खबर लहरिया Blog Rajasthan Farmers Protest: किसानों और पुलिस के बीच झड़प, एथनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसानों का तेज हुआ प्रदर्शन 

Rajasthan Farmers Protest: किसानों और पुलिस के बीच झड़प, एथनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसानों का तेज हुआ प्रदर्शन 

एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अचानक बड़े संघर्ष में बदल गया। राठीखेड़ा गांव के पास हजारों की संख्या में किसान और ग्रामीण फैक्ट्री के खिलाफ जमा हुए थे। पहले कुछ देर तक सभा और बातें चलीं लेकिन प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बात नहीं बनी और भीड़ अचानक उग्र हो गई।

Situation after the clash between farmers and police

किसान और पुलिस के बीच झड़प के बाद की स्थिति (फोटो साभार: पत्रिका)

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में 10 दिसंबर 2025 को एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अचानक बड़े संघर्ष में बदल गया। राठीखेड़ा गांव के पास हजारों की संख्या में किसान और ग्रामीण फैक्ट्री के खिलाफ जमा हुए थे। पहले कुछ देर तक सभा और बातें चलीं लेकिन प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बात नहीं बनी और भीड़ अचानक उग्र हो गई। मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर फैक्ट्री परिसर में प्रवेश किया और ट्रैक्टरों की मदद से निर्माणाधीन चारदीवारी गिरा दी। इस दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई और करीब 16 गाड़ियों व एक जेसीबी को आग के हवाले कर दिया गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे लेकिन प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में होने के कारण पुलिस पीछे हटती दिखी।

स्थिति को देख धारा 144 लागू कर दी गई है। 

झड़प में कई पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हो गए जबकि कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया भी चोटिल हुए। स्थिति तनावपूर्ण होने पर प्रशासन ने टिब्बी कस्बे और आसपास के गांवों में इंटरनेट सेवाएं, स्कूल और बाजार बंद करा दिए। फ़िलहाल पुलिस ने 7 लोगों को हिरासत में लिया है और इलाके में भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई है। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। 

Congress MLA Abhimanyu Poonia

कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया: फोटो साभार: दैनिक भास्कर                    

किसान एथेनॉल प्लांट का विरोध कर रहे हैं 

किसान और ​​फैक्ट्री हटाओ क्षेत्र बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में पिछले 15 माह से चल रहा है। ये किसान पिछले 15 महीनों से राठीखेड़ा के पास बन रहे एथेनॉल प्लांट का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस फैक्ट्री से प्रदूषण बढ़ेगा और उनकी उपजाऊ जमीन पर असर पड़ेगा। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्लांट केंद्र सरकार के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम के तहत तैयार किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि पर्यावरण के सभी नियमों का पालन किया जाएगा लेकिन किसान इस पर भरोसा नहीं कर रहे। 18 नवंबर को पुलिस सुरक्षा में निर्माण दोबारा शुरू होने के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया था। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आगे बातचीत करने का आश्वासन दिया है लेकिन इलाके में तनाव अभी भी बना हुआ है।

कंपनी चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड है 

ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड, जो चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड है, हनुमानगढ़ में 40 मेगावाट क्षमता का अनाज-आधारित एथेनॉल प्लांट बनाने की योजना पर काम कर रही है। यह कंपनी वर्ष 2020 में बनाई गई थी और इसके डायरेक्टर जतिंदर अरोड़ा और रॉबिन जिंदल हैं। फैक्ट्री के लिए जरूरी पर्यावरण मंजूरी (EC) अभी तक नहीं मिली है और 2022 से इसका आवेदन लंबित चल रहा है।

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चार हजार किसान थे मौजूद 

मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार फैक्ट्री के बाहर हालात लगातार बिगड़ते गए और किसानों व पुलिस के बीच तीखा टकराव होता रहा। करीब चार हजार किसानों की मौजूदगी में भीड़ ने कई वाहन और जेसीबी मशीनों को निशाना बनाया। एक जेसीबी को आग लगा दी गई जबकि तीन अन्य मशीनें और कई गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। 

     

