पुराने जमाने में राजा-महाराजा और बड़े कास्तकार लोगों के लिए कुएं और बावलियां बनवाते थे, ताकि उनकी प्रजा और आसपास के लोगों को पानी मिल सके। उस दौर में यही पानी के प्रमुख स्रोत हुआ करते थे। ऐसी ही एक पुरानी बावली बांदा जिले के पदारथपुर गांव के मजरा भवानीपुर में भी मौजूद है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह बावली करीब 5 से 6 पीढ़ियों पुरानी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी इस बावली में नीचे जाने के लिए खूबसूरत सीढ़ियां थीं और पानी रखने के लिए घिनौची बनी हुई थी। बुजुर्गों के अनुसार यह बावली कभी इंसानों के साथ-साथ जानवरों के लिए भी पानी का महत्वपूर्ण स्रोत हुआ करती थी। लेकिन समय के साथ देखरेख के अभाव में इसकी हालत लगातार खराब होती गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक बच्चे, बड़े और जानवर कई बार इसमें गिर चुके हैं। लोगों का कहना है कि आज यह बावली किसी ‘मौत के कुएं’ से कम नहीं है। लोगों की मांग है कि इस ऐतिहासिक धरोहर का जल्द से जल्द संरक्षण और जीर्णोद्धार कराया जाए, ताकि इसे सुरक्षित रखा जा सके और भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
ये भी देखें –
महोबा- दमौरा गांव में कुआँ धँसने के कारण दो सगे भाइयों की मौत
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’