नुसरत परवीन के भाई ने ईन्यूज़रूम से बातचीत में बताया कि उन्होंने सरकारी नौकरी न करने का मन बना लिया है हालांकि परिवार उन्हें लगातार समझाने की कोशिश कर रहा है।
यह मामला उस समय सामने आया जब 14 दिसंबर 2025 को पटना स्थित सचिवालय में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक हज़ार आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंप रहे थे। इसी कार्यक्रम के दौरान हुई घटना का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया। इस वीडियो में देखा गया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक मुस्लिम महिला की हिजाब हटा रहे हैं। यह घटना एक चर्चा का विषय बन गया है। जिसमें कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही है।
हालही में आयुष चिकित्सक नुसरत परवीन ने हाल ही में मिली सरकारी नौकरी को जॉइन न करने का निर्णय लिया है। उन्हें नियुक्ति पत्र मिल चुका था और 20 दिसंबर को सेवा में शामिल होना था। नुसरत परवीन पटना में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में मौजूद थीं जहां हिजाब पहनने वाली महिलाओं के बीच वह भी शामिल थीं। इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उनका हिजाब खींचे जाने की घटना सामने आई थी जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया।
कई मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार ये खबर आई कि नुसरत परवीन के भाई ने ईन्यूज़रूम से बातचीत में बताया कि उन्होंने सरकारी नौकरी न करने का मन बना लिया है हालांकि परिवार उन्हें लगातार समझाने की कोशिश कर रहा है। उनके भाई का कहना है कि परिवार उन्हें यह समझा रहा है कि गलती किसी और की है तो इसका बोझ उन्हें क्यों उठाना चाहिए। नुसरत परवीन के भाई कोलकाता में रहते हैं और एक सरकारी विधि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। वहीं नुसरत परवीन के पति एक कॉलेज में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के तौर पर कार्यरत हैं।
कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला –
जागरण की खबर अनुसार कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि आपत्तिजनक और निंदाजनक है। ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं। यह एक गलत और घटिया मानसिकता को दिखाती है। यहां जम्मू-कश्मीर में पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी एक मतदान केंद्र में महिला मतदाता का बुर्का हटाया था। यह न तब सही था और न अब सही है।
जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस पूरे मामले को लेकर कहा है कि इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री का मकसद सिर्फ आयुष डॉक्टर की पहचान जानना था। उनका कहना है कि अब इस बात को गलत तरीके से पेश कर राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बना दिया गया है। नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए जो काम किए हैं उन्हें उससे आंका जाना चाहिए।
इकरा हुसैन –
सांसद इकरा हुसैन ने भी इस घटना का निंदा किया। उन्होंने अपने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि “शर्मनाक! एक महिला डॉक्टर का हिजाब खींचना उसकी गरिमा और धार्मिक पहचान पर सीधा हमला है। जब राज्य का मुख्यमंत्री ऐसा करे, तो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठना लाज़मी है।” आगे कहा “नीतीश कुमार जी का सभी सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री पद की अपनी गरिमा है। एक महिला के साथ इस तरह का व्यवहार उस गरिमा के खिलाफ है और बहुत खतरनाक है।”
नीतीश कुमार जी का सभी सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री पद की अपनी गरिमा है। एक महिला के साथ इस तरह का व्यवहार उस गरिमा के खिलाफ है और बहुत खतरनाक है।
pic.twitter.com/eE159XRObk— Iqra Hasan (@IqraMunawwar_) December 16, 2025
शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे
इस मामले पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कोई महिला हिजाब पहने, घूंघट में रहे, चेहरे पर मास्क लगाए या कुछ भी पहने किसी को भी यह हक़ नहीं है कि वह उसे छुए, उसका कपड़ा खींचे या ज़बरदस्ती कुछ पहनाए।
इसी के साथ इस मामले को लेकर हैदराबाद की सामाजिक कार्यकर्ता लुबना सरवत, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता निखत फ़ातिमा और दो अन्य लोगों ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने आयोग से इस घटना पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद-
दैनिक भास्कर की खबर अनुसार उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने इस घटना पर नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा, ‘वह भी इंसान हैं। उन्होंने बुर्का छुआ, तो इसे इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है?’ उनके इस बयान से तब और भी आक्रोश फैल गया जब उन्होंने आगे कहा, ‘अगर उन्होंने कहीं और छुआ होता तो क्या होता? क्या आपको लगता है कि वे कहीं और भी छूते हैं?’ इस बयान की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हुई। खबरें यह भी सामने आईं कि बेंगलुरु के वकील ओवैस हुसैन एस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा?
बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को उन दावों को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि एक आयुष महिला डॉक्टर ने सामाजिक दबाव और विवाद के चलते ड्यूटी ज्वाइन करने से इनकार कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक विभाग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि न तो महिला डॉक्टर की ओर से नौकरी छोड़ने या पद ठुकराने से जुड़ा कोई पत्र मिला है और न ही उनके परिवार की तरफ से ऐसा कोई बयान सामने आया है। विभाग का कहना है कि डॉक्टर द्वारा ड्यूटी न जॉइन करने की खबरें बेबुनियाद हैं।
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