खबर लहरिया जवानी दीवानी सावन के हरे रंग व पहनावा | भोजपुरी पंच तड़का

सावन के हरे रंग व पहनावा | भोजपुरी पंच तड़का

सावन महीने में हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है, और इसे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में अलग-अलग तरीकों से मानते हैं। सावन में हरे रंग को खासकर पहनवाने में देखा जा सकता है। आज के शो में टॉप-5 ऐसे पहनवाने के बारे में बताने जा रही हूँ जो सावन महीने में हरे रंग का प्रतीक होते हैं।

ये भी देखें – सावन के टॉप-5 गाने | भोजपुरी पंच तड़का

सावन के पहनावे के बारे में जानें

चूड़ी का महत्व:

श्रावण मास में चूड़ी पहनने का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। सावन में महिलाएं विशेष रूप से गौरी पूजा और सोमवारी व्रत के दौरान चूड़ी पहनती हैं। यह धार्मिक परंपरा सावन के महीने में माँ गौरी और भगवान शिव की पूजा का भाग है।

हरी ड्रेस

सावन महीने में प्रकृति अपने आनंदमयी रूप में खिल उठती है। हरे रंग का पहनना इस मौसम में अपने संबंध को और गहरा बनाता है। हरे रंग को शांति, समृद्धि और शुभ का प्रतीक माना जाता है। सावन महीने में हरे रंग के वस्त्र पहनने से व्यक्ति का मन शांत होता है।

मेहंदी

मेहंदी  के रंग को सावन महीने में विशेष रूप से महत्व दिया जाता है। इस महीने में लोग अपने हाथों में मेहंदी के रंग को सुन्दरता और प्रकृति के साथ जुड़ा देखने के लिए लगाते हैं।

हरी बिंदी

हरी बिंदी को सावन में लगाना शुभ माना जाता है। यह श्रृंगार का एक अहम अंग है जो विशेष तौर से सुहागिन महिलाएं लगाती हैं। इसे माथे पर लगाने से चेहरे की रौनक बढ़ती है और महिला और भी सुन्दर नजर आती है।

ज्वेलरी / गहने

सावन महीने में हरे रंग की ज्वेलरी पहनना भारतीय महिलाओं के लिए विशेष तौर पर पसंदीदा होता है। हरा रंग सावन के महीने में प्रिय होता है और यह ज्वेलरी के माध्यम से सुंदरता और श्रृंगार का प्रतीक बनता है।

सावन और हरे रंग से रंगे इस महीने में, प्रकृति के इस खुशियों भरे मेले में भाग लेने का आनंद ही कुछ और होता है। यह एक सुंदर और प्रेमभरा समय होता है, जो नई उमंगों के साथ हमारे जीवन को खुशियों से भर देता है। तो आप भी इस सावन हरे रंग में रंग जाइये और बरसात का मज़ा लीजिए।

 

‘यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’

If you want to support  our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our  premium product KL Hatke