गुजरात के टेक्सटाइल इंडस्ट्री ( सूरत का विशाल कपड़ा उद्योग) में काम करने वाले प्रवासी मजदूर गैस सिलेंडर की महंगाई और कमी से परेशान हैं। पहले जो सिलेंडर 500 रुपये में भर जाता था अब उसकी कीमत करीब 2,500 रुपये तक पहुंच गई है। साथ ही रजिस्ट्रेशन बुक न होने के कारण कई मजदूर सिलेंडर रिफिल भी नहीं करा पा रहे हैं।
ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर अब भारत में ज़्यादा स्तर में दिखने लगा है। पिछले करीब दस दिनों में कई राज्यों से ऐसी खबरें आई हैं जहां एलपीजी गैस की कमी और बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगह होटल, रेस्टोरेंट और यहां तक कि कॉलेज भी गैस की कमी के कारण होस्टल, रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं। गैस लेने के लिए लंबी लाइनें लग रही हैं लोग आपस में ही झगड़ रहे हैं और कुछ जगहों पर हालत इतनी खराब हो गई कि लोग बीमार पड़ गए जिसमें अब तक दो लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं। यह स्थिति कुछ हद तक कोरोना काल जैसी लगने लगी है जहां जरूरी चीजों की कमी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई थी।
इस संकट का असर गुजरात के सूरत में भी देखने को मिल रहा है। यहां टेक्सटाइल इंडस्ट्री ( सूरत का विशाल कपड़ा उद्योग) में काम करने वाले प्रवासी मजदूर गैस सिलेंडर की महंगाई और कमी से परेशान हैं। पहले जो सिलेंडर 500 रुपये में भर जाता था अब उसकी कीमत करीब 2,500 रुपये तक पहुंच गई है। साथ ही रजिस्ट्रेशन बुक न होने के कारण कई मजदूर सिलेंडर रिफिल भी नहीं करा पा रहे हैं।
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक मजदूरों की कमी से कई फैक्ट्रियां हफ्ते में एक-दो दिन बंद करनी पड़ रही हैं और मेस-कैंटीन भी बंद हो गए हैं।
स्थिति इतनी खराब हो गई है कि उधना जंक्शन रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में मजदूर अपने घर लौटने के लिए जमा हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और ओडिशा से आए ये मजदूर अब गांव वापस जा रहे हैं जिससे सूरत का टेक्सटाइल कारोबार प्रभावित हो रहा है। हालांकि हालात को संभालने के लिए कुछ उद्योग संगठन आगे आए हैं और सस्ते भोजन की व्यवस्था शुरू की है। पांडेसरा इलाके में एक सामुदायिक किचन रोजाना करीब 5,000 मजदूरों को खाना दे रहा है जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिल रही है।
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The Indian Express उद्योग पर मंडरा रहे संकट पर टिप्पणी करते हुए दक्षिण गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतूभाई वखारिया ने कहा है कि “एलपीजी संकट के कारण श्रमिकों के लिए वर्तमान में स्थिति कठिन है। कई श्रमिकों के पास एलपीजी सिलेंडर पंजीकरण पुस्तिका नहीं है। वे किराए के मकानों में रहते हैं। कुछ मिलें हर हफ्ते एक या दो दिन के लिए बंद हो रही हैं। नवरात्रि और शादी का मौसम नजदीक होने के कारण हम किसी तरह यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कारखाने चलते रहें।”
सूरत में गैस संकट के बीच मजदूरों की मदद के लिए अब अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। पांडेसरा इलाके में एक सामुदायिक रसोई शुरू की गई है जहां मजदूरों को 40-45 रुपये में भरपेट खाना दिया जा रहा है। मिल मालिक यहां से खाना खरीदकर अपने मजदूरों को देते हैं ताकि वे काम जारी रख सकें और उन्हें खाने की दिक्कत न हो। रसोई चलाने वालों का कहना है कि यहां रोजाना 5,000 से ज्यादा लोगों के लिए खाना तैयार किया जा रहा है।
वहीं कुछ फैक्ट्री मालिक अपने स्तर पर भी इंतजाम कर रहे हैं। एक मिल में मजदूरों को सिर्फ 20 रुपये में खाना दिया जा रहा है ताकि वे काम छोड़कर न जाएं और उत्पादन जारी रहे। दूसरी ओर, गैस की कमी के कारण कुछ ठेकेदार अब मजदूरों को खाना बनाने के लिए लकड़ी तक उपलब्ध करा रहे हैं। इसके लिए रोजाना कई गाड़ियों में लकड़ी मंगाई जा रही है।
प्रशासन भी स्थिति को संभालने में जुटा है। जिला कलेक्टर कार्यालय के अनुसार सूरत शहर में करीब 55 गैस एजेंसियां हैं और ग्रामीण इलाकों में 20 और एजेंसियां काम कर रही हैं। अधिकारियों को लगातार स्टॉक पर नजर रखने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि लोगों को समय पर गैस सिलेंडर मिल सके। सरकार और प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी हालत में सप्लाई बाधित न हो और आम लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े।
