सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रही याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फिलहाल इन नियमों पर रोक लगा दी है। अब इस केस की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। अब इसके बाद ST,SC OBC छात्राओं का प्रदर्शन सड़क पर उतर आया है।
देश के कई हिस्सों में यूजीसी कानून को लेकर विरोध और राजनीतिक बयानबाज़ी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रही याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फिलहाल इन नियमों पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ये नियम साफ़ तौर पर परिभाषित नहीं हैं और इनके गलत इस्तेमाल की आशंका है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है। अब इस केस की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
इस विवाद का पूरा मामला
UGC ने अपने नए नियमों को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ नाम दिया है। इन नियमों का मकसद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में SC, ST और OBC छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना है। इसके लिए संस्थानों में अलग-अलग समितियां बनाने, हेल्पलाइन शुरू करने और निगरानी टीमें गठित करने के निर्देश दिए गए थे ताकि इन वर्गों के छात्रों की शिकायतों पर सुनवाई हो सके। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में बराबरी और जवाबदेही बढ़ेगी।
वहीं सवर्ण वर्ग के कुछ छात्रों ने इन नियमों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि भेदभाव की परिभाषा एकतरफा रखी गई है और इससे कॉलेजों में तनाव का माहौल बनेगा। उनका आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्रों को पहले से ही दोषी मान लिया गया है जिससे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। इसी वजह से सवर्ण छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किए। अब बीते कल यानी 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी है लेकिन इसके बाद अब SC, ST और OBC समुदाय से जुड़े लोग सड़कों पर उतर आए हैं और वे इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा #UGC के नए प्रावधान पर रोक लगाए जाने के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रदर्शन शुरू हो गया है।
कैम्पस में बड़ी संख्या में SC, ST और OBC समाज से जुड़े छात्र सड़कों पर उतर आए हैं।
सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की लड़ाई ज़िन्दाबाद। pic.twitter.com/mRUyTxBqHx
— Dr. Laxman Yadav (@DrLaxman_Yadav) January 29, 2026
कोर्ट द्वारा दिए गए चार कमेंट्स
– सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब पहले से मौजूद नियमों में सभी तरह के भेदभाव को शामिल किया गया है तो फिर “जाति आधारित भेदभाव” की अलग परिभाषा बनाने की जरूरत क्यों पड़ी।
– अदालत ने यह भी पूछा कि नए रेगुलेशंस में रैगिंग को क्यों शामिल नहीं किया गया जबकि यह कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस की एक बड़ी समस्या है।
– चीफ जस्टिस ने कहा कि अनुसूचित जातियों में भी अब कई लोग आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं और सवाल किया कि क्या हम जातिविहीन समाज की ओर बढ़ने की बजाय फिर से पीछे जा रहे हैं।
– अलग-अलग जातियों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के सुझाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में भी देश की एकता दिखनी चाहिए और सभी को साथ रहना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बीबीसी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि फिलहाल यूजीसी के साल 2012 में बनाए गए पुराने नियम ही लागू रहेंगे। अदालत में नए नियमों को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ये नियम कुछ समुदायों को अलग करने वाले हैं। थोड़ी देर की सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि इस मामले में अभी कई संवैधानिक और कानूनी पहलुओं की जांच होना बाकी है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नए नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इनके गलत इस्तेमाल की आशंका है। उन्होंने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस मुद्दे की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का सुझाव दिया जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यूजीसी इन याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करे।
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किसान नेता राकेश टिकैत द्वारा भी इस विवाद पर बयान
ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर किसान नेता राकेश टिकैत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने अदालत के कदम को मौजूदा हालात में सही बताया और कहा कि अगर कोई कानून समाज में टकराव बढ़ाता है तो उससे फायदा कम और नुकसान ज़्यादा होता है। ABP न्यूज़ के अनुसार किसान नेता राकेश टिकैत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अदालत हालात को अच्छी तरह समझती है। उनके मुताबिक कोर्ट ने देखा कि इस मुद्दे को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं और कई संगठनों में नाराज़गी फैल रही है इसलिए उसने सही समय पर हस्तक्षेप किया।
टिकैत ने कहा है कि अगर कोई कानून समाज में विवाद और तनाव बढ़ाने लगे तो सरकार को उस पर फिर से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार यूजीसी से जुड़ा यह कानून समाज में खींचतान और टकराव पैदा कर सकता है। इससे अलग-अलग जातियों के बीच तनाव और हिंसा की स्थिति भी बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में अभी आपसी समझ और तालमेल बना हुआ है और उसे बिगाड़ने की जरूरत नहीं है। देश को संविधान और कानून की सीमा में रहते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए।
स्वर्ण जाति के छात्राओं के बाद ST,SC OBC छात्राओं का प्रदर्शन
स्वर्ण जाति के छात्राओं के बाद अब ST,SC OBC छात्राओं का प्रदर्शन सड़क पर उतर आया है। जब सरकार द्वारा नए नियम लागू किए गए थे तो स्वर्ण जाति के छात्राओं द्वारा कई विरोध प्रदर्शन किए गए। अब उस नियम पर स्टे लगने के बाद ST,SC OBC छात्राओं के साथ साथ ST,SC OBC अधिवक्ताओं द्वारा भी इस स्टे का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
#UGCAct पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ देशभर में आक्रोश तेज हुआ 🚨
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में इस कानून के समर्थन में SC,ST व OBC समाज के हजारों अधिवक्ता सड़क पर उतरे और आंदोलन किया #We_support_UGC_Act pic.twitter.com/guB4TFJExc
— Priyanshu Kumar (@priyanshu__63) January 30, 2026
बता दें कोर्ट से स्टे लगने के बाद स्वर्ण जाति के छात्राओं के द्वारा खुशी मनाई जा रही है और वे रंग गुलाल उड़ाते भी नजर आए।
Celebrations in Varanasi for Supreme Court’s Stay on the new UGC rules#UGCRegulations #supremecourt pic.twitter.com/Tqeti4PMWy
— Khabar Lahariya (@KhabarLahariya) January 29, 2026
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रधानमंत्री को दिया धन्यवाद
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यूजीसी के नए नियमों पर लगी रोक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का धन्यवाद किया। उन्होंने इसे सरकार की पहल से जुड़ा फैसला बताया।
लेकिन उनके इस बयान पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने कम्युनिटी नोट जोड़ दिया। नोट में साफ किया गया कि यूजीसी के नए नियमों पर रोक सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है न कि सरकार ने। पोस्ट में मोदी और शाह को इसका श्रेय दिया गया था जबकि हकीकत यह है कि यह फैसला अदालत का है।
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