बांदा: जिले का ब्लॉक नरैनी, गांव जमवारा की लड़कियों ने बताया कि इंटरनेट आज के समय की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसकी कीमत अब भी कई महिलाओं और लड़कियों के लिए बाधा है। इंटरनेट महंगा होने से पढ़ाई, नौकरी और रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित होते हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। बहुत सी लड़कियां ऑनलाइन क्लास या कोचिंग से वंचित रह जाती हैं, और जो महिलाएं स्वास्थ्य सखी जैसी नौकरियों में हैं, उनका काम इंटरनेट न चलने से रुक जाता है। भारत में पुरुषों की तुलना में लगभग एक तिहाई कम महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं। इसके पीछे कारण हैं मोबाइल फोन की कमी, महंगा डेटा, और समाज में यह धारणा कि लड़कियों को इसकी जरूरत नहीं। अगर इंटरनेट सस्ता या मुफ्त मिले तो महिलाओं की जिंदगी कई तरह से बदल सकती है। वे न केवल ऑनलाइन शिक्षा और स्किल ट्रेनिंग का लाभ उठा सकेंगी, बल्कि कढ़ाई, सिलाई या मेहंदी जैसी चीजें भी सीखकर खुद का रोजगार शुरू कर सकती हैं। इंटरनेट से उन्हें सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी और रोजगार के अवसरों तक पहुंच मिलती है। डिजिटल पहुंच बढ़ने से महिलाएं आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनती हैं, जो समाज में समान अवसरों की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार और कंपनियों को सस्ता इंटरनेट, फ्री वाई-फाई ज़ोन या महिला डिजिटल केंद्र जैसी सुविधाएं देनी चाहिए, ताकि हर महिला डिजिटल भारत की भागीदार बन सके।
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