प्रयागराज के माघ मेले के समापन में अब सिर्फ़ एक दिन शेष रह गया है। यह मेला 15 फरवरी को खत्म होगा, लेकिन रौनक अभी भी पूरे शबाब पर है। मेले में झूले, मनोरंजन और खाने-पीने की भरमार है। इन दिनों सबसे ज़्यादा ध्यान खींच रहा है पोटैटो ट्विस्टर। गरमागरम तेल से निकलते ही इसकी खुशबू दूर तक फैल जाती है और राह चलते लोग खुद-ब-खुद रुक जाते हैं। विदाई से पहले माघ मेला स्वाद और यादों का संगम बन गया है।
रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – सुचित्रा
कौशांबी जिले के एक दुकानदार सज्जन बताते हैं कि वे हर वर्ष माघ मेले में दुकान लगाने आते हैं। उनका कहना है, “पिछले साल महाकुंभ में खूब बिक्री हुई थी। लोगों ने पोटैटो ट्विस्टर को बहुत पसंद किया था। इस साल मेला थोड़ा छोटा है, इसलिए भीड़ कम है, लेकिन जो लोग आ रहे हैं, वे इसे पसंद कर रहे हैं।”
“पोटैटो ट्विस्टर” बनाने की विधि
- दुकानदार ने बताया इस व्यंजन को बनाने में ज्यादा समय या सामग्री नहीं लगती। इसके लिए आलू, आरारोट, मैदा, चाट मसाला, नमक और तलने के लिए तेल की जरूरत होती है।
- सबसे पहले एक बड़े आकार का आलू अच्छी तरह धो लिया जाता है।
- फिर उसे विशेष मशीन में घुमाकर चिप्स की तरह सर्पिल (घुमावदार) आकार में काटा जाता है।
- आलू में एक लकड़ी की डंडी डाल दी जाती है, जिससे वह लंबाई में सुंदर ट्विस्टेड आकार में फैल जाता है।
- इसके बाद अरारोट और मैदा का घोल तैयार कर उसमें मसाले मिलाए जाते हैं।
- कटे हुए आलू पर यह घोल समान रूप से लगाया जाता है।
- फिर उसे कड़ाही में गर्म तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है।
- तलने के बाद इसका रंग हल्का ऑरेंज और बनावट कुरकुरी हो जाती है, जो देखने में ही लोगों का मन खाने को कर देता है।
ठंड के मौसम में गरमागरम और कुरकुरा पोटैटो ट्विस्टर मेले में आए लोगों के लिए स्वाद का खास आकर्षण बना हुआ है। बच्चे हों या बड़े, हर कोई इसे चाव से खा रहा है।
माघ मेले में “पोटैटो ट्विस्टर” 80 रुपए का एक
प्रयागराज के माघ मेले में “पोटैटो ट्विस्टर” लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। “पोटैटो ट्विस्टर” 80 रुपए में एक बेचा जा रहा है। इसे खरीदने के लिए पहले पर्ची कटानी पड़ती है, उसके बाद नंबर आने पर गरमागरम ट्विस्टर दिया जाता है। मेले में दुकान दिन-रात सजी रहती है और रोज़ाना लगभग 300 पर्चियां कट जाती हैं।
दुकानदार बताते हैं कि वह यही पोटैटो ट्विस्टर बनाने का काम करते हैं। मेला खत्म होने के बाद वे शादियों और अन्य कार्यक्रमों में भी ऑर्डर पर स्टॉल लगाते हैं। उन्होंने बताया, “जब हम 18 साल के थे, तब मुंबई में एक कारीगर से यह काम सीखा था। इसके बाद अपना खुद का काम शुरू किया। तब से हर साल मेले और बाजार में दुकान लगाते आ रहे हैं।”
ग्राहकों की पसंद “पोटैटो ट्विस्टर”
मेले में आए मेरठ जिले के राजाभाई कहते हैं, “आज हम प्रयागराज के माघ मेले में घूमने आए हैं। यह आलू से बना है, खाने में बहुत टेस्टी है और देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। इसकी सुंदरता देखकर ही हमारा मन खाने का कर गया। हमने पहली बार खाया है। मेला घूमने का असली मजा यही है कि अलग-अलग जगह की चीजें एक ही स्थान पर मिल जाती हैं।”
वहीं प्रयागराज की रहने वाली रानू का कहना है, “हम तो इसे अक्सर खाते हैं। प्रयागराज में भी इसकी दुकान है। जब भी घूमने जाते हैं, जरूर खाते हैं। इस ठंड के मौसम में इसे खाने का मजा ही अलग होता है।”
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