खबर लहरिया Blog Dal Mandi Bulldozer: दालमंडी में बुलडोज़र एक्शन के बीच 34 मकान ध्वस्त, और मीडिया की एंट्री पर रोक 

Dal Mandi Bulldozer: दालमंडी में बुलडोज़र एक्शन के बीच 34 मकान ध्वस्त, और मीडिया की एंट्री पर रोक 

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित दालमंडी इलाका भी चर्चा में है जहाँ सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है। प्रशासन द्वारा दालमंडी की करीब 650 मीटर लंबी सड़क को 17.5 मीटर चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत कुल 181 मकानों और 6 मस्जिदों को चिन्हित किया गया है। अब तक 50 मकानों पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिनमें से 15 मकान पूरी तरह गिराए जा चुके हैं।

Picture taken during demolition in Dal Mandi

ध्वस्तीकरण के दौरान की तस्वीर (फोटो साभार: सुशीला देवी)                   

देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार ऐसी तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं जहाँ बुलडोज़र के ज़रिए बस्तियों, दुकानों और घरों को गिराया जा रहा है। कहीं इसे विकास का रास्ता बताया जाता है तो कहीं इसे ज़बरदस्ती उजाड़ने की कार्रवाई कहा जाता है। वैध और अवैध निर्माण की बहस के बीच आम लोगों की ज़िंदगी सबसे ज़्यादा प्रभावित होती है। कई जगह मुआवजा मिलता है तो कई जगह लोग बिना किसी ठोस विकल्प के सड़क पर आ जाते हैं।
हर दूसरे दिन किसी न किसी राज्य से बुलडोज़र चलने की खबर सामने आ जाती है। कहीं दुकानदार रोते दिखते हैं तो कहीं महिलाएं घर बचाने की गुहार लगाती नज़र आती हैं। इसी क्रम में अब उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित दालमंडी इलाका भी चर्चा में है जहाँ सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है।

 

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दालमंडी केवल बाजार नहीं, काशी की विरासत

काशी विश्वनाथ मंदिर से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित दालमंडी गली को वाराणसी के सबसे पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में गिना जाता है। बताया जाता है कि इस गली का इतिहास करीब डेढ़ से दो सौ साल पुराना है। यह इलाका सिर्फ व्यापार का केंद्र नहीं रहा बल्कि संगीत और कला की दुनिया का भी अहम ठिकाना माना जाता था।
उस्ताद बिस्मिल्ला खान,(भारत के सबसे प्रसिद्ध और महानतम शहनाई वादक थे जिन्होंने पारंपरिक शहनाई को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई)  लच्छू महाराज, अभिनेत्री नरगिस और उनकी मां जद्दनबाई जैसे नामों का संबंध भी इस इलाके से रहा है। जद्दनबाई को हिंदी सिनेमा की पहली महिला संगीतकार के रूप में जाना जाता है। दालमंडी कभी ऐसा इलाका रहा जहाँ कलाकारों की आवाज़ें, रियाज़ और सांस्कृतिक गतिविधियाँ आम बात थीं। फिल्मों की शूटिंग तक यहां हुआ करती थी। अब वही दालमंडी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

सड़क चौड़ीकरण की योजना और चिन्हित इमारतें

प्रशासन द्वारा दालमंडी की करीब 650 मीटर लंबी सड़क को 17.5 मीटर चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत कुल 181 मकानों और 6 मस्जिदों को चिन्हित किया गया है।
10 जनवरी 2026 को 21 जर्जर मकानों सहित कुल 34 भवनों पर बुलडोज़र और हथौड़ों से कार्रवाई की गई। अब तक 50 मकानों पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिनमें से 15 मकान पूरी तरह गिराए जा चुके हैं।
इससे पहले 21 जनवरी को 8 मकानों को एक साथ ढहाया गया था। इसी के साथ नगर निगम ने 31 जनवरी को 23 मकान मालिकों को नोटिस भी जारी किए थे। इसमें 30 लोगों को मुआवजा भी दिया जा चुका है।

