ईरान–इज़राइल–अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुँचता दिखाई दे रहा है। भारत अपनी लगभग 80 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से समुद्री रास्ते के जरिए आता है। उज्ज्वला योजना के बाद गांवों में भी एलपीजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिससे अब लाखों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हो गए हैं। इसके अलावा 11 मार्च से ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच का समय 25 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। अर्बन अरे में अभी भी ये गैप 25 दिन का ही है और ये जानकारी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गयी। लेकिन इसके लिए न तो कोई औपचारिक नोटिस जारी किया गया और न ही पहले से कोई सूचना दी गई। एक तरफ सरकार के मंत्री गैस की सप्लाई में किसी कमी को मानने से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिना किसी आधिकारिक घोषणा के ग्रामीण इलाकों में सप्लाई चेन का अंतराल 45 दिन कर दिया गया है। सवाल ये है कि क्या एक सिलेंडर ग्रामीण इलाको के बड़े परिवारों में वास्तव में 45 दिन तक चल सकता है? अगर सप्लाई में कोई समस्या नहीं है, तो बुकिंग के बीच का समय बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
ये भी देखें –
Iran–Israel: युद्ध का असर भारत की रसोई तक, पेट्रोल-गैस संकट के बीच LPG सप्लाई पर नई पाबंदी
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’