इस बार मेरे शो का मुद्दा है — प्यार, इश्क़, मोहब्बत। सबकी ज़िंदगी में इसका अहम रोल होता है। बिना प्यार के रिश्ते चलते ही नहीं, और हर रिश्ते में प्यार की अपनी एक अहमियत होती है। लेकिन आज हम किसी खास रिश्ते की बात नहीं कर रहे हैं। भाई, फरवरी का महीना है… और ये महीना प्यार के नाम से बदनाम भी है। तो क्यों न इस बदनाम महीने में, बदनाम प्यार की बातें कर ली जाएं? आज हम बात करेंगे कुछ ऐसे लोगों से, जिनके ज़माने में प्यार कई रंगों का मज़ा देता था। वो दौर ही कुछ और था — वो डोरी अलग थी, वो इंतज़ार अलग था… कागज़ों पर इज़हार होता था। तो चलिए, चलते हैं उस दूर के प्यार को जानने…
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