गाज़ियाबाद में 21 बीएलओ पर एफआईआर दर्ज की गई है जिसने इस व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें राज्यों में SIR फॉर्म भरने का काम किया जा रहा है।
देश में बीएलओ (Booth Level Officer) पर बढ़ते दबाव, असुरक्षा और लगातार सामने आती घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। कई राज्यों में बीएलओ की मौतों की खबरें सामने आ चुकी हैं कभी अत्यधिक काम के बोझ के कारण तो कभी फील्ड में सुरक्षा की कमी के चलते। लगातार बढ़ते जोखिम, लंबी ड्यूटी और ज़िम्मेदारियों के बोझ के बीच बीएलओ की स्थिति नाज़ुक होती जा रही है। अब यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि एक गहरी व्यवस्था-गत समस्या की ओर इशारा करती है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में 21 बीएलओ पर एफआईआर दर्ज की गई है जिसने इस व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें राज्यों में SIR फॉर्म भरने का काम किया जा रहा है। इस कार्य के लिए बीएलओ लोगों के घर-घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं। खबरों के अनुसार एफआईआर दर्ज कराने का कारण लापरवाही को बताया जा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के दौरान निर्वाचन कार्य में लापरवाही करने पर साहिबाबाद विधानसभा के 9 महिलाओं सहित 21 बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कहा जा रहा है कि जिला प्रशासन लगातार बीएलओ के काम का निरीक्षण कर रहा था और समय-समय पर लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मियों को चेतावनी भी दी गई थी लेकिन चेतावनी के बावजूद सुधार न होने पर कार्रवाई की गई। जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर प्रभारी (निर्वाचन) आलोक कुमार यादव ने यह एफआईआर दर्ज कराई।
कर्मचारियों की लापरवाही है कारण
नायब तहसीलदार और निर्वाचन प्रभारी आलोक कुमार यादव ने अपनी शिकायत में बताया कि संबंधित कर्मचारियों की यह लापरवाही छोटी बात नहीं है। उनके अनुसार यह सीधे तौर पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 का उल्लंघन माना जाता है। इस धारा में साफ लिखा है कि नियम तोड़ने पर कम से कम तीन महीने और अधिकतम दो साल की जेल की सजा हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में अभी कुल 3,089 बीएलओ एसआईआर से जुड़े काम संभाल रहे हैं। इनका लक्ष्य 4 दिसंबर तक लगभग 28 लाख मतदाताओं तक पहुँचकर यह प्रक्रिया पूरी करना है। बीएलओ के रूप में लगाए गए लोगों में बड़ी संख्या सरकारी शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भी है जो इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।
कर्मचारी प्रतिदिन लगभग 15 घंटे समर्पित कर रहे हैं
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार एसोसिएशन के गाजियाबाद जिला अध्यक्ष दीपक शर्मा ने कहा है कि “यह प्रशासन द्वारा पूरी तरह से उत्पीड़न है जबकि शिक्षक और अन्य कर्मचारी देर शाम तक काम कर रहे हैं और मतदाताओं तक पहुंचने के लिए प्रतिदिन लगभग 15 घंटे समर्पित कर रहे हैं। कर्मचारियों पर बहुत दबाव है और परिणामस्वरूप वे कठोर कदम उठा रहे हैं। हमने जिला अधिकारियों से मुलाकात की और उनसे एसआईआर कार्यों की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।”
कर्मचारियों के बयान
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, डासना में काम कर रहे एक बीएलओ ने बताया कि कम समय में सारा काम खत्म करने का दबाव इतना बढ़ गया है कि वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे हैं। उनका कहना है कि घर में चाहे कोई भी समस्या क्यों न हो उन्हें छुट्टी नहीं मिल पा रही है। लगातार 22 दिनों से बिना ब्रेक के काम करना पड़ रहा है। रविवार और सरकारी छुट्टियों पर भी। आधिकारिक समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बताया गया है लेकिन अक्सर काम 6–7 बजे तक खिंच जाता है। ऊपर से पर्यवेक्षकों की लगातार कॉल और फीडबैक की मांग भी तनाव बढ़ा रही है।
इससे पहले मौत की खबर
बता दें, इससे पहले भी एसआईआर के इस काम के बढ़ते तनाव के कारण अब तक 16 बीएलओ की मृत्यु हो चुकी है। किसी ने आत्महत्या की, किसी को हार्ट अटैक आया तो किसी की ब्रेन की समस्या से मौत हो गई।
जिन बीएलओ पर एफआईआर दर्ज हुई है —
सुनीता शुक्ला, रेनू कुमारी, अनुराधा, अर्चना रानी, रीना शर्मा, चंद्रपाल सिंह, मिलिंद कुमार, मनीष सिसौदिया, दिग्विजय सिंह, अजय कुमार, विनिता, मुकेश गुप्ता, अंकित नागर, राकेश कुमार, सुशील कुमार, पीयूष शर्मा, अरुण कुमार, अनिल कुमार, शशि प्रभा, सीरीन फातमा, सुनीता पाल।
डीएम ने लोगों से अपील की
गाज़ियाबाद के डीएम ने अपील की कि जिन लोगों ने अब तक अपना फॉर्म नहीं भरा है वे जल्दी से फॉर्म लेकर उसे भरें और अपने बीएलओ को सौंप दें। प्रशासन की ओर से आरडब्ल्यूए, व्यापारिक संगठनों और अधिवक्ता संगठनों को भी पत्र भेजकर इस प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग समय पर फॉर्म जमा कर सकें।
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