माघ स्नान…
जहाँ महिलाएं ठंडे पानी में उतरती हैं, व्रत रखती हैं, सिर्फ एक उम्मीद के साथ—
कि उन्हें अच्छा पति मिलेगा।
लेकिन सवाल ये है कि
पुरुष क्यों नहीं माघ स्नान करते?
क्या उन्हें अच्छी पत्नी अपने आप मिल जाती है?
अगर नहाने से रिश्ते सुधरते हैं,
तो तलाक क्यों बढ़ रहे हैं?
क्या आज भी शादी बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की है?
यह वीडियो माघ स्नान की परंपरा पर सवाल नहीं,
सोच पर सवाल है।
आस्था और अंधविश्वास के बीच की इस लकीर को समझिए,
और खुद तय कीजिए—
यह परंपरा महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाती है
या उन पर एक और दबाव डालती है?