खबर लहरिया Blog Bihar News: किशनगंज में “सामाजिक परिवर्तन मेला” का आयोजन, सामाजिक बदलाव की ओर कदम

Bihar News: किशनगंज में “सामाजिक परिवर्तन मेला” का आयोजन, सामाजिक बदलाव की ओर कदम

 

बिहार के किशनगंज में प्रोजेक्ट पोटेंशियल के कार्यक्रम रूरल यूथ लीडरशिप प्रोग्राम के तहत सामजिक परिवर्तन मेले का आयोजन किया गया। यह मेला 15 मार्च 2026 को आयोजित किया गया था। इस मेले में युवाओं को अपने क्षेत्र से बहार निकलकर अपने विचार, आइडिया शेयर करने के लिए एक मंच दिया गया। इस मेले में कई सामजिक संगठन और सरकारी संगठनों ने भाग लिया।

बिहार के किशनगंज में आयोजित सामाजिक परिवर्तन मेला (फोटो साभार: प्रोजेक्ट पोटेंशियल)

आज भी बिहार राज्य में कई युवा ऐसे हैं जो आर्थिक तंगी या फिर अवसर न मिलने की वजह से आगे नहीं बढ़ पाते। या फिर उनके पास ऐसा कोई गाइड करने वाला नहीं होता जो उन्हें बता सकें कि किस क्षेत्र में वह अपना भविष्य बना सकते हैं? ऐसे ही युवाओं को एक नई राह दिखाने के लिए प्रोजेक्ट पोटेंशियल ने सामाजिक परिवर्तन मेले का आयोजन किया।

‘सामाजिक परिवर्तन मेला 2026’ के आयोजन का उद्देश्य

इस मेले का मुख्य उद्देश्य गांव के युवाओं को एक साथ एक मंच पर लाना था, ताकि वे सिर्फ अपने पंचायत तक सीमित न रहें, बल्कि बाहर के लोगों से भी जुड़ सकें। अक्सर गांव के युवा अपने ही क्षेत्र तक सीमित रह जाते हैं, जिससे उन्हें नए अवसरों और जानकारी के बारे में पता नहीं चल पाता। इस मेले के जरिए उन्हें यह मौका मिला कि वे दूसरे पंचायतों और इलाकों से आए युवाओं से मिलें, बातचीत करें और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखें।

सामाजिक परिवर्तन मेला 2026 में आए लोग (फोटो साभार: प्रोजेक्ट पोटेंशियल)

सामाजिक परिवर्तन मेले में ‘सामजिक संगठन’ भी शामिल

मेले में 400 से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया और 30 से अधिक संस्थाएं इसमें शामिल हुईं। इस मेले में अलग-अलग सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। इस मेले में प्रयोग, न्याया, निरंतर ट्रस्ट और दीक्षा फाउंडेशन जैसे संगठन शामिल हुए। इन संगठनों ने युवाओं को अपने काम के बारे में बताया—जैसे शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर वे किस तरह काम करते हैं। इससे युवाओं को यह समझने में मदद मिली कि वे समाज में किस तरह अपनी भूमिका निभा सकते हैं और किन-किन क्षेत्रों में उनके लिए मौके मौजूद हैं।

यह मेला एक ऐसा मंच बनकर सामने आया, जहां युवाओं को सीखने, नए लोगों से जुड़ने और साथ मिलकर काम करने का अवसर मिला। यहां उन्होंने न केवल नई जानकारियां हासिल कीं, बल्कि अपने भविष्य के लिए नए रास्ते और अवसर भी तलाशे। इस तरह, यह मेला युवाओं के लिए जागरूकता, सहयोग और रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

कई युवाओं के लिए यह पहला मौका

इस मेले में आने वाले ज्यादातर युवा स्थानीय समुदायों से थे। उनमें से कई ऐसे थे जो अपने परिवार में पहली बार पढ़ाई कर रहे हैं (फर्स्ट जेनरेशन लर्नर्स) और कम आय वाले परिवारों से आते हैं। इसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और आदिवासी समुदाय के युवा शामिल थे।

सामजिक परिवर्तन में हिस्सा लेती हुई युवा लड़कियां (फोटो साभार: प्रोजेक्ट पोटेंशियल)

मेले में आए युवाओं ने बताया कि उनके लिए यह पहला मौका था, जब वे किसी ऐसे मेले या समूह गतिविधि का हिस्सा बने। इसलिए उनके लिए यह एक नया और सीखने वाला अनुभव रहा। इस मेले में करीब 70% प्रतिभागी लड़कियां थीं, जबकि 30% लड़के थे, जो युवतियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

युवाओं के लिए नया अवसर

मेले के दौरान युवाओं को अलग-अलग तरह के अवसरों के बारे में जानकारी दी गई, जैसे कौशल विकास (स्किलिंग) कोर्स, क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) कार्यक्रम, फेलोशिप, उच्च शिक्षा, करियर के विकल्प और इंटर्नशिप। इससे उन्हें अपने भविष्य के लिए नए रास्तों के बारे में समझ मिली।

 

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