खबर लहरिया Hindi दिल्ली के 6 मेट्रो स्टेशन बंद और राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट तक आज मार्च, कल वोट चोरी प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ क्या हुआ? 

दिल्ली के 6 मेट्रो स्टेशन बंद और राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट तक आज मार्च, कल वोट चोरी प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ क्या हुआ? 

12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने वाला है। मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है और छह मेट्रो स्टेशन बंद रखने की घोषणा की गई है। इससे पहले 10 और 11 अक्टूबर को CJP और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन की कवरेज कर रहे वरिष्ठ पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स को रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश के आरोपों ने प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए हैं।

10 अक्टूबर को वोट चोरी के खिलाफ CJP और छात्र संगठन का प्रदर्शन (फोटो साभार: खबर लहरिया)            

बीते दो दिन CJP के प्रदर्शन के बाद 12 अक्टूबर लोकसभा के विपक्ष नेता राहुल गांधी द्वारा प्रदर्शन एलान किया गया है। विपक्ष नेता सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने वाले हैं। इसी के मद्देनज़र दिल्ली में फिर से राजधानी के यातायात मार्ग प्रभावित हो सकता है। इस संबंध में दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस द्वारा एडवाइजरी जारी किया गया है है। साथ ही वाहन चालकों को अपने यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है।


विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने एक्स अकाउंट में पोस्ट कर लिखा है कि “कल हम भारतीय बनकर, दल, लिंग, जाति, समुदाय और राज्य से परे एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करेंगे। युवा, सभी विपक्षी दल, नागरिक समाज समूह, वे सभी जो लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं और भारत के संविधान के साथ खड़े हैं, हमारे साथ चलेंगे। हम राष्ट्र की ओर से मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें वोट चोरी को समाप्त करने, एसआईआर को रोकने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी।” “पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर की ओर, हम सब एक साथ चलेंगे। देश का युवा, सदस्य दल, सिविल सोसायटी और लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखने वाले, भारत के संविधान के साथ जुड़े सभी लोग हमारे साथ चलेंगे। हम देश की ओर से मुख्य न्यायाधीश को एक सीमा तय करेंगे। हमारी मांग है – वोट चोरी बंद हो, SIR पर रोक और ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा।” 

हालाँकि इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च और उनसे मुलाक़ात की मांग पर भारत के मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत द्वारा न मिल पाने की बात कही गई। ANI के रिपोर्ट अनुसार उन्होंने कहा कि “मुझे कल मुलाकात के अनुरोध के संबंध में एक पत्र प्राप्त हुआ था और मैंने कल रात इसका जवाब देते हुए उन कारणों को स्पष्ट किया है जिनकी वजह से मैं मुलाकात नहीं कर पाऊंगा।”

दिल्ली उच्च न्यायालय में आज 12 अक्टूबर को भारतीय युवा कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई होगी। याचिका में जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने को चुनौती दी गई है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमित महाजन करेंगे।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट की ओर इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 6 मेट्रो स्टेशन बंद 

इसी के साथ ही आज कुछ सुरक्षा कारणों से राजधानी के 6 मेट्रो स्टेशन भी बंद रहेंगे। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ये निर्देश दिया गया है कि सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए जाएँ। जो मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे वो हैं – पटेल चौक, जनपथ, मंडी हाउस, राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (केंद्रीय सचिवालय) और बाराखम्बा रोड। आज यानी 12 अक्टूबर 2026 को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक ये 6 मेट्रो बंद रहेंगे। 


11 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन में कई पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की के साथ डिटेन की कोशिश

10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। लेकिन प्रदर्शन से पहले ही राजधानी में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इनमें कई नेता और संगठन के पदाधिकारी भी शामिल थे।

जानकारी के मुताबिक, शाम तक करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें वकील भी शामिल थे। अलग-अलग थानों में रखे गए लोगों को देर रात तक रिहा किया गया। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और कार्यकर्ता अभिजीत दीपके, आशुतोष और सौरभ को अगले दिन यानी 11 अक्टूबर की सुबह रिहा किया गया। रिहाई के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस विरोध प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) समेत कई छात्र संगठन भी शामिल थे। इन संगठनों ने 11 अक्टूबर को दोबारा आंदोलन शुरू किया लेकिन इसी दौरान प्रदर्शनकारियों को फिर से हिरासत में लिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम में एक और गंभीर बात सामने आई। 11 अक्टूबर को प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कई पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें भी हिरासत में लेने की कोशिश की गई। पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। ऐसे में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस का यह व्यवहार कई सवाल खड़े करता है।

पत्रकारों के नाम – 

प्रदर्शन कवरेज के दौरान कई पत्रकारों को आईडी कार्ड दिखाने और कवर न करने का दिल्ली पुलिस द्वारा दबाव बनाया गया। 

– स्वतंत्र पत्रकार श्याम मीणा सिंह को रात में पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया। 

– द हिंदू के महिला पत्रकार को भी हिरासत में लिया गया जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। 

– इससे पहले रेड माइक के पत्रकार सौरभ शुक्ला ने भी एक वीडियो के जरिए प्रदर्शन की कवरेज करने पहुंचे स्वतंत्र पत्रकारों की परेशानियों को सामने रखा था। उन्होंने अपने वीडियो में बताया कि जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़क पर बैरिकेडिंग की गई थी, जिसके अंदर स्वतंत्र पत्रकारों को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। वहीं कुछ छोटे कंटेंट क्रिएटर्स को हिरासत में लेकर बस में बैठा दिया गया।

– जानकारी के अनुसार राणा अयूब, अजीत अंजुम, श्रीनिवासन जैसे वरिष्ठ पत्रकारों को भी कवरेज करने से रोकने की बात कही गई। 

– कंटेंट क्रिएटर रमित वर्मा को भी धक्का-मुक्की के साथ इनर सर्किल से उठा लिया गया। 

– पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा को भी डिटेन किया गया था। 

इनके अलावा भी कई पत्रकारों को हिरासत में लेने की कोशिश की गई और उन्हें प्रदर्शन की कवरेज करने से रोकने के आरोप लगे। इनमें वरिष्ठ पत्रकारों के साथ स्वतंत्र पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर्स भी शामिल थे।

बता दें दिल्ली पुलिस द्वारा 5 अक्टूबर को प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई थी। यह एडवाइजरी पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को भेजी गई थी। इसके बावजूद कई मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। ऐसे में सवाल है कि क्या पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी एडवाइजरी की जानकारी जमीनी स्तर पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों तक पहुंची थी? अगर पहुंची थी तो उसका पालन क्यों नहीं किया गया?

यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’

If you want to support  our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our  premium product KL Hatke

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *