खबर लहरिया Blog UP/Varanasi News: 3 महीने पहले लगा सोलर पंप, आज भी कुँए के पानी से चला रहे काम

UP/Varanasi News: 3 महीने पहले लगा सोलर पंप, आज भी कुँए के पानी से चला रहे काम

घर-घर नल से जल देने के दावे, जल जीवन मिशन के बड़े-बड़े वादे और मंचों से की गई घोषणाएँ अक्सर सुनने को मिलती है लेकिन ग्रामीण स्तर पर ये वादे फेल होते दिखते हैं। बनारस के ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी लोग कुँए के पानी पर निर्भर है। तीन महीने पहले लगाया गया सोलर पंप आज तक चालू नहीं हो पाया है। ऐसे में सरकार पर सवाल उठता है कि जब सरकार ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए सोलर पम्प लगाया है तो टंकियां क्यों सूखी हैं और सोलर पंप शोपीस बने क्यों हैं? क्या योजनाएँ सिर्फ कागज़ों में चल रही हैं और ज़मीन पर लोग अब भी प्यासे हैं?

सोलर पंप की तस्वीर (फोटो साभार : सुशीला)

रिपोर्ट – सुशीला, लेखन – सुचित्रा 

वाराणसी जिले के ग्रामीण इलाकों में जल जीवन मिशन के तहत सोलर पंप लगाए जा रहे हैं, ताकि गांव के लोगों को पीने का पानी मिल सके और उन्हें जल संकट का सामना न करना पड़े। इसी के अंतर्गत चोलापुर ब्लॉक के जगदीशपुर ग्राम सभा में सोलर पंप लगाया गया है। इस गांव की आबादी करीब 6000 है।

जल जीवन मिशन अधूरा

जल जीवन मिशन की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इस योजना के तहत लक्ष्य रखा गया कि हर ग्रामीण परिवार को नल से जल (हर घर जल) उपलब्ध कराया जाए। लेकिन व्यवस्था में यह मिशन पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है और लोगों की परेशानी अब भी वैसी ही बनी हुई है।

सूखी पड़ी टंकी की तस्वीर (फोटो साभार : सुशीला)

सोलर पंप लगा था तो उम्मीद जगी थी

मनोज का कहना है कि इस सोलर पंप से करीब 10 घर जुड़े हुए हैं। इलाके में पानी की भारी कमी को देखते हुए इसे ब्लॉक स्तर पर लगाया गया था, ताकि आसपास के घरों को शुद्ध और पर्याप्त पानी मिल सके। जब सोलर पंप लगाया जा रहा था, तब लोगों में काफी उम्मीद जगी थी कि अब पानी की समस्या खत्म होगी और उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। लेकिन हकीकत यह है कि पानी की सप्लाई शुरू ही नहीं हुई।

मनोज बताते हैं कि इस समस्या को लेकर ब्लॉक कार्यालय में शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि योजनाएँ कागज़ों में पूरी हो जाती हैं – जमीन की खुदाई हो जाती है, सोलर पंप लग जाता है, टंकी भी खड़ी हो जाती है, लेकिन जब तक गांव के लोग इसका वास्तविक इस्तेमाल नहीं कर पाते, तब तक ऐसी योजनाओं का क्या फायदा?

मनोज की तस्वीर (फोटो साभार : सुशीला)

पानी के लिए कुँए का करते हैं इस्तेमाल

आज भी गांव के लोग पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। कोई हैंडपंप का सहारा ले रहा है, तो कोई कुएं से पानी भर रहा है। जिनके घर में हैंडपंप है वे किसी तरह काम चला रहे हैं, जबकि जिनके पास यह सुविधा नहीं है, वे दूसरों के घर या आसपास के कुओं पर निर्भर हैं।

सुमन का कहना है कि वे लोग वर्षों से कुएं का पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। सरकार भले ही घर-घर पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी ले रही हो और जल जीवन मिशन व सोलर पंप जैसी कई योजनाएँ चला रही हो, लेकिन गांव स्तर पर इनका लाभ नहीं मिलता है। कुछ जगहों पर हैंडपंप हैं और कुछ घरों में सप्लाई पानी के कनेक्शन भी दिए गए हैं, लेकिन यह व्यवस्था केवल आसपास तक ही सीमित है। जो बस्तियां करीब 100 मीटर की दूरी पर हैं, वहां तक पानी की सप्लाई पहुंच ही नहीं पाती।

कुँए पर कपड़े धोती महिलाएं (फोटो साभार : सुशीला)

अधिकारी ने कहा जल्द होगा समाधान

खंड विकास अधिकारी शिवनारायण सिंह का कहना है कि यह सोलर पंप पंचायत निधि से लगाया गया है और कई ग्राम सभाओं में इससे पानी की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि यदि कहीं यह चालू नहीं हो पाया है, तो संभव है कि कुछ तकनीकी रुकावटें रही हों, जिनके कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका।

खंड विकास अधिकारी के अनुसार, अब तक उन्हें इस संबंध में कोई लिखित या मौखिक सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। हालांकि, आपके माध्यम से अगर यह जानकारी सामने आई है, तो वे इसे जल्द से जल्द दिखवाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कहीं ऐसी समस्या सामने आई थी, जहां तकनीकी खराबी पाई गई थी।

 

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