मानव अधिकार दिवस के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी , जो खुद बस्तर की आदिवासी समुदाय से हैं, ने आदिवासियों के अधिकारों और उनके मौजूदा हालात पर गंभीर चर्चा की। सोनी सोरी ने कहा कि आज भी आदिवासी समुदाय लगातार अन्याय का सामना कर रहा है। कई बार उन्हें नक्सली बताकर निशाना बनाया जाता है—कभी मुठभेड़ों में हत्या, तो कभी दबाव बनाकर आत्मसमर्पण कराने जैसी परिस्थितियाँ पैदा की जाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि असल मुद्दा यह है कि आदिवासियों की आवाज़ें सुनी नहीं जातीं, उनकी ज़मीन, जंगल और जीवन से जुड़े अधिकार लगातार खतरे में हैं। सोनी का मानना है कि मानव अधिकार दिवस तभी सार्थक है जब आदिवासी समुदाय को न्याय, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार मिले। उनकी यह चर्चा मानवाधिकार और आदिवासी समुदाय की वास्तविक चुनौतियों पर देशव्यापी ध्यान आकर्षित करती है।
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