अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसका नाम ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026’ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 25 साल से कम उम्र के करीब 40 से 42 प्रतिशत ग्रेजुएट युवा बेरोजगार हैं।
अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसका नाम ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026’ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 25 साल से कम उम्र के करीब 40 से 42 प्रतिशत ग्रेजुएट युवा बेरोजगार हैं। इतना ही नहीं कुल बेरोजगार युवाओं में लगभग 67 प्रतिशत ग्रेजुएट हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुशल काम की कमी के कारण शुरुआती सैलरी भी घट रही है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आने वाले समय में रोजगार का संकट और बढ़ सकता है। 2030 के बाद काम करने वाली आबादी का अनुपात कम होने लगेगा ऐसे में ज्यादा रोजगार पैदा करना जरूरी होगा। हालांकि देश में ITI (आईटीआई,औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) संस्थानों की संख्या 2010 के बाद काफी बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद रोजगार की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। यह रिपोर्ट शिक्षा और नौकरी के बीच के अंतर को भी उजागर करती है और बताती है कि इस दिशा में सुधार की जरूरत है।
ग्रेजुएट युवाओं में बढ़ी बेरोजगारी
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश में पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या तो तेजी से बढ़ी है लेकिन उसी हिसाब से उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है। 2004 में जहां कुल बेरोजगार युवाओं में करीब 32% ग्रेजुएट थे (लगभग 30 लाख), वहीं 2023 तक यह बढ़कर 67% यानी करीब 1.1 करोड़ हो गया।
इसी दौरान युवाओं में ग्रेजुएट्स की कुल संख्या भी काफी बढ़ी है। 2004 में यह हिस्सा करीब 10% (1.9 करोड़) था जो 2023 में बढ़कर 28% (6.3 करोड़) हो गया। यानी हर साल औसतन करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट जुड़ते गए, लेकिन नौकरी पाने वालों की संख्या सिर्फ 28 लाख प्रति साल ही बढ़ी। इनमें भी करीब 17 लाख ही ऐसी नौकरियां थीं, जिनमें नियमित वेतन मिलता है।
सीधी बात ये है कि जितनी तेजी से पढ़े-लिखे युवा बढ़ रहे हैं उतनी तेजी से उनके लिए नौकरियां नहीं बन पा रही हैं। यही वजह है कि ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है।
पिछले कुछ समय में देशभर में बेरोज़गार युवाओं के प्रदर्शन की खबरें लगातार सामने देखने को मिली। छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक कई राज्यों में युवा रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरते दिखे हैं। एक तरफ सरकार का कहना है कि युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ाए गए हैं लेकिन दूसरी तरफ बार-बार हो रहे ये प्रदर्शन इस बात की ओर इशारा करते हैं कि ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है।
कमाई और शिक्षा के बीच बढ़ता अंतर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ग्रेजुएट और नॉन-ग्रेजुएट युवाओं की कमाई के बीच का फर्क समय के साथ बढ़ता गया है खासकर 2004 से 2011 के बीच यह अंतर ज्यादा तेजी से बढ़ा।
इसके अलावा 2017 के बाद से शिक्षा में जुड़े युवा पुरुषों की संख्या भी कम हुई है। 2017 में जहां यह हिस्सा 38% था वहीं 2024 में घटकर 34% रह गया। रिपोर्ट के अनुसार इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कई युवाओं को परिवार की आर्थिक मदद के लिए पढ़ाई छोड़कर काम करना पड़ रहा है।
महंगी पढ़ाई बनी बड़ी रुकावट
रिपोर्ट में बताया गया है कि आज भी उच्च शिक्षा तक पहुंच हर किसी के लिए आसान नहीं है। खासकर इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे प्रोफेशनल कोर्स काफी महंगे होते हैं जिनकी फीस कई गरीब परिवारों की साल भर की कमाई से भी ज्यादा होती है। यही वजह है कि आर्थिक तंगी के कारण कई युवा आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते।
क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक 2007 से 2017 के बीच इस आर्थिक अंतर में कुछ कमी जरूर आई है लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इस अध्ययन में पिछले करीब 40 साल के सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है जिससे यह समझने की कोशिश की गई है कि समय के साथ शिक्षा और रोजगार में युवाओं की भागीदारी कैसे बदली है और उनके सामने कौन-कौन सी चुनौतियां और मौके हैं।
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