इस मामले पर प्रशासन का यह भी दावा है कि ये सभी मकान 100 साल से अधिक पुराने और जर्जर स्थिति में हैं तथा लोगों की जान को खतरा बन सकते हैं।

                           

व्यापारी का विरोध और आत्मदाह की चेतावनी

दालमंडी में ध्वस्तीकरण का काम चल ही रहा था कि ध्वस्तीकरण के दौरान तब स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई जब इलाके के एक पुराने व्यापारी ने अपने घर पर आग लगा लिया और घर और दुकान नहीं देने की गुहार लगाई। वह अपने मकान के पहले फ्लोर पर खड़ा होकर कहने लगा कि उसका मकान जर्जर नहीं है और प्रशासन उसे जबरन गिरा रहा है।

दालमंडी में चला बुलडोज़र (फोटो साभार: सुशीला देवी)

व्यापारी का आरोप था कि प्रशासन जानबूझकर मकान को जर्जर घोषित कर रहा है। उसने अपनी दुकान में आग लगा ली जिसे पुलिस द्वारा बुझाया गया। उनका कहना था कि वे मकान पुस्तैनी है और वे वहां कई सालों से रहते आ रहे हैं। वे अपने जीते जी अपने मकान पर बुलडोज़र नहीं चलने देंगे।
इस घटना के बाद दालमंडी में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग रोते-बिलखते दिखाई दिए और प्रशासन से 10 दिन की मोहलत मांगते रहे। विरोध करने वाले 8 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया और कुछ के साथ बल प्रयोग की भी बात सामने आई।

भारी पुलिस बल और मीडिया पर पाबंदी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था कर दी। चारों थानों से करीब 500 से 600 पुलिसकर्मी तैनात किए गए जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। ड्रोन के ज़रिए पूरे इलाके की निगरानी की गई।

पुलिस बल तैनात (फोटो साभार: सुशीला देवी)

ध्वस्तीकरण के दौरान दुकानों को बंद कराया गया और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। 

इस दौरान दालमंडी इलाके में मीडिया के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि यह फैसला मीडियाकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। 

Media barred during bulldozer operation in Dal Mandi

दालमंडी में बुलडोज़र के दौरान मीडिया पर रोक (फोटो साभार: सुशीला देवी)                              

प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की सफाई

एसपी ज़िला वाराणसी अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि दालमंडी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई लगातार जारी है और अब तक 34 मकानों पर काम हो चुका है। उन्होंने कहा कि मीडिया के लिए एडवाइजरी जारी की गई है ताकि किसी तरह की घटना न हो।
वहीं पीडब्ल्यूडी अधिकारी केके सिंह ने बताया कि कुल 50 भवनों को हटाने की प्रक्रिया चल रही है जिनमें से 17 भवन पूरी तरह ध्वस्त किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 30 भवनों को पूरा मुआवजा दिया जा चुका है जबकि 15 से 16 मकानों का पंजीकरण अभी प्रक्रिया में है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल मुआवजे की बात हुई है पुनर्वास या नई जगह देने की कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है।           

पीडब्ल्यूडी अधिकारी केके सिंह (फोटो साभार: केके सिंह)        

दुकानदारों की चिंता और उजड़ता भविष्य

इलाके के दुकानदारों और कशिम अहमद का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं लेकिन समस्या यह है कि दुकान और मकान गिरने के बाद वे कहां जाएँगे। कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह इसी बाज़ार पर निर्भर है।
कुछ लोगों का आरोप है कि उनके मामलों में हाईकोर्ट से स्टे होने के बावजूद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
दालमंडी जो कभी काशी की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा थी अब धीरे-धीरे इतिहास बनती जा रही है। जहाँ कभी संगीत, कारोबार और जीवन की रौनक थी वहां अब टूटती दीवारें और उजड़ते घर दिखाई दे रहे हैं।

 

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