खबर लहरिया Hindi Prayagraj News: मरीजों और परिजनों का सहारा बना पीडी टंडन पार्क, लेकिन सुविधाओं की कमी से परेशानी

Prayagraj News: मरीजों और परिजनों का सहारा बना पीडी टंडन पार्क, लेकिन सुविधाओं की कमी से परेशानी

प्रयागराज में इलाज कराने के लिए दूर-दराज के जिलों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पतालों में बैठने की जगह न मिलने पर उनके लिए आराम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में शहर के सिविल लाइंस स्थित पुरुषोत्तम दास टंडन (पीडी टंडन) पार्क उनके लिए सहारा तो है लेकिन यहां भी सुविधा की कमी है। 

रुषोत्तम दास टंडन (पीडी टंडन) पार्क

पुरुषोत्तम दास टंडन (पीडी टंडन) पार्क का प्रेवश द्वार (फोटो साभार: सुनीता)

रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – सुचित्रा 

पुरुषोत्तम दास टंडन (पीडी टंडन) पार्क की सबसे खास बात यह है कि यहां सिर्फ 5 रुपए का टिकट है। यहां पांच रुपये का टिकट लेकर लोग बैठते हैं, खाना खाते हैं और आराम करते हैं। हालांकि, टूटी कुर्सियां, छांव की कमी और बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त जगह न होने से लोगों को परेशानी होती है।

यह पार्क प्रयागराज विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आता है। यहां आसपास के लोग घूमने के साथ दूसरे जिलों से इलाज कराने आए मरीजों के परिजन भी समय बिताते हैं।

पार्क के अंदर जाने का रास्ता (फोटो साभार: सुनीता)

पार्क में आए लोगों का अनुभव 

चित्रकूट से आए शनि बताते हैं कि वह हड्डी की समस्या के इलाज के लिए स्वरूप रानी अस्पताल आते हैं। इलाज के दौरान खाना खाने और आराम करने के लिए वह पीडी टंडन पार्क में बैठते हैं। उनका कहना है कि शहर में ऐसी जगह कम हैं, जहां कम खर्च में कुछ समय आराम किया जा सके। प्रयागराज में आसपास के कई जिलों से मरीज आते हैं, इसलिए पार्क में भी भीड़ रहती है।

चित्रकूट के मऊ से आईं सुनीता बताती हैं कि बच्चे के इलाज के दौरान उन्हें पांच-पांच घंटे इंतजार करना पड़ता था। अस्पताल में बैठने की जगह नहीं मिलने पर वह पार्क में समय बिताती थीं। शहर के अंदर बहुत बड़ा यह पार्क है क्योंकि इतनी आवाज़ सड़क में होती हैं, यदि लोगों को कोई मीटिंग करना हो तो फिर नामुमकिन था लेकिन एक यही पार्क अच्छी जगह में है कि तुरंत वहां से पार्क के अंदर जाओ। शांत जगह में काम पर ध्यान भी लगता है और काम जल्दी भी हो जाता है। 

वहीं प्रयागराज में पढ़ाई करने वाली सोनभद्र की शीला का कहना है कि वह दूसरे जिले से आकर यहां पढ़ाई करती हैं। जब उनके दोस्तों की कोई बैठक या छोटा कार्यक्रम होता है, तो वे इसी पार्क में आकर बैठते हैं। यहां सड़क के मुकाबले शांति रहती है, इसलिए वे पढ़ाई करने के साथ थोड़ा समय मनोरंजन में भी बिताते हैं। 

पार्क में टूटी कुर्सियां और बच्चों के खेलने की जगह की कमी से नाराज 

पार्क देखने में बहुत ही सुन्दर है, चारों तरफ हरियाली नज़र आती है लेकिन इसके बीच सुविधाओं की कमी भी सामने आई। करछना की पूजा अपने बच्चे को इलाज के लिए हर हफ्ते प्रयागराज लाती हैं। वह बताती हैं कि इंजेक्शन लगने के बाद करीब चार घंटे इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में वह बच्चे के साथ पार्क में बैठती हैं, लेकिन यहां बैठने की अच्छी व्यवस्था नहीं है। बारिश के समय जमीन गीली होने से परेशानी और बढ़ जाती है। पार्क में अच्छी कुर्सियां, छांव, शौचालय और बच्चों के खेलने के लिए झूले होने चाहिए। इससे मरीजों के परिजनों के साथ सुबह-शाम आने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी।

इसके बावजूद विद्यार्थी यहां आते हैं क्योंकि शहर के बीचोंबीच शांत जगह मिलना मुश्किल है। पार्क का सुंदरीकरण होने से लोगों को बेहतर माहौल मिल सकता है।

50 करोड़ रुपये से सुंदरीकरण की तैयारी

पार्क में टिकट जांचने वाले राहुल बाबू ने बताया कि यह पार्क करीब चार बीघा में फैला है। समय के साथ यहां की कई सुविधाएं खराब हो गई हैं। इसके बावजूद मरीजों के परिजन और स्थानीय लोग यहां आते हैं। पार्क के सुंदरीकरण के लिए बजट संबंधी प्रस्ताव भेजा गया है। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से पार्क को बेहतर बनाने की योजना है। इसमें अच्छी कुर्सियां लगाने और बच्चों के खेलने के लिए झूले जैसी सुविधाएं विकसित करने की बात है। उनके अनुसार, टेंडर की प्रक्रिया प्रस्तावित है और बजट मिलने के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।

 

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