10 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट करने, हिरासत में लेने, कैमरे तोड़ने और फुटेज डिलीट करने का दबाव बनाने के आरोप लगाए। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के मुताबिक, प्रदर्शन और उसके बाद के दो दिनों में कम से कम 35 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। इस रिपोर्ट में जानिए कि प्रेस कार्ड होने के बावजूद पत्रकारों को क्यों रोका गया, रिपोर्टिंग के दौरान उनके साथ क्या हुआ और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पत्रकारों को काम करने से रोकने के आरोप क्यों उठ रहे हैं। साथ ही, प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को कथित तौर पर धमकाने वाले संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल। जब पत्रकारों को घटनाएं दर्ज करने से रोका जाता है, तो इसका असर जनता तक पहुंचने वाली जानकारी पर पड़ता है। आखिर पत्रकारों के साथ हुई इन घटनाओं की जवाबदेही कौन लेगा?
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