देश के कई राज्यों में इस समय आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने वेतन, मानदेय और काम की असुरक्षित स्थितियों को लेकर आंदोलन कर रही हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के मैहर जिले में भी आशा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी रहा।
खबरों के अनुसार अमरपाटन के सिविल अस्पताल के सामने बड़ी संख्या में आशा और आशा सहयोगी महिलाएं धरने पर बैठीं। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारे लगाए और लंबित वेतन का तुरंत भुगतान करने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
खून से लिखा पत्र
वेतन न मिलने से नाराज़ आशा कार्यकर्ताओं ने अपने विरोध को और तीखा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम खून से पत्र लिखा। यह पत्र उन्होंने बीएमओ डॉ. आर.के. सतनामी को सौंपा ताकि उनकी बात सरकार तक पहुंच सके। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले छह महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है जिससे घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा का खर्च और इलाज तक के लिए उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। इसी आर्थिक और मानसिक दबाव को दिखाने के लिए उन्होंने खून से पत्र लिखने जैसा कदम उठाया।
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स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़, फिर भी मुश्किल
खबरों के अनुसार प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया है कि आशा कार्यकर्ता गांव और शहर की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होती हैं। गर्भवती महिलाओं की जांच, प्रसव से पहले और बाद की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण, स्वास्थ्य सर्वे और सरकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुंचाने का काम वही करती हैं। इसके बावजूद समय पर वेतन न मिलना उनके साथ अन्याय है। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा है कि वेतन न मिलने का असर सिर्फ उन पर ही नहीं है इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। कई जगहों पर कामकाज प्रभावित होने लगा है जिसका सीधा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ सकता है।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
धरना स्थल पर पहुंचे बीएमओ डॉ. आर.के. सतनामी ने आशा कार्यकर्ताओं से बातचीत की और मुख्यमंत्री के नाम लिखा गया पत्र स्वीकार किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा और करीब 15 दिनों के भीतर वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि इस आश्वासन के बाद भी आशा कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया कि जब तक उनके खाते में बकाया वेतन नहीं आ जाता तब तक धरना और हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना है कि बार-बार वादे किए जाते हैं लेकिन जमीन पर हालात नहीं बदलते इसलिए अब वे ठोस कार्रवाई से पहले आंदोलन खत्म नहीं करेंगी।
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