एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा ((RLM) पार्टी के प्रमुख जितेंद्र नाथ समेत 7 नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा उन्होंने बुधवार 26 नवंबर को दिया। उन्होंने आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पर ‘परिवारवाद’ का आरोप लगाया। हाल ही में बिहार कबिनेट मंत्रियों की शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को शपथ दिलवा दी थी। इसी फैसले से पार्टी के कई नेता नाराज हैं।
बिहार विधानसभा 2025 चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत हुई और फिर से 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने शपथ ली। उनके साथ गुरुवार 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में 26 कैबिनेट मंत्रियों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। लेकिन इस दिन शपथ समारोह की चर्चा खूब हुई और इसकी वजह रही राष्ट्रीय लोक मोर्चा ((RLM) पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद की शपथ लेना। इस वजह से विपक्ष पार्टी और एनडीए सरकार के पार्टियों में शामिल पार्टियों ने भी इस फैसले का विरोध किया। एनडीए पर परिवारवाद के आरोप लगाए गए।
आरएलएम (RLM) पार्टी के 7 नेताओं ने दिया इस्तीफा
यह नाराजगी अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा ((RLM) पार्टी के नेताओं में भी दिखाई दे रही है। आरएलएम उपाध्यक्ष जीतेंद्र नाथ के नेतृत्व में सात प्रमुख नेताओं ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा पर अपने बेटे को मंत्री बनाने पर और पार्टियों के चार नवनिर्वाचित विधायकों को दरकिनार करने का आरोप लगाया। इस्तीफा देने वालों में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा, प्रवक्ता राहुल कुमार और तीन महासचिव शामिल थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जिन नेताओं ने इस्तीफा दिया उनके नाम हैं –
-RLM के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा,
– राज्य महासचिव और प्रवक्ता राहुल कुमार,
– राज्य महासचिव और नालंदा प्रभारी राजेश रंजन सिंह,
– राज्य महासचिव और जमुई प्रभारी बिपिन कुमार चौरसिया,
– राज्य महासचिव और लखीसराय प्रभारी प्रमोद यादव
– और शेखपुरा जिला अध्यक्ष पप्पू मंडल
इस्तीफे की वजह परिवारवाद को बताया
लल्लनटॉप की रिपोर्ट के अनुसार इस्तीफे के बाद जितेंद्र नाथ ने कहा कि “मैं पिछले 9 साल से (उपेंद्र) कुशवाहा जी के साथ हूं और उनकी राजनीति को अच्छी तरह समझता हूं। जो व्यक्ति कभी खुद को (मुख्यमंत्री) नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी मानता था, वह 2020 के विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी (तब राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) को एक भी सीट न मिलने के बाद से ही अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असमंजस में था। अब क्योंकि उन्हें अपने लिए आगे कोई भविष्य नहीं दिख रहा है, इसलिए वह अपने परिवार को आगे बढ़ाने की कोशिश में बेताब नजर आ रहे हैं।”
वहीं महेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा वंशवाद की राजनीति के जाल में फंस गए हैं। अब उनमें और सिर्फ अपने परिवार को आगे बढ़ाने वाले दूसरे नेताओं में कोई फर्क नहीं रहा। मेरे जैसे साधारण कार्यकर्ता के लिए RLM में कोई जगह नहीं है।
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को दिलाई मंत्री पद की शपथ
दीपक प्रकाश जो बिहार में कैबिनेट मंत्री का हिस्सा बन गए हैं। दीपक ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, न ही वह विधायक हैं और न ही विधान परिषद के कोई सदस्य हैं। इसके बावजूद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को पंचायती राज विभाग का मंत्री बना दिया गया। अचानक से मंच पर शपथ लेने के बाद वह विवाद का विषय बन गए। शपथ समारोह में उनका नाम लेने पर वह जींस शर्ट में ही मंत्री पद की शपथ लेने पहुंच गए क्योंकि वह खदु इस बात से बेखबर थे कि उनको शपथ के लिए बुलाया जायेगा और मंत्री बनाया जायेगा।

शपथ ग्रहण समारोह में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश मंत्री पद की शपथ लेते हुए (फोटो साभार : सोशल मीडिया Ankit Singh X अकाउंट)
मंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब दीपक प्रकश से पूछा गया मंत्री क्यों बने? तो उनका जवाब था, “मेरे पिताजी से पूछिए कि मैं मंत्री क्यों बना।”
बिना चुनाव लड़े यदि किसी को मंत्री बनाया जाएगा तो सवाल और आरोप तो लगेंगे ही। साफ़ तौर पर देखा जाए तो दीपक प्रकाश को मंत्री बनने का अवसर इसलिए मिला क्योंकि उनके पिता और माता दोनों ही राजनीति का हिस्सा है। उनके पिता उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सदस्य हैं, जबकि उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा ने हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में सासाराम सीट से जीत हासिल की है। इस वजह से आसानी से वह मंत्री बन बैठे हैं। यह मौका उन्हें तक नहीं दिया जो पार्टी में विधायक हैं।
बेटे को मंत्री बनाने और परिवारवाद के आरोप पर उपेंद्र कुशवाहा का बयान
जब यह बात विवाद और आरोपों के घेरे में आने लगी तो उपेंद्र कुशवाहा ने इस बात से साफ़ इनकार किया कि इसमें परिवारवाद जैसा कुछ नहीं है। ऐसा उन्होंने बीएस पार्टी को बचाने के लिए किया। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में तर्क दिया, “अगर ज़िम्मेदारी दिए गए व्यक्ति में योग्यता और योग्यता है, तो ‘परिवारवाद’ को बहस में लाना उचित नहीं होगा।”
कल से मैं देख रहा हूं, हमारी पार्टी के निर्णय को लेकर पक्ष और विपक्ष में आ रही प्रतिक्रियाएं….उत्साहवर्धक भी, आलोचनात्मक भी..! आलोचनाएं स्वस्थ भी हैं, कुछ दूषित और पूर्वाग्रह से ग्रसित भी।
स्वस्थ आलोचनाओं का मैं हृदय से सम्मान करता हूं। ऐसी आलोचनाएं हमें बहुत कुछ सिखाती हैं,…
— Upendra Kushwaha (@UpendraKushRLM) November 21, 2025
उन्होंने आगे लिखा “अरे भाई, रही बात दीपक प्रकाश की तो जरा समझिए – विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है उसने। इंतजार कीजिए, थोड़ा वक्त दीजिए उसे। अपने को साबित करने का।
एनडीए सरकार जो हमेशा से विपक्ष पर परिवारवाद का आरोप लगाती आ रही है और भाषणों में भी परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाती आ रही है, उसी पार्टी के एक हिस्से में नया परिवारवाद उभर के सामने आया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये राजनीतिक पार्टियां परिवारवाद को सिर्फ एक चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करती आ रही हैं?
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