अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर देश में पेट्रोल और गैस की किल्लत के तौर पर सभी जगह दिखाई दे रहा है। इसका असर कंपनियों पर भी पड़ा है इसलिए कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। बात करें मध्य प्रदेश की तो अब दूध, ब्रेड, बिस्किट, जूते-चप्पल, प्लास्टिक उत्पाद समेत अन्य वस्तुएं महंगी होंगी और कंपनियां नए रेट लागू करेंगी। इसकी जानकारी मध्य प्रदेश एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज ने दैनिक भास्कर को दी। यह नए रेट कल 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगे।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से भारत में आम लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया। कहीं लोग एलपीजी गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं तो कहीं पेट्रोल और सीएनजी के लिए परेशान है। कई फैक्ट्री कंपनियां बंद होने की कगार पर है तो कुछ कंपनियों ने उत्पादन आधा कर दिया है। मध्य प्रदेश में भी अब 1 अप्रैल से वस्तुएं के दाम बढ़ जायेंगे।
इन प्रोडक्टस (Products) के दाम बढ़ें
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बिस्किट 5 से 6 रुपए, ब्रेड 30 से 35 रुपए, चप्पल 100 से 120 रुपए और 1 किलो सर्फ 15–20 रुपए महंगा होगा। अप्रैल से 400 ग्राम ब्रेड 5–6 रुपए और कम वजन वाले पैकेट 3–4 रुपए महंगे होंगे। कुछ जगह रेट बढ़ चुके हैं, लेकिन अधिकतर कंपनियां पुराना स्टॉक खत्म होने के बाद अप्रैल से नए रेट लागू करेंगी।
इसके साथ ही कच्चे माल पर भी असर होगा। नीचे दी गई तस्वीर में पहले और नए दामों में बदलाव को लिखा गया है।
एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष योगेश मेहता ने बताया कि एलपीजी सप्लाई प्रभावित होने से उद्योगों पर असर पड़ा है। क्रूड ऑयल आधारित केमिकल और रॉ मटेरियल महंगे हो गए हैं, जिनकी कीमत 200–300% तक बढ़ी है, जिससे खर्च बढ़ गया है और काम चलाना मुश्किल हो गया।
एमपी में दूध के दाम भी बढ़े
1 अप्रैल से दूध के दामों में बढ़ोतरी होने जा रही है, जिससे आम जनता और खासकर छोटे बच्चों के प्रति चिंता बढ़ जाएगी। अभी जो दूध 60 रुपए प्रति लीटर मिलता है वो 1 अप्रैल से 63 से 65 रुपए प्रति लीटर तक मिलेगा।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट मध्य प्रदेश दुग्ध विक्रेता महासंघ के अध्यक्ष भारत मथुरावाला ने बताया कि भोपाल, ग्वालियर, देवास, उज्जैन, बड़वाह, जबलपुर सहित अन्य शहरों में भी दाम बढ़ाए जाएंगे। यहां 2 रुपए से लेकर 4 रुपए तक की बढ़ोतरी की जाएगी।
कुल मिलाकर लोगों की जेबों पर वजन बढ़ने वाला है और लोगों को आने वाले समय में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि फिलहाल पश्चिमी यूरोप में चल रहे युद्ध खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
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