बनारसी साड़ी ने डिजिटल युग में अपनी कहानियों को नए अंदाज़ में पेश किया है। बनारस की यह पारंपरिक साड़ी न सिर्फ़ एक लंबा इतिहास समेटे हुए है बल्कि अपनी खूबसूरती और बारीक कला के कारण दुनिया भर में मशहूर है। यह साड़ी वाराणसी की पहचान भी है और स्थानीय लोगों के लिए बड़ा रोजगार का माध्यम भी।
बनारसी साड़ियों के दाम महंगे
बनारसी साड़ियां आज दस हज़ार से लेकर लाखों रुपये तक बिकती हैं। समय बदलने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इन साड़ियों को नई पीढ़ी के खरीदारों तक पहुंचा दिया है। फैशन की दुनिया में नए डिज़ाइन, नए पैटर्न और ऑनलाइन बिक्री ने इन साड़ियों की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया है।
आज बनारसी साड़ी न सिर्फ़ एक परंपरा बनकर रह गई है बल्कि आधुनिक फैशन में अपनी मजबूत जगह बना चुकी है। डिजिटल युग ने इसे वैश्विक बाजार में नई चमक दी है। आइए जानते हैं कि इस बदलाव ने बनारसी साड़ी को किस तरह नया रूप दिया है।
फैशन के हिसाब से बदला बनारसी साड़ियां बनाने का ढंग
मुरला कंवारी का कहना है कि बदलते समय के बावजूद बनारसी साड़ी ने अपनी पुरानी विरासत और पहचान को बनाए रखा है। इसके साथ ही आधुनिक फैशन के साथ भी बेहतरीन तालमेल बिठाया है। पहले यह साड़ी केवल पारंपरिक और पारिवारिक परिधान मानी जाती थी लेकिन अब यह एक बहुमुखी फैशन बन चुकी है। नई पीढ़ी के बीच हल्के कपड़ों, आधुनिक डिज़ाइनों और समकालीन पैटर्न की मांग तेजी से बढ़ रही है।
पहले बनारसी साड़ी में भारी रेशम और जरी का काम होता था। एक किलो वजन की साड़ी बुनने में 15 से 20 दिन लग जाते थे क्योंकि काम बहुत बारीक और समय लेने वाला होता था। लेकिन बदलते दौर में महिलाओं की पसंद भी बदल गई है। अब लोग भारी साड़ियों की जगह आरामदायक, हल्की और आसानी से संभाली जाने वाली साड़ियाँ पसंद कर रहे हैं। इसी वजह से अब कई बनारसी साड़ियाँ एक हफ्ते में भी तैयार हो जाती हैं।
आज की बनारसी साड़ियों में नए पैटर्न, नए रंग और बदलती बुनाई तकनीक स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। खासकर कटान सिल्क जैसे स्टाइल की मांग दुल्हनों के बीच बहुत बढ़ गई है।
इस समय बाजार में सबसे ज्यादा मांग हल्की बनारसी साड़ियों की है। यह न सिर्फ पहनने में आरामदायक हैं बल्कि इनकी कीमत भी भारी साड़ियों की तुलना में कम होती है इसलिए खरीदारों के बीच इनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
सुधा का कहना है कि “पहले महिलाएं इसे रोज़ पहनती थीं लेकिन अब ज़्यादातर महिलाएं शादी, त्योहार, पार्टियों या खास मौकों पर ही साड़ी पहनती हैं। बदलते फैशन में अब लोग भारी साड़ी की जगह हल्की साड़ियों को ज्यादा पसंद करते हैं।
सुधा कहती हैं “हल्की साड़ी पहनकर हम खुद को अच्छी तरह संभाल पाते हैं, आसानी से चल-फिर भी सकते हैं। इसी वजह से मुझे भारी साड़ियाँ पसंद नहीं हैं।”
सजना कहती हैं कि उनके पास तीन बनारसी साड़ियाँ हैं लेकिन भारी होने की वजह से वे उन्हें पहन नहीं पातीं। इसलिए अब वे हल्के डिज़ाइन की साड़ियाँ खरीद रही हैं जिनकी कीमत चार हजार रुपये से शुरू होती है। उन्होंने दो हल्की साड़ियाँ दूसरों को देने के लिए भी ली हैं।
सजना का मानना है “आजकल की साड़ियों की खास बात यह है कि आप इन्हें कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। आगे आने वाले समय में और भी लोग हल्की साड़ियाँ ही पहनना पसंद करेंगे। हमने तो भारी साड़ियाँ पहन लीं लेकिन हमारी अगली पीढ़ी भारी साड़ियाँ शायद ही पसंद करे।”
बनारसी साड़ियों के दाम अब समय के साथ बहुत महंगे हो गए हैं जिनके पास पैसे हैं वहीं इनको अधिकतर खरीदते हैं.यह देखने में बड़ी सुन्दर लगती है और बनारस की एक खास पहचान बन गई है।
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