उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में सोशल मीडिया पर लाइव आकर आत्महत्या की चेतावनी देने वाले एक युवक के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। यह मामला कर्वी कोतवाली क्षेत्र का है। घटना ग्राम पंचायत गोसाईंपुर,बछरन ब्लॉक कर्वी जिला चित्रकूट के रहने वाले प्रियांशु मिश्रा से जुड़ी है।
रिपोर्टिंग – नाज़नी रिज़वी, लेखन – रचना
पुलिस ने इस मामले में ब्लॉक प्रमुख समेत छह अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि घटना को कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
शिकायतकर्ता प्रियांशु मिश्रा ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह गोसाईपुर गांव का रहने वाला है। उनका आरोप है कि पहाड़ी ब्लॉक की प्रमुख सुशील द्विवेदी और उनके साथियों ने उन्हें धमकाया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। प्रियांशु का कहना है कि इसी मानसिक दबाव के कारण प्रियांशु मिश्रा ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर आत्महत्या करने की बात कही थी।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ा विवाद, मारपीट के आरोप
पियूष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने जनवरी महीने में सोशल मीडिया पर ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर एक पोस्ट डाली थी। इसके बाद 2 फरवरी को राजापुर थाने में ब्लॉक प्रमुख पहाड़ी सुशील द्विवेदी ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
प्रियांशु मिश्रा के मुताबिक 2 फरवरी को वह घर की पूजा सामग्री लेकर बंधवाई बांध में विसर्जन करने गए थे। विसर्जन के बाद जैसे ही वह मंदिर परिसर की ओर लौटे, तभी वहां करीब छह लोग पहुंचे और उन्हें मारने लगे। उन्होंने धमकी दी कि सुशील द्विवेदी के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट करना बंद करो और माफी मांगो, नहीं तो जान से मार देंगे।
प्रियांशु मिश्रा का कहना है कि इस घटना के बाद वह काफी परेशान हो गए थे और उसी दिन रिपोर्ट दर्ज कराने नहीं जा सके। उन्होंने 3 फरवरी को कर्वी कोतवाली में आवेदन दिया, लेकिन एक महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान उन्हें लगातार धमकियां मिलती रहीं।
ट्रेन में भी मारपीट का आरोप
प्रियांशु मिश्रा ने बताया कि 9 मार्च को वह अपने पिता राजेश कुमार मिश्रा के साथ काम से झांसी गए थे और वापसी में मेमो ट्रेन से लौट रहे थे। जब ट्रेन महोबा में रुकी तो करीब आठ लड़के ट्रेन में चढ़े और उनके साथ मारपीट करने लगे।
उन्होंने बताया कि उनके पिता ने बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी पीटा गया। उनके साथ मौजूद एक दोस्त ने बीच-बचाव किया तो उसे भी बेल्ट और हाथ-पैर से मारा गया। प्रियांशु मिश्रा का आरोप है कि जाते-जाते वे लोग यह कहते हुए भागे कि “और बनाओ भ्रष्टाचार के वीडियो।” इसके बाद वे चलती ट्रेन से कूदकर भाग गए।
प्रियांशु मिश्रा का कहना है कि ये लोग सुशील द्विवेदी के ही समर्थक थे। उनका आरोप है कि थाने में कार्रवाई नहीं होने की वजह से उनके हौसले बढ़ते जा रहे थे। उन्होंने बताया कि महोबा जीआरपी थाने और कर्वी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है लेकिन उन पर ऐसी धाराएं लगाई गई हैं जो केवल औपचारिकता जैसी लगती हैं।
प्रियांशु मिश्रा का कहना है कि वह एक महीने से परेशान थे इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर आत्महत्या की कोशिश की। उनका कहना है कि “भ्रष्टाचारियों के हाथों मरने से बेहतर है कि मैं खुद अपनी जान ले लूं।” उन्होंने कहा कि उनकी कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है वह सामाजिक मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे थे। उन्होंने आरटीआई के तहत जानकारी लेने की कोशिश की थी जिसके बाद कुछ लोग उनके खिलाफ हो गए।
परिवार ने बताया कैसे बची जान
प्रियांशु मिश्रा की मां कल्पना मिश्रा ने बताया कि घटना वाली रात सभी लोग देर से घर लौटे थे और सो गए थे। उन्हें यह नहीं पता था कि उनके साथ क्या हुआ था। सुबह प्रियांशु के पिता प्रयागराज चले गए। उन्होने बताया कि उन्होंने प्रियांशु से कहा कि पूजा कर आओ लेकिन उसने अजीब तरीके से जवाब दिया। उन्हें लगा कि वह थका हुआ है इसलिए ऐसा बोल रहा है। इसके बाद वह खुद मंदिर पूजा करने चली गईं।
थोड़ी देर बाद विकास मिश्रा उर्फ हिरो मिश्रा का फोन आया कि जल्दी घर आओ प्रियांशु फांसी लगाने की कोशिश कर रहा है। कल्पना मिश्रा ने बताया कि जब तक वह घर पहुंचीं तब तक विकास मिश्रा ने उसे बचा लिया था। उन्होंने बताया कि विकास मिश्रा ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो देख लिया था वरना उनका बेटा शायद बच नहीं पाता। कल्पना मिश्रा का कहना है कि बाद में उन्हें पूरी घटना के बारे में पता चला। उनका कहना है कि सुशील द्विवेदी उम्र में प्रियांशु के बाबा जैसे हैं फिर भी एक 17 साल के लड़के से इस तरह का विवाद किया जा रहा है।
दोस्त ने लाइव देखकर बचाई जान
विकास मिश्रा उर्फ हिरो मिश्रा ने बताया कि उस समय करीब 10 से 10:30 बजे का समय था और वह ऑनलाइन थे। उनका घर प्रियांशु के घर से ज्यादा दूर नहीं है। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने प्रियांशु मिश्रा को लाइव देखा और उसे आत्महत्या की तैयारी करते पाया वह तुरंत वहां पहुंचे और उसे बचा लिया।
उन्होंने कहा कि प्रियांशु मिश्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहा था। उनका कहना है कि पारिवारिक विवाद अलग हो सकता है लेकिन उसका संघर्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ है।
पुलिस और ब्लॉक प्रमुख का पक्ष
मामले की जांच कर रहे विवेचक एसआई अमरेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि फिलहाल वह ड्यूटी में व्यस्त हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
वहीं इस मामले पर ब्लॉक प्रमुख सुशील द्विवेदी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत और घरेलू विवाद है और उन्हें झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
ब्लॉक प्रमुख ने कहा कि उनका कार्यकाल पूरा होने वाला है। अगर वास्तव में भ्रष्टाचार का मामला होता तो पहले ही आवाज उठाई जाती। उनका आरोप है कि यह मामला केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर लाइव आकर आत्महत्या की बात करना गलत है। अगर किसी को शिकायत है तो उसे कानूनी तरीके से लड़ाई लड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह गलत पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।
सुशील द्विवेदी ने कहा कि उनकी बीस साल की सामाजिक छवि रही है और कॉलेज के दिनों से वह राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह छात्र संघ की नेता भी रह चुके हैं और उन पर पहले कभी ऐसे आरोप नहीं लगे। उनका कहना है कि प्रियांशु मिश्रा उनके बच्चों की उम्र का है और उनसे उनका कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है। उनके अनुसार यह परिवार का आपसी मामला है, जिसमें उन्हें बेवजह घसीटा जा रहा है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद ही आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।
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