खबर लहरिया Blog दिल्ली महिला आयोग के 223 संविदा कर्मचारियों को उपराज्यपाल ने किया बर्खास्त, पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने पूछे सवाल 

दिल्ली महिला आयोग के 223 संविदा कर्मचारियों को उपराज्यपाल ने किया बर्खास्त, पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने पूछे सवाल 

स्वाति मालीवाल ने कहा, “दिल्ली महिला आयोग ने पिछले आठ सालों से शानदार काम किया है। 1 लाख 70 हज़ार से ज़्यादा केसों की सुनवाई की है। 181 हेल्पलाइन ने 40 लाख कॉल अटेंड की है। क्राइसेस इंटरवेंशन सेंटर ने 60 हज़ार से ज़्यादा सेक्सुअल असॉल्ट सर्वाइवर की कॉउंसलिंग की है।”

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                                              बाएं दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना व दाएं में महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की तस्वीर ( फोटो – सोशल मीडिया)

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने राजधानी के महिला आयोग के कुल 223 कर्मचारियों को एक बार में बर्खास्त कर दिया। आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि उन्होंने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान नियमों का उल्लंघन कर नियुक्तियां कीं थी। 

मालीवाल ने उपराज्यपाल के आदेश की आलोचना करते हुए कहा कि अगर सभी संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया तो महिला आयोग बंद हो जाएगा।

वहीं उपराज्यपाल कार्यालय ने मालीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह “अपने गलत कामों को छिपाने” के लिए “कीचड़ उछालने” का सहारा ले रही हैं।

“एक विशेष राजनीतिक दल से संबंधित एक व्यक्ति, दिल्ली के उपराज्यपाल के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण और घृणित कीचड़ उछालने में शामिल हुआ है। ऐसा केवल और विशेष रूप से भर्ती घोटाले में अपने स्वयं के गलत कार्यों – चूक और कमीशन को कवर करने के लिए किया गया है।” एलजी कार्यालय ने एक बयान में कहा।

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महिला आयोग के काम पर स्वाति मालीवाल 

एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए स्वाति मालीवाल ने कहा, “दिल्ली महिला आयोग ने पिछले आठ सालों से शानदार काम किया है। 1 लाख 70 हज़ार से ज़्यादा केसों की सुनवाई की है। 181 हेल्पलाइन ने 40 लाख कॉल अटेंड की है। क्राइसेस इंटरवेंशन सेंटर ने 60 हज़ार से ज़्यादा सेक्सुअल असॉल्ट सर्वाइवर की कॉउंसलिंग की है।”

उन्होंने प्रेस वार्ता में कई कामों के बारे में बताते हुए कहा कि यह सारे काम उन्होंने अकेले नहीं बल्कि पूरी टीम ने की है। वह टीम जिसमें एसिड अटैक,रैप व घरेलु हिंसा से शोषित महिला सर्वाइवर भी हैं। वे महिलाओं ने जिन्होंने अपने अंदर के दर्द को महिलाओं की मदद करने में लगा दिया। 

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अपने X अकाउंट पर पर उन्होंने लिखा, “LG साहब ने DCW के सारे कॉंट्रैक्ट स्टाफ को हटाने का एक तुग़लकी फ़रमान जारी किया है। आज महिला आयोग में कुल 90 स्टाफ है जिसमें सिर्फ़ 8 लोग सरकार द्वारा दिये गये हैं, बाक़ी सब 3 – 3 महीने के कॉंट्रैक्ट पे हैं। अगर सब कॉंट्रैक्ट स्टाफ हटा दिया जाएगा, तो महिला आयोग पे ताला लग जाएगा। ऐसा क्यों कर रहे हैं ये लोग? खून पसीने से बनी है ये संस्था। उसको स्टाफ और सरंक्षण देने की जगह आप जड़ से ख़त्म कर रहे हो? 

मेरे जीते जी मैं महिला आयोग बंद नहीं होने दूँगी। मुझे जेल में डाल दो, महिलाओं पे मत ज़ुल्म करो!”

