खबर लहरिया Blog बांदा: कचरे के बीच लगती है सब्ज़ी मंडी

बांदा: कचरे के बीच लगती है सब्ज़ी मंडी

बांदा जिले के चिल्ला कस्बे में लगने वाली सब्जी मंडी में सब्जियों के साथ कचरा भी देखने को मिलता है जिससे यहां आने वाले लोग परेशान हैं। सब्जी विक्रेता का कहना है कि हम सफाई करने के पैसे देते हैं फिर भी सफाई नहीं होती और हमें मजबूरन यहां सब्जी बेचनी पड़ती है।

                                                                                                     सब्ज़ी मंडी की तस्वीर जिसके आस-पास सिर्फ कूड़ा ही नज़र आता है 

साप्ताहिक सब्जी बाजार सप्ताह में सातों दिन लगाए जाते हैं। हर इलाके में अलग-अलग दिन ये बाजार लगते हैं। गांव हो या शहर अब सब्जी का साप्ताहिक बाजार लगता है। किसी के यहां सोमवार बाजार लगता है तो किसी के यहां बुधवार के दिन बाजार लगता है। सब्जी मंडी से सब्जी विक्रेता ताजी सब्जियां खरीद कर लाते हैं और आप के नज़दीकी इलाकों में सब्जी बेचते हैं ताकि आपको दूर न जाना पड़े। सब्जी बेचकर ही वह अपने घर-परिवार का पेट पालते और चलाते हैं। सब्जी बाजार में जाने का मन तभी करता है जब वहां किसी प्रकार की गंदगी न हो बस सब्जियों की महक हवाओं में घुली हो लेकिन बाजार में अगर आप जाए और आस-पास कचरा पड़ा हो तो क्या आप सब्जियां वहां से खरीदेंगे? नहीं न। और उनका क्या जो ऐसे गंदगी में मजबूर होकर सब्जियां बेचते हैं? क्योंकि उनके पास कहीं और सब्जियां बेचने का विकल्प ही नहीं है।

ऐसे ही गंदगी और कचरे से परेशान है उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के ‘चिल्ला’ कस्बा में सब्जी विक्रेता और खरीदार। यहाँ हफ्ते में दो बार, सोमवार और शुक्रवार को साप्ताहिक बाजार लगता है। यहां की सब्जी मंडी में सब्जियों के साथ कचरा भी देखने को मिलता है जिससे यहां आने वाले लोग परेशान हैं। सब्जी विक्रेता का कहना है कि हम सफाई करने के पैसे देते हैं फिर भी सफाई नहीं होती और हमें मजबूरन यहां सब्जी बेचनी पड़ती है।

सुनील जोकि यहां के साप्ताहिक सब्जी बाजार में सफाई करने के पैसे लेता है। जब सफाई कर्मी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं सफाई नहीं करूंगा प्रधान खुद सफाई करे।

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सफाई कर्मी को पैसे और सब्जी दोनों देने पड़ते हैं

साप्ताहिक सब्जी बाजार के बंसीलाल का आरोप है कि हफ्ते में दो बार सब्जी बाजार लगाते हैं और कचड़े से पूरा बाजार भरा हुआ है। कचरा साफ करने के सफाई कर्मी हर सब्जी विक्रेता से 5 रुपए लेता है और साथ में सब्जी भी लेता है। जब हम कहते हैं सफाई क्यों नहीं करते हो? तो कहते हैं कि मुझे हर दुकान से 10 रुपए और सब्जी साथ में मिलेंगे तभी सफाई करूंगा नहीं तो खुद कर लीजिए या तो प्रधान से कराओ।

हवा से उड़कर कूड़े की पन्नियां सब्जी को कर देती है ख़राब

रामावतार का कहना है कि यहां कूड़ा इतना फैला हुआ है कि “कूड़े में पड़ी गन्दी पन्नियां हवा से उड़कर हमारी सब्जियों पर आ गिरती है जिससे हमारी सब्जियां खराब हो जाती है। इसलिए हम चाहते हैं कि यह मंडी को साफ सुथरा रखा जाए जिससे हमारा धंधा आराम से हो सके और हमारे धंधा में कोई बाधा ना आए। यहां बैठने में इतनी बदबू आती है कि बैठना मुश्किल पड़ जाता है। जो सफाई कर्मी है उसको हर दुकान से सब्जी दी जाती है। जो जिस सब्जी का बाजार लगाए हुए है वह हर दुकान से उसको मिल जाता है। लेकिन वह इस बार सफाई करने के लिए नहीं तैयार हो रहा है। जो सब्जी खरीदने आते हैं उनका गंदगी से खरीदना मुश्किल हो जाता है।”

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गंदगी में सब्जी बेचना मुश्किल

विमला बताती है कि सुबह से शाम तक हम सब्जी लागते हैं और यहीं पर बैठकर बेचते हैं। यहां पर इतनी बदबू आती है कि बेचने में मुश्किल होती है। यदि छोटा-मोटा सब्जी विक्रेता है तो उसे ₹5 लिया जाए। जो बड़ा व्यापारी है उसे ₹10 लिया जाए कोई इतनी बड़ी बात नहीं है। ₹10 भी देना कोई बड़ी बात नहीं है पर सफाई तो करे।

सब्जी बाजार में आए एक तम्बाकू विक्रेता कामता प्रसाद जोकि बहुआ गांव से तंबाकू बेचने आए हुए थे। उनसे खबर लहरिया की रिपोर्टर ने बात की तो उन्होंने बताया कि वह दिन भर में तंबाकू अच्छी रकम में बेच लेते हैं। वह बीस साल से चिल्ला में तंबाकू बेचने का व्यापार करते आ रहे हैं और हर बाजार में जाते हैं। वह कहते हैं, “अगर तंबाकू खोल कर बैठ जाते हैं तो कचरा उड़कर हमारे माल में पड़ जाता है इसलिए अगर सुबह से सफाई हो जाए तो इतनी परेशानी नहीं होगी।”

प्रधान का बयान

चकला से प्रधान विद्या देवी का कहना है कि हम सफाई कर्मी को सफाई करने का महीने का पैसा देते हैं लेकिन बाजारों में कचरा साफ करना उसका काम नहीं है इसलिए उसको दुकान वाले ही पैसा देंगे फिर भी वो पैसे लेकर सफाई नहीं करता है तो हम तो प्राइवेट सफाई कर्मी को लगाकर सफाई करा देंगें।

रिपोर्ट – शिव देवी 

 

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