ग्रामीण भारत में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेट और डिजिटल भुगतान सेवाओं का विस्तार तो हुआ है, लेकिन डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा की समझ उसी गति से विकसित नहीं हो पाई। छोटे व्यापारी, किसान, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ और पहली बार ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करने वाले लोग ठगों के आसान निशाने बन रहे हैं। फर्जी केवाईसी, लोन अप्रूवल, निवेश योजनाएँ और सरकारी योजना के नाम पर आने वाली कॉल्स लोगों को जाल में फँसा रही हैं। समाधान के तौर पर विशेषज्ञ एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, क्षेत्रीय भाषाओं में साइबर जागरूकता अभियान, पंचायत स्तर पर डिजिटल स्वयंसेवक और मजबूत कानूनी ढाँचे की आवश्यकता पर जोर देते हैं। बैंकिंग सुरक्षा उपायों, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली को सशक्त करना भी जरूरी है। डिजिटल विस्तार के साथ डिजिटल सुरक्षा को समान प्राथमिकता देना अब समय की मांग है
ये भी देखें –
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’