‘उनके कार्यकाल के दौरान संविदा कर्मचारियों का मुद्दा नहीं उठा’ – मालीवाल 

अधिकारियों ने बताया कि डब्ल्यूसीडी विभाग ने समिति की सिफारिशों के आधार पर सक्सेना को एक प्रस्ताव भेजा था जिन्होंने इसे मंजूरी दे दी, जिसके बाद विभाग ने समाप्ति आदेश ज़ारी किया था। 

मालीवाल ने कहा कि आयोग की वर्तमान टीम “कानूनी विकल्प का प्रयोग” कर रही है, हालांकि आदेश अभी तक लागू नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान संविदा कर्मचारियों का मुद्दा कभी नहीं उठाया गया। सवाल करते हुए पूछा कि “क्या यह उनकी राजनीति है कि बलात्कारी खुलेआम घूमेंगे और महिला आयोग बंद हो जाएगा। ऐसे संकीर्ण और नकारात्मक दृष्टिकोण से एलजी को क्या हासिल होगा?” 

बर्खास्ती को लेकर एलजी कार्यालय का बयान 

एलजी कार्यालय ने अपने एक बयान में मालीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि “मामले को गलत तरीके से एलजी को सौंपने के लिए” उनके और उनकी पार्टी द्वारा जानबूझकर यह काम किया गया है। 

कहा कि, “उपराज्यपाल ने कोई आदेश जारी नहीं किया है। इसकी स्थिति डब्ल्यूसीडी विभाग द्वारा एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में रिकॉर्ड पर स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है।”

हालांकि, मालीवाल ने दावा किया कि डीसीडब्ल्यू मणिपुर घटना और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों की शिकायतों जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वाली पहली महिला संस्था थी।

महिला आयोग से बर्खास्त महिलाओं का बयान 

मालीवाल ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर डीसीडब्ल्यू के कुछ प्रभावित कर्मचारियों के वीडियो पोस्ट किए। वीडियो में शामिल एक एसिड अटैक सर्वाइवर मोहिनी ने कहा, “चाहे मेरे इलाज में देरी हो या नहीं, लेकिन मुझे पैसे कमाने के लिए एक काम की ज़रूरत है ताकि मैं स्वतंत्र हो सकूं”।

एक अन्य एसिड अटैक सर्वाइवर शबनम ने वीडियो में कहा कि 2011 में उन पर हमला हुआ था। उनका इलाज कश्मीर में चल रहा था। बाद में वह सर्जरी के लिए दिल्ली आईं। उन्हें डीसीडब्ल्यू की महिला पंचायत में नौकरी मिली जहां वह पिछले छह सालों से काम कर रही थीं।

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जांच रिपोर्ट के आधार कर्मचारियों को किया गया बर्खास्त 

उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा ज़ारी आदेश में दिल्ली महिला आयोग अधिनियम का हवाला देते हुए कहा गया कि पैनल में 40 कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या है। 223 नए पद उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना बनाए गए हैं। आदेश में उन्होंने यह भी कहा गया है कि आयोग को संविदा पर कर्मचारी रखने का अधिकार नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्यवाही फरवरी 2017 में तत्कालीन उपराज्यपाल को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त निदेशक द्वारा ज़ारी आदेश में यह भी कहा गया है कि नियुक्तियों से पहले आवश्यक पदों का कोई मूल्यांकन नहीं किया गया। आदेश में कहा गया है कि आयोग को सूचित किया गया था कि वे बताये बिना कोई भी कदम नहीं उठाएंगे, “जिसमें सरकार के लिए अतिरिक्त वित्तीय दायित्व शामिल हो” जिसमें वित्त विभाग की मंजूरी होना शामिल है। 

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार,जांच में पाया गया कि ये नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार नहीं की गईं थीं। इसमें कहा गया है, “इसके अलावा, डीसीडब्ल्यू के कर्मचारियों के पारिश्रमिक और भत्तों में वृद्धि पर्याप्त उपयोगिता के बिना और निर्धारित प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का उल्लंघन थी।”

आप (AAP) सांसद के रूप में राज्यसभा में प्रवेश करने से पहले, मालीवाल ने नौ सालों तक दिल्ली महिला आयोग का नेतृत्व किया है। पैनल के अध्यक्ष का पद फिलहाल खाली है। आदेश में बताया गया कि मालीवाल को नियुक्तियों के संबंध में वित्त विभाग की मंजूरी लेने के लिए बार-बार सलाह दी गई थी।

आप पार्टी समय-समय पर उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा उन्हें रोकने को लेकर आरोप लगाती रही है। इस समय आप पार्टी व दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी शराब नीति मामले में जेल में हैं। पार्टी में एक साथ इस समय काफी चीज़ें ज़ारी है। 

 

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