जब औरतें मर्दों की हत्या करती हैं, तो सोशल मीडिया मीम्स से भर जाता है। लेकिन जब महिलाएं शिकार बनती हैं, तो समाज चुप्पी साध लेता है — आख़िर ये दोहरा मापदंड क्यों?
ये भी देखें –
‘यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’