खबर लहरिया Hindi Bolenge Bulwayenge: क्यों परंपराएँ हमेशा महिलाओं पर भारी पड़ती हैं?

Bolenge Bulwayenge: क्यों परंपराएँ हमेशा महिलाओं पर भारी पड़ती हैं?

दोस्तों, आज हम बात करेंगे उस रूढ़िवादी बोझ की, जिसका कोई ठोस मतलब नहीं, फिर भी उसे निभाना ज़रूरी माना जाता है। आख़िर क्यों परंपरा निभाने के नाम पर महिलाओं को रोना पड़ता है? आज हम उस रस्म पर चर्चा करेंगे जो केवल महिलाओं की भावनाओं को तौलती है। देखेंगे कि क्यों परंपराएँ अक्सर महिलाओं पर ही भारी पड़ती हैं। सवाल बस इतना-सा है— रूढ़िवादी परंपराओं और भावनात्मक बोझ का असर सिर्फ महिलाओं पर ही क्यों पड़ता है?

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