खबर लहरिया Hindi Bolenge Bulwayenge: ट्रेन में महिलाओं के साथ बदसलूकी, क्या आपकी चुप्पी भी ज़िम्मेदार है? x Lal Jhandi

Bolenge Bulwayenge: ट्रेन में महिलाओं के साथ बदसलूकी, क्या आपकी चुप्पी भी ज़िम्मेदार है? x Lal Jhandi

बोलेंगे, बुलवाएंगे, हँसकर सब कह जाएंगे! दोस्तों, फिर हाज़िर हैं कुछ अटपटी-चटपटी, अनकही-अनसुनी बातों के साथ और अपने नारीवादी चश्मे के साथ। इस बार बात होगी ट्रेन के सफर की। सफर में बहुत कुछ ऐसा होता है, जिसे हम देखते हैं, महसूस करते हैं, लेकिन अक्सर यह सोचकर अनदेखा कर देते हैं कि अरे, जाने दो! किसी का बार-बार छूना, घूरना, जबरदस्ती बातचीत करना या बगल में बैठकर अश्लील वीडियो देखना—क्या ये सब महज़ छोटी-मोटी बातें हैं या किसी की निजी सीमाओं का उल्लंघन? हर बात पर हंगामा करना ज़रूरी नहीं, लेकिन हर असहजता को नज़रअंदाज़ करना भी सही नहीं। तो आइए, ट्रेन के सफर में कुछ देखे-अनदेखे पहलुओं पर बात करते हैं, नारीवादी चश्मे के साथ। क्योंकि सवाल सिर्फ सफर का नहीं, हमारी सहजता, सुरक्षा और निजी सीमाओं का भी है।

ये भी देखें – 

Bolenge Bulwayenge: विधवा महिलाओं की दूसरी शादी पर सामाजिक पाबंदी क्यों?

 

यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’

If you want to support  our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our  premium product KL Hatke

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *