मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक हिंसा, 40 मरे

लखनऊ /नई दिल्ली मुजफ्फरनगर में 27 अगस्त से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा अब लगभग पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैल चुकी है। एक फोटो पत्रकार समेत 40 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब दो हफ्तों से जारी हिंसा को न रोक पाने पर 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को नोटिस भेजा।

दिल्ली में अमन एकता मंच की अगुवाई में कई संस्थाओं ने यू पी भवन के सामने प्रदर्शन किया। इन लोगों ने प्रदेश सरकार द्वारा मुजफफरनगर मामले की गहरी जांच के लिए कई सदस्यों वाली जांच टीम बनाने की मांग की है।

पुलिस के अनुसार मामला मुजफ्फरनगर जिले के कवल गांव में लड़की से छेड़छाड़ का है। जाट समुदाय की लड़की के साथ मुसलमान समुदाय के एक लड़के से छेड़छाड़ करने पर लड़की के भाईयों ने मुस्लिम समुदाय के लड़के की हत्या कर दी। एक घंटे के भीतर ही दोनों हिंदू लड़कों की भी हत्या हो गई। व्यक्तिगत हिंसा से शुरू हुआ ये मामला दो दिन के भीतर दो संप्रदायों के बीच की हिंसा बन गया। 7 सितंबर को तो अन्य जिलों मेरठ, शामली, सहारनपुर, बागपत में भी दंगों की आग पहुंच गई। घटना के दो दिन बाद ही वहां कर्फ्यू लगा दिया गया था। मुजफ्फरनगर के जिला मजिस्ट्रेट कौशल राज शर्मा ने कहा अब हालात काबू में हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशसन पर उठ रहे सवाल

-27 सितंबर को एक के बाद एक तीन लड़कों की हत्या के बाद भी प्रशासन क्यों नहीं हुआ सख्त। तुरंत क्यों नहीं लगाया कर्फ्यू

-घटना के तीन दिन बाद शुक्रवार को जुम्मे की नवाज अदा करने के बाद बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता समेत कई स्थानीय नेताओं की मौजूदगी में करीब 2000 लोगों ने की बैठक। सात सितंबर को जाट समुदाय के लोगों ने भी महापंचायत बुलाई, इसमें लाखों लोग शामिल हुए। यहां से लौटते हुए इन लोगों पर हमले हुए। फिर भी क्यों नहीं चेता प्रशासन और सरकार।