इस कम बजट में कैसे बनें ड्रेस ?

karvi col
बच्चों को अब तक नहीं मिलीं ड्रेस

चित्रकूट। यहां सर्वशिक्षा अभियान के तहत बच्चों के लिए शुरू हुई ड्रेस वितरण योजना पूरी तरह से लागू नहीं हो पा रही है। इसका कारण कम बजट  और समय से बजट का न मिलना है।
कर्वी ब्लाक के दस प्राथमिक और जूनियर स्कूलों के बच्चों से पूछा गया तो पता चला कि अभी ड्रेस बनने गई है। मास्टरों का कहना है कि सरकार योजना लागू करती है पर बजट कम देती है।
पड़री प्राथमिक स्कूल के हेडमास्टर रावेन्द्र ने बताया कि उनके स्कूल में कुल 134 बच्चों में से 121 बच्चों की ड्रेस बनने के लिए ही बजट पास हुआ है। इसमें भी अभी केवल 36300 रुपए ही आए हैं। जबकि इन बच्चों के हिस्से आने वाला बजट करीब 48000 रुपए है। हालांकि शासन ने भरोसा दिया है कि दूसरी किश्त जल्दी ही आ जाएगी। इसके अलावा बाकी 15 बच्चों के लिए अभी बजट पास होना बाकी है।
पहाड़ी ब्लाक के उन्नाय बन्ना के मास्टर ने बताया कि वहां 152 बच्चों में 82 बच्चों को ही ड्रेस मिली है। मानिकपुर ब्लाक के मड़ैयन प्राथमिक स्कूल के मास्टर का कहना है कि दो सेट ड्रेस के लिए 400 रुपऐ मिल रहे हैं। लेकिन महंगाई को देखते हुए इसमें दो ड्रेस बनवाना बहुत मुश्किल है। बेसिक शिक्षा अधिकारी बी.के. सिंह खुद भी इस बात को मानते हैं कि 400 रुपऐ में दो सेट ड्रेस बनवाना वाकई मुश्किल काम है। एक ड्रेस की सिलाई 120 रुपए पड़ती है। 80 रुपए में अच्छी क्वालिटी का कपड़ा कैसे खरीद सकते हैं?

ड्रेस वितरण समिति  स्कूलो में ड्रेस बांटने के लिए विद्यालय प्रबन्धक समिति बनाई गई है। जिसमें 11 सदस्य होगें, उसमें से 4 सदस्यों की जिम्मेदारी खरीददारी की है। प्रबन्धक समिति के ही खाते में पैसा आयेगा। वही लोग खरीददारी करेंगे और कपड़े का नमूना पास करेगें।

                                                                   ड्रेस सिलवाने की शर्त  कपड़ा थान का होनाचाहिए, सिलाई से पहले कपड़ा धुलवाना ज़रूरी है, ड्रेस में डबल सिलाई होनी चाहिए, नाप में छोटा बड़ा नहीं होना चाहिए।