सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि सरकारी नौकरी में आरक्षित श्रेणी (reserved category) के उम्मीदवार कट-ऑफ से अधिक अंक लाते हैं तो वह सामान्य सीट पर नौकरी पाने के हक़दार है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान उच्च न्यायालय के एक फैसले में कल सोमवार 5 जनवरी 2026 को सुनाया।
सरकारी नौकरियों में आरक्षण और मेरिट को लेकर अक्सर बहस चलती रहती है। यदि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार सरकारी नौकरी के लिए अधिक अंक लाकर सामान्य सीट पर सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कहीं उन्हें इस बात का ताना मारा जाता है कि उसने (उम्मीदवार) आरक्षित श्रेणी का होते हुए भी एक जनरल सीट की सीट खा गया। यदि आरक्षित श्रेणी पर ही वह सरकारी नौकरी पाई है तो उसे कम नम्बर पर नौकरी दी गई है इस पर लेकर उसको परेशान किया जाता है। इसका असर आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों पर पड़ता है जिसकी वजह से उनसे समानता का भाव नहीं रखा जाता और जलन के भाव रखा जाता है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि वह आरक्षित श्रेणी यानी अनुसूचित जाति (Sc), अनुसूचित जनजाति (St), अन्य पिछड़ा वर्ग (Obc) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (Ews) हैं तो वह सामान्य सीट पर नौकरी पाने के हक़दार हैं।
पूरा मामला
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जी. मसीह की पीठ ने अपने फैसले में 1992 के इंदिरा साहनी मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय का सहारा लिया। उस फैसले में सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था की गई थी।
राजस्थान हाई कोर्ट भर्ती प्रकिया से जुड़ा मामला
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट भर्ती प्रकिया से जुड़ा था। राजस्थान हाईकोर्ट का तर्क था कि अगर आरक्षित वर्ग को जनरल सीट दी गई, तो यह उन्हें डबल बेनिफिट (Double Benefit) देने जैसा होगा- पहला आरक्षण का और दूसरा सामान्य सीट का।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की ख़ारिज
राजस्थान हाईकोर्ट में दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में यह मांग की गई थी कि भर्ती के दौरान आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग की सीटों पर न चुना जाए, भले ही उनके अंक सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक हों।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अदालत ने साफ कहा कि अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार सामान्य श्रेणी की कटऑफ से ज्यादा अंक लाता है, तो उसे सामान्य श्रेणी की सीट पर नियुक्त होने से नहीं रोका जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “आरक्षण की उपलब्धता आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार के मुकाबले योग्यता के आधार पर विचार किए जाने से नहीं रोकती है।”
आपको बता दें कि राजस्थान उच्च न्यायालय की भर्ती प्रक्रिया लिखित परीक्षा और उसके बाद साक्षात्कार पर आधारित थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी के लिए निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त होते हैं, तो साक्षात्कार (इंटरव्यू) के दौरान उन्हें सामान्य श्रेणी का माना जाना चाहिए। यदि कुल अंक सामान्य श्रेणी के कटऑफ से कम हैं, तो उन्हें उस आरक्षित श्रेणी के अंतर्गत माना जाएगा जिससे वे संबंधित हैं।
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