लोकसभा के बाद अब वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को राज्यसभा में भी आज सुबह 4 अप्रैल 2025 को मंजूरी मिल गई। राज्यसभा में इस विधेयक के पक्ष में 128 सदस्यों ने मत दिया तो वहीं 95 सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया।
द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा जैसी बहस भी इस दौरान हुई जो लगभग 14 घंटे तक चली। इससे पहले बुधवार 2 अप्रैल 2025 को आधी रात में लोकसभा में 12 घंटे की बहस के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी मिली थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, “हां में 128 और ना में 95, अनुपस्थित में शून्य। विधेयक पारित हो गया है।”
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 लोकसभा में कