खबर लहरिया Blog Rape in Temple: चित्रकूट के मंदिर में नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का मामला

Rape in Temple: चित्रकूट के मंदिर में नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का मामला

17 वर्षीय लड़की मंदिर पूजा करने गई थी और उसी दौरान लड़की के साथ बलात्कार किया गया। आरोपी की उम्र करीब 42 साल बताई जा रही है और उसके तीन बच्चे हैं।                             

आरोपी और पुलिस अधिकारी (फोटो साभार: खबर लहरिया)

रिपोर्टिंग – नाज़नी रिज़वी, लेखन – रचना 

चित्रकूट जिले में एक बार फिर नाबालिग के साथ यौन अपराध का मामला सामने आने से इलाके में डर और चिंता का माहौल बन गया है। हाल के महीनों में जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं जिससे कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से परिवारों में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।

मंदिर जाने के दौरान हुई घटना

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के राजापुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। 7 फरवरी की शाम एक 17 वर्षीय लड़की मंदिर पूजा करने गई थी और उसी दौरान लड़की के साथ बलात्कार किया गया। जब वह काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने तलाश शुरू की। लड़की के पिता ने बताया कि घटना के समय वह गांव से बाहर गए हुए थे और सूचना मिलने पर तुरंत लौटे। उनका आरोप है कि मंदिर के पीछे गांव का ही एक व्यक्ति बैठा था जिसने इस घटना को अंजाम दिया। आरोपी की उम्र करीब 42 साल बताई जा रही है और उसके तीन बच्चे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और लोगों की चिंता

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को बताया गया। पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर लड़की का मेडिकल कराया और 8 फरवरी को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।                                  

फोटो साभार: खबर लहरिया

अपर पुलिस अधीक्षक सत्यपाल सिंह ने बताया कि मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है और दोषी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। हालांकि लोगों का कहना है कि सिर्फ पुलिस कार्रवाई काफी नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता, अभिभावकों की सतर्कता और स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी है।                             

पुलिस अधीक्षक श्री सत्यपाल सिंह (फोटो साभार: खबर लहरिया)

जब घर और मंदिर भी सुरक्षित न रहे 

यह घटना फिर से यह सवाल खड़ा करती है कि नाबालिगों की सुरक्षा सिर्फ कानून की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जब घर, मंदिर और अपने ही परिचितों के बीच लड़कियां और बच्चे सुरक्षित नहीं हैं तो उनके लिए सुरक्षित जगह आखिर बचती कहां है। बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने से महिलाओं और लड़कियों के मन में डर, असुरक्षा और अविश्वास पैदा होता है। कई बार उन्हें ही अपनी गलती समझने के लिए मजबूर कर दिया जाता है जबकि सच यह है कि दोष अपराध करने वाले का होता है। समाज की हर गतिविधि चाहे वह धार्मिक हो सांस्कृतिक हो या पारिवारिक सीधे तौर पर महिलाओं और लड़कियों के जीवन को प्रभावित करती है। खासकर गांवों और छोटे शहरों में महिलाएं परंपराओं और सामाजिक नियमों के बीच अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जीती हैं। मंदिर जाना, पूजा करना, रिश्तेदारों के यहां आना-जाना और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना उनकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन हाल के महीनों में चित्रकूट में महिलाओं और नाबालिगों के साथ हुई घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर लड़कियां खुद को सच में सुरक्षित कहां महसूस करें?

मंदिर में बलात्कार की घटनाएँ 

बता दें मंदिर जैसे जगह पर इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटना सामने आई है। सितंबर 2024 में आयोध्या के राम मंदिर में एक सफाई करने वाली महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। 

8 मई 2025 को उत्तर प्रदेश के आगरा में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई थी जहां 5 साल की मासूम लड़की  के साथ एक शख्स ने मंदिर में बलात्कार की घटना को अंजाम दिया था । 

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मई 2018 में गुजरात के मशहूर माधवरायजी मंदिर के मुख्य पुजारी पर बलात्कार का आरोप लगा था। एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पुजारी ने बीते डेढ़ साल में शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया। 

गुजरात के मशहूर मंदिर के मुख्य पुजारी पर बलात्कार का आरोप

मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में एक मंदिर के पुजारी पर आरोप लगा था कि उन्होंने 18 वर्षीय युवती के घर में घुसकर उसके साथ बलात्कार किया था।

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ये बस वही जानकारी हैं जो खबर बन पाई और जो घटना बन कर सामने आ पाई हैं। 

इलाके में तनाव और सामाजिक जिम्मेदारी

घटना के बाद कुछ समय के लिए क्षेत्र में तनाव का माहौल रहा। गुस्साए लोगों ने आरोपी की बाइक को नुकसान पहुंचाया और उसे आग लगा दिए जाने की भी सूचना सामने आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय सार्वजनिक जगहों, धार्मिक स्थलों और सूनसान रास्तों पर सुरक्षा के इंतजाम कम हैं। कई मामलों में आरोपी लड़की के जानने वाले ही निकलते हैं जिससे भरोसा और सुरक्षा दोनों कमजोर पड़ते हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि नाबालिगों की सुरक्षा सिर्फ कानून की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

 

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