खबर लहरिया औरतें काम पर स्वयं सहायता समूह: भीड़ का बुलावा,रोज़गार का दिखावा – महिलाएं

स्वयं सहायता समूह: भीड़ का बुलावा,रोज़गार का दिखावा – महिलाएं

बांदा: राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण का ढोल तो पीट रही है लेकिन कड़वी सच्चाई यह भी है कि वह महिलाओं की आड़ में नाम भी कमा रही है और अपने मन मुताबिक उनसे काम भी ले रही है। कई ऐसे मामले सामने आये हैं जहां पर महिलाओं का दुरुपयोग किया गया है। जैसे कि सबसे बड़ा दुरुपयोग यह निकल कर आया कि प्रधानमंत्री की रैलियों और बीजेपी पार्टी की रैलियों में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की भीड़ देखी गई है। हमने महिलाओं से इस पर बात की और जाना कि वह इसको किस तरह देखती हैं।

सरकार ने महिलाओं को शोषण और बेरोजगारी से निजात दिलाने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना को पारित किया। इसके अंतर्गत ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर वित्तीय लेनदेन जैसे कार्यों को करती हैं। स्वयं सहायता समूह में महिलाएं साप्ताहिक बैठक के दौरान गृह कार्य से कुछ बचत करते हैं। और उस बचत को समूह के नाम से खोले गए खाते में जमा किया जाता है। इस पर भारत सरकार सामान्य बचत खाते के मुकाबले अधिक ब्याज देती है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह से किसी भी उद्यम को लगाने हेतु ऋण दिया जाता है। स्वयं सहायता समूह का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में शराब और शोषण से मुक्ति पाने के लिए है।

ये भी देखें – रामपुर : ई-रिक्शा ने बदली शारदा की ज़िंदगी

नरैनी विधानसभा क्षेत्र के गांव महुई में हम समूह चलाने वाली महिलाओं से मिले। अम्बेडकर समूह की अध्यक्ष संगीता नाम की महिला बताती है कि वह इसी समूह में सखी के रूप में काम कर रहे थी। एक दूसरी समूह की महिला के पति ने समूह के नाम बैंक से कर्ज ले लिया। इसी के कारण यह समूह बन्द हो गया। दो साल से बंद पड़ा था लेकिन फिर उसने चालू करा लिया। वह अध्यक्ष बनकर काम कर रही है।

समूह सखी रामावती कहती हैं कि वह पहले काम करती थीं और अब समूह में काम नहीं करती हैं। उनका पुराना पैसा अभी भी बैंक में फंसा पड़ा है। समझ में नहीं आ रहा कि कि उसको कैसे निकाल पाएं।

समूह अध्यक्ष के पति ने कहा कि उनको रैलियों में बुलाया जाता है। प्रयागराज में भी मोदी की रैली में जाने के लिए कहा जाता है। बहुत सारे लोग गए भी थे उनकी पत्नी नहीं जा पाई क्योंकि उनका बच्चा बहुत छोटा था उस समय।

यह बात सिर्फ यहां की नहीं है। समय समय पर इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। महिलाओं ने धरना प्रदर्शन भी किया है कि उनको इस तरह से मजबूर न किया जाए। बांदा की बात करें तो पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली थी उसमें भी समूह की महिलाओं का हुजूम देखने को मिला था।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और भी स्टोरी देखने के लिए क्लिक करें-

(हैलो दोस्तों! हमारे  Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)