केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते दस वर्षों में देशभर में 93,000 से अधिक स्कूल स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014-15 से 2019-20 के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 24,590 स्कूल बंद हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 22,438 स्कूल बंद किए गए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते दस वर्षों में देशभर में 93,000 से अधिक स्कूल स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। बता दें यह जानकारी लोकसभा में दी गई। सीकर (राजस्थान) से सीपीआई(एम) सांसद अमरा राम के सवाल पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने 2 फरवरी को बताया कि सबसे ज्यादा स्कूल पहले छह वर्षों में बंद हुए। सरकारी जवाब के अनुसार 2014-15 से 2019-20 के बीच करीब 70,000 स्कूल बंद हुए जो इस पूरे दशक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं 2020-21 से 2024-25 के बीच 18,727 स्कूलों को बंद किया गया।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे ज़्यादा स्कूल बंद हुए
राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014-15 से 2019-20 के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 24,590 स्कूल बंद हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 22,438 स्कूल बंद किए गए।
2014-15 से 2019-20 के बीच –
– उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 24,590 स्कूल बंद हुए।
– मध्य प्रदेश में 22,438 स्कूल बंद किए गए।
– झारखंड में 5,000 से अधिक स्कूल बंद हुए।
– राजस्थान में 2,500 से ज्यादा स्कूल बंद हुए।
– महाराष्ट्र में करीब 2,000 स्कूल बंद किए गए।
– पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में लगभग 1,000-1,000 स्कूल बंद हुए।
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2020-21 से 2024-25 के बीच –
– जम्मू-कश्मीर में 4,000 से अधिक स्कूल बंद हुए।
– पश्चिम बंगाल में 1,200 से ज्यादा स्कूल बंद किए गए।
– महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में 600 से अधिक स्कूल बंद हुए।
– इस अवधि में मध्य प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा स्कूल जम्मू-कश्मीर में बंद हुए।
– ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी 1,000 से अधिक स्कूल बंद किए गए।
सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट
शिक्षा मंत्रालय के सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार कम हो रही है। 2020-21 में भारत में 10,32,049 सरकारी स्कूल थे लेकिन 2024-25 में यह संख्या घटकर 10,13,322 रह गई। यानी पांच साल के भीतर 18,727 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। यह बदलाव खास तौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों को प्रभावित कर रहा है जहां लोग सबसे ज्यादा सरकारी स्कूलों पर निर्भर रहते हैं।
निजी स्कूलों में तेजी से बढ़ोतरी
जहां सरकारी स्कूल घट रहे हैं वहीं निजी (बिना अनुदान वाले) स्कूलों की संख्या बढ़ती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में देश में 3,31,108 निजी स्कूल थे जो 2024-25 में बढ़कर 3,39,583 हो गए। इसका मतलब है कि केवल एक साल में 8,475 नए निजी स्कूल जुड़े हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि शिक्षा का झुकाव धीरे-धीरे निजी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।
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सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता
सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पिछले पांच वर्षों में 18,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों का बंद होना देश की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है। उन्होंने लिखा कि “सरकार ने राज्यसभा में स्वीकार किया: भारत में पिछले 5 वर्षों में 18,727 सरकारी स्कूल कम हो गए जबकि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या मात्र एक वर्ष में 8,475 बढ़ गई। सार्वजनिक शिक्षा सिकुड़ रही है। निजी शिक्षा का विस्तार हो रहा है।”
Govt admits in Rajya Sabha: India lost 18,727 government schools in 5 years, while private unaided schools rose by 8,475 in just one year.
Public education is shrinking. Private schooling is expanding.#education #RajyaSabha pic.twitter.com/8yzOVl75n4
— John Brittas (@JohnBrittas) February 4, 2026
संसद में दिए गए सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने इसे एक चिंताजनक रुझान बताया। ब्रिटास का कहना है कि सरकारी स्कूलों का ढांचा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है, खासकर गांवों और आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में। इससे उन बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है जो मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं और जिनके लिए निजी स्कूलों तक पहुंच आसान नहीं है।
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स्कूल बंद होने का कारण
TIMES NOW Education के अनुसार जिन स्कूलों को बंद किया गया वे ज़्यादातर गांवों और दूर-दराज़ के इलाकों में थे जहां बच्चों की संख्या लगातार घट रही थी। सरकार के मुताबिक स्कूल बंद होने की बड़ी वजह छात्रों की कम मौजूदगी यानी छात्रों की कम संख्या है। इसके साथ ही नीतियों के तहत कई स्कूलों को आपस में जोड़ दिया गया और लोगों के गांवों से शहरों की ओर जाने जैसे बदलाव भी इसका कारण बने। कई जगहों पर पास-पास मौजूद स्कूलों को इसलिए मिलाया गया ताकि उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सके इमारतों की हालत सुधारी जा सके और शिक्षकों की बेहतर तैनाती की जा सके।
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