खबर लहरिया Hindi Bihar Salary Scam: बिहार में शिक्षकों की सैलरी भुगतान का घोटाला और गड़बड़ी, जानें क्या है पूरा मामला 

Bihar Salary Scam: बिहार में शिक्षकों की सैलरी भुगतान का घोटाला और गड़बड़ी, जानें क्या है पूरा मामला 

बिहार में सरकारी शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर इन दिनों चर्चा तेज है। 9 अक्टूबर 2026 को वेतन से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका के बाद सरकार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन व भत्तों की जांच के निर्देश दिए हैं। बिहार के 9 लाख शिक्षाकर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के अगले वेतन भुगतान पर कथित तौर पर रोक लगा दी गई है। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मीडिया से बात करते हुए जानकारी दी। इस खबर के बाद शिक्षकों के बीच अक्टूबर की सैलरी को लेकर चिंता बढ़ गई है। 

फोटो साभार: एआई द्वारा निर्मित

ऐसे में सवाल है कि बिहार में वेतन भुगतान की जांच क्यों हो रही है? क्या सभी शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई है या केवल रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है? और इस पूरी प्रक्रिया का शिक्षकों पर क्या असर पड़ सकता है? 

बिहार में सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान कुछ गड़बड़ियां सामने आने की खबरें आई हैं। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों के वेतन का हिसाब सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया। कुछ मामलों में कर्मचारियों को मिलने वाली तय रकम से अधिक राशि रिकॉर्ड में दिखाई गई। यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट जांच में सामने आया। 

बिहार के भागलपुर से हुआ खुलासा 

बिहार में सरकारी शिक्षकों के वेतन भुगतान में गड़बड़ी का मामला सबसे पहले भागलपुर जिले के शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका के नाम पर करीब 98.12 लाख रुपये के कथित भुगतान के मामले से सामने आया। इसके बाद वित्त विभाग ने 9 अक्टूबर 2026 को वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने शिक्षा विभाग को राज्यभर में शिक्षकों, अधिकारियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर वेतन भुगतान में गड़बड़ी मिलती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

इसके बाद जाँच तेज हो गई और पटना, भागलपुर और सुपौल में शुरुआती जांच के दौरान करीब 5,000 संदिग्ध मामले सामने आए। इसके अलावा औरंगाबाद, बांका और समस्तीपुर समेत अन्य जिलों में भी वेतन भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं की आशंका जताई गई। 

वेतन भुगतान से पहले जाँच और रोक 

खबर यह भी है कि शिक्षा विभाग को अगले महीने का वेतन जारी करने से पहले सभी अधिकारियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की अच्छी तरह जांच करनी होगी। साथ ही, वेतन बिल तैयार करने, उसकी जांच करने और मंजूरी देने के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

आपको बता दें कि इस जांच के दायरे में करीब 9 लाख शिक्षक, अधिकारी और शिक्षा विभाग के कर्मचारी तथा लगभग 1.30 लाख पुलिसकर्मी बताए गए हैं। 

वहीं इस मामले पर उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “CAG रिपोर्ट के आधार पर, पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग में भुगतान को लेकर कुछ अनियमितताएं पाई गई हैं। इनकी जांच की जा रही है और इसी वजह से संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।”

अगर जांच में तय वेतन से अधिक भुगतान या रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज होने की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के मुताबिक, अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली भी की जा सकती है।

शिक्षकों पर वेतन घोटाले का असर 

बिहार में शिक्षकों के वेतन भुगतान में कथित गड़बड़ी का मामला का सीधा असर उन शिक्षकों पर भी पड़ सकता है, जो नियमित रूप से स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाते हैं और अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए हर महीने मिलने वाले वेतन पर निर्भर हैं। अगर वेतन रिकॉर्ड की जांच के कारण भुगतान में देरी होती है, तो शिक्षकों को घर का किराया, बच्चों की फीस, किस्तों और रोजमर्रा के खर्चों को संभालने में परेशानी हो सकती है।

यह मामला सरकारी व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है। यदि किसी कर्मचारी की फर्जी आईडी बनाई गई या तय वेतन से अधिक रकम दर्ज करके भुगतान किया गया, तो सवाल उठता है कि वेतन बिल तैयार करते समय, उसकी जांच के दौरान और भुगतान की मंजूरी देते वक्त इन गड़बड़ियों को पकड़ा क्यों नहीं गया? 

 

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