जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे ठंडे पानी की प्यास भी बढ़ती जा रही है। आधुनिक बर्तनों के बढ़ते उपयोग के बीच अब लोग एक बार फिर पारंपरिक और प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। शहर के अस्पताल चौराहा, कोतवाली के सामने, नया बस स्टैंड और कुंडेश्वर जैसे स्थानों पर इन दिनों मिट्टी के बर्तनों की दुकानें सजी हुई हैं। यहां मटका, सुराही, तवा, कड़ाही, दही रखने के बर्तन, बोतल और गुल्लक जैसे कई सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।