हाल ही में बिहार सरकार द्वारा दरभंगा के जाले ब्लॉक के कुछ पुरुष ग्रामीणों के बैंक खाते में तकनीकी खराबी के कारण 10,000 रुपये जमा किए गए। अब सरकार ने नोटिस जारी कर उनसे यह राशि वापस करने को कहा है। इसी बात को लेकर ग्रमीणों ने नारजगी जताई और कहा कि सत्ता में आने के बाद सरकार दिए गए पैसे वसलू रही है। ग्रामीणों ने यह भी कहा यदि सरकार को पैसे वापस चाहिए तो उन्हें हमारा वोट वापस करना होगा।
बिहार में नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत हुई। इस बार चुनाव से पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10,000 रुपए दिए गए। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, इसी साल 26 सितंबर को शुरू की थी, जिसके तहत लगभग 1.4 करोड़ महिला उद्यमियों के बैंक खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए थे। ऐसा माना जा रहा है कि एनडीए की जीत में सबसे बड़ा हाथ यही था जिसने एनडीए गठबंधन को 243 सीटों में से 202 सीटों पर जीत दिलाई।
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बिहार में ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ से जुड़ी सभी जानकारी के बारे में जानें
सरकार ने महिला की जगह पुरुषों के बैंक खातों में डाले पैसे
चुनाव हुए करीब 2 महीने हो गए हैं और अब खबर आ रही है कि जो चुनाव से पहले महिलाओं को 10,000 रुपए दिए गए उनमें से कुछ राशि पुरुषों के बैंक खातों में गलती से चली गई है। सरकार की हुई इस गड़बड़ी का पता तब चला जब बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन समिति (जीवीका) – ग्रामीण विकास विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्था ने दरभंगा के जाले ब्लॉक में करीब 14 पुरुषों को पैसा वापस मांगने के लिए नोटिस भेजा।
पैसा वापस मांगने पर लाभर्थियों ने उठाये सवाल
द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार जाले ब्लॉक के अहियारी गांव के निवासी पैसे वापस करने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह राशि दिवाली और छठ के दौरान दिए गए थे तो पैसे खर्च हो गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह पैसे उन्हें वोटों के बदले दिए गए थे और “हिसाब-किताब निपटा दिया गया है”।
एक खेत मजदूर राम ने कहा “अगर सरकार कहती है कि पैसा गलती से हमारे खाते में जमा हो गया था, तो उसने तुरंत नोटिस क्यों नहीं भेजा और यह लगभग तीन महीने बाद क्यों आया?”
सत्ता में आने के बाद पैसे वसलूने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार उनके वोटों से सत्ता में आने के बाद पैसा वसूलने की कोशिश कर रही है। राम ने कहा, “हमारे वोटों की बदौलत एनडीए को जीत मिली, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार हमसे पैसे वसूलने के लिए दबाव डाल रही है।”
बात तो बिल्कुल वाजिब है!
जब वोट पाने के लिए ही पैसे दिए गए थे तो अब जब चुनावी रेवड़ी बांटने वालों को पैसे वापस वसूलने हैं तो वोट भी तो वापस करना पड़ेगा!यह वीडियो भाजपाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के मुंह पर एक तमाचा है।
आचार संहिता लागू होने के 1 दिन पहले घोषणा करके आचार… pic.twitter.com/s4IE9f1E2U— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) December 16, 2025
आरजेडी (RJD) ने “वोट खरीदने” का लगाया आरोप
यह मामला समाने आने पर सोशल मीडिया X पर राष्ट्रीय जनता दल ने पोस्ट शेयर किया। पोस्ट में लिखा गया कि “बिहार में एनडीए नेताओं और अधिकारियों को रिश्वत देकर वोट खरीदने और सत्ता पाने की इतनी हड़बड़ी थी कि बेचारे भयंकर गड़बड़ी कर बैठे। बेचैनी और असुरक्षा इतनी ज्यादा थी कि महिलाओं की बजाय 10,000 रुपए पुरुषों के खाते में भेज दिए। अब पुरुषों को दस हजार रुपए लौटाने के लिए लव लेटर लिखे जा रहे है। बिहार में भुखमरी, महंगाई, पलायन और बेरोजगारी इतनी अधिक है कि ये पैसे जिस वक्त डाले होंगे उसी समय खर्च हो गया होगा। बेचारे पुरुष अब यह लोन राशि बिल्कुल भी नहीं लौटायेंगे क्योंकि पहले उनका वोट लौटाओं।”
बिहार में एनडीए नेताओं और अधिकारियों को रिश्वत देकर वोट खरीदने और सत्ता पाने की इतनी हड़बड़ी थी कि बेचारे भयंकर गड़बड़ी कर बैठे। बेचैनी और असुरक्षा इतनी ज्यादा थी कि महिलाओं की बजाय 10,000 रुपए पुरुषों के खाते में भेज दिए।
अब पुरुषों को दस हजार रुपए लौटाने के लिए लव लेटर लिखे… pic.twitter.com/DTqdMU5ohO
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) December 13, 2025
मामले की जाँच का आदेश
राज्य के ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्रवण कुमार ने बुधवार 17 दिसंबर को मामले की जांच के आदेश दिए और अधिकारियों को जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
सरकार ने पहले एक तरफ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीविका मिशन योजना शुरू की, जिसके तहत पहले महिला जीविका समूह से जुड़ी। इसके बाद सिलाई या डेयरी का प्रशिक्षण उन्हें दिया गया ताकि वह अपना छोटा काम शुरू कर सकें। इसके बाद मुख्यमंत्री रोजगार योजना से लोन लेकर बड़ा काम शुरू करने के लिए यह योजना शुरू की गई। लेकिन इस योजना का असर सिर्फ वोट से पहले दिखाई देता है उसके बाद सत्ता बन जाने के बाद यह योजना चरमराती दिखाई देती है।
महिला रोजगार योजना से मिलने वाला जो पैसा खर्च हो चुका अब गरीब, मजदूर और किसान कहां से लाकर देंगे। पहले वोट के नाम पर उन्हें पैसा (लॉलीपॉप / रबड़ी) दिया गया अब वही पैसा अचानक माँगा जा रहा है। यह साबित करती है कि सरकार को सिर्फ अपनी सत्ता और कुर्सी से प्यार है उन्हें जनता से कोई मतलब नहीं।
चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अधिकतर पार्टियां लोगों का वोट हासिल करने के लिए योजना और पैसे, नौकरी देने की बात करते हैं। इसी आधार पर जनता पार्टियों पर भरोसा कर उन्हें वोट देती है और उनके वोट से चुनाव जीत लिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर जनता कब तक इनके झूठे वादे को सच मान कर अपना कीमती वोट देती रहेगी? सवाल यह भी है कि जनता से वोट हासिल करने के लिए पार्टियां कब तक जनता को बेवकूफ बनाती रहेगी?
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