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महाराष्ट्र –
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने घोषणा की है कि अब पेट्रोल पंपों पर केरोसिन (मिट्टी का तेल) उपलब्ध कराया जाएगा ताकि लोग इसे एलपीजी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने बताया कि राज्य में केरोसिन का पर्याप्त स्टॉक है और पहले इसकी सप्लाई की मजबूत व्यवस्था थी जिसे अब फिर से सक्रिय किया जा रहा है।
सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए गैस उत्पादन बढ़ाने की बात कही है। अस्पताल, स्कूल, वृद्धाश्रम, श्मशान और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं को पहले गैस देने का फैसला लिया गया है। साथ ही कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई भी तेज की गई है। हाल ही में 1,200 से ज्यादा गैस सिलेंडर जब्त किए गए और अवैध बिक्री से जुड़े करीब 33 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। अधिकारियों को बाजार पर नजर रखने और लोगों के शोषण को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर और गुजरात में भी बढ़ी परेशानी
जम्मू-कश्मीर में हालात और भी मुश्किल हो गए हैं जहां गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें लग रही हैं। कई लोगों को होम डिलीवरी के लिए ओटीपी मिलने के बावजूद घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। डिलीवरी करने वाले भीड़ और सुरक्षा कारणों से सिलेंडर देने में हिचकिचा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टॉक तो मौजूद है लेकिन ओटीपी सिस्टम में गड़बड़ी और घबराहट में ज्यादा खरीदारी (पैनिक बाइंग) से समस्या बढ़ रही है। कई परिवार अब मजबूरी में इलेक्ट्रिक हीटर और इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं, गुजरात में गैस की कीमत बढ़ने का असर अंतिम संस्कार जैसी सेवाओं पर भी पड़ रहा है। सूरत के कुछ श्मशानों में जहां पहले सीएसआर के तहत मुफ्त गैस मिलती थी अब उसके लिए पैसे देने पड़ रहे हैं। इससे एक अंतिम संस्कार पर करीब 1,000 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है जो परिवारों के लिए नई परेशानी बन गया है।
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सरकार का दावा, देश में गैस की कमी नहीं, लेकिन हालात पर नजर
केंद्र सरकार का कहना है कि देश में रसोई गैस (एलपीजी) की पूरी तरह से कमी नहीं हुई है और कुल सप्लाई अभी सामान्य बनी हुई है। पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर हुई एक बैठक में अधिकारियों ने बताया है कि गैस का स्टॉक पर्याप्त है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने यह भी माना है कि कुछ जगहों पर जमाखोरी और कालाबाजारी की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। इसी को देखते हुए केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे मामलों पर सख्त नजर रखें और खासकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को रोकें।
सरकार के मुताबिक, ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रहे तनाव का असर भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है जिससे सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पहले भारत की बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते आती थी लेकिन अब वहां स्थिति प्रभावित होने से दिक्कतें बढ़ी हैं। ऐसे में सरकार वैकल्पिक रास्तों और नए सप्लायर की तलाश कर रही है ताकि गैस की सप्लाई बनी रहे और लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। इसके साथ ही भविष्य में ऐसे संकट से निपटने के लिए भी नई रणनीति पर काम किया जा रहा है।
कुल मिलाकर एलपीजी गैस संकट ने आम लोगों से लेकर उद्योगों तक सभी को प्रभावित किया है। बढ़ती कीमतें, सप्लाई में रुकावट और कालाबाजारी जैसी समस्याओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है जिससे खासकर मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है।
हालांकि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही है लेकिन मौजूदा हालात यह दिखाते हैं कि अगर जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर और गहरा हो सकता है जैसे पलायन बढ़ना और रोजमर्रा की जिंदगी पर और ज्यादा दबाव पड़ना।
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