उठा पातीं। साथ ही क्यूंकि आरोपी घर का ही था। अधिकतर मामलों में तो परिवार वाले ही समाज में अपने झूठे नाम को बचाने के लिए मामले को दबा देते हैं। ऐसे में उनकी शान तो बच जाती है लेकिन वह एक परिवार के रूप में नीचे गिर जाते हैं। महिलायें परिवार की इज़्ज़त होती है, आखिर कब तक इन बयानों के सहारे समाज और उसमें रहने वाले परिवार महिलाओं को प्रताड़ित करते रहेंगे?

इस खबर की रिपोर्टिंग नाज़नी रिज़वी द्वारा किये गए हैं।

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