गाड़ियों का क्षतिग्रस्त (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

एक सरकारी जीप सहित 10 से अधिक वाहन जलकर राख हो गए। महापंचायत के दौरान भीड़ अचानक उग्र हो गई तो पुलिस के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया। शांत कराने की कोशिशें नाकाम रहने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठीचार्ज किया और स्थिति हाथ से निकलती देख रबर की गोलियां भी चलानी पड़ीं। तनाव बढ़ने के बीच फैक्ट्री के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा, दीवारें टूट गईं और भीड़ लंबे समय तक परिसर के भीतर बनी रही।

विवाद कैसे भड़का 

Clash between police and farmers

पुलिस और किसान के बीच झड़प (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)                          

विवाद की शुरुआत तब हुई जब सुबह किसान एसडीएम कार्यालय के बाहर एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में एकत्र हुए थे। दोपहर बाद करीब 4 बजे बड़ी संख्या में लोग अचानक फैक्ट्री की ओर बढ़ने लगे जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए। भीड़ जैसे ही निर्माण स्थल पर पहुंची और दीवार तोड़ने की कोशिश शुरू हुई स्थिति तुरंत नियंत्रण से बाहर हो गई। इसी दौरान संगरिया के विधायक अभिमन्यु पूनिया के सिर में चोट लगी। किसानों का कहना है कि वे कई महीनों से इसी जगह पर धरना दे रहे थे लेकिन प्रशासन ने हाल ही में धरनास्थल खाली करवा दिया था। 

राजनीतिक नेताओं का समर्थन 

आंदोलन को धीरे-धीरे राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा। 10 दिसंबर की सभा में श्रीगंगानगर के सांसद कुलदीप इंदोरा, संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया, भादरा के पूर्व विधायक बलवान पूनिया और हरियाणा पंजाब के कई किसान संगठनों के नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीणों की चिंता को गंभीरता से नहीं ले रही और आपत्तियों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। सांसद इंदोरा ने यह भी कहा कि अगर फैक्ट्री शुरू हुई तो इलाके में प्रदूषण और बढ़ सकता है जबकि इंदिरा गांधी नहर का गंदा पानी पहले ही क्षेत्र के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “हनुमानगढ़ के टिब्बी में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस के बल प्रयोग की कड़ी निंदा करता हूं। इस आंदोलन के दौरान किसानों की आवाज उठा रहे युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री अभिमन्यु पूनिया के घायल होने का समाचार है। भाजपा सरकार को किसानों से इतनी नफरत क्यों है? किसानों की आवाज को कांग्रेस हमेशा निडरता से उठाती रहेगी” 

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा है कि “संगरिया विधायक @AbhimanyuP00NIA जी आज टिब्बी किसान महापंचायत में सम्मिलित हुए थे और किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग में चोटिल हो गए। मैं ईश्वर से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। हम किसानों के अधिकारों और न्याय की लड़ाई में उनका साथ देते रहेंगे।”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि “हनुमानगढ़ के टिब्बी में किसान आंदोलन पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में भर्त्सना करता हूं। अन्नदाता के हक़ की लड़ाई में लड़ रहे युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व विधायक @AbhimanyuP00NIA जी एवं अनेक किसानों के घायल होने की खबर पीड़ादायक और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। भाजपा किसानों की आवाज़ को कुचलना चाहती है उनके हक को दबाना चाहती है। सरकार को समझना चाहिए कि किसानों की आवाज़ को दबाने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी, बल्कि और मुखर होंगी। कांग्रेस पार्टी हमेशा की तरह किसानों के साथ खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी निडरता से संघर्ष करती रहेगी।” 

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ऐसी खबरें पहले भी सामने आ चुकी हैं जहां किसान और ग्रामीण अपनी जमीन और गांव को बचाने के लिए फैक्ट्री, कंपनियों या खनन परियोजनाओं का विरोध करते रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी दो बड़े मामले सामने आए थे जहां ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं से न सिर्फ पर्यावरण और खेती को नुकसान होगा बल्कि उनकी पुश्तैनी जमीन छीनी जा रही है। ग्रामीणों का कहना था कि वे इस जमीन पर पीढ़ियों से रहते आए हैं और इसे नहीं छोड़ेंगे। विरोध बढ़ने पर कई जगह पुलिस और किसानों के बीच तीखी झड़प भी हुई थी।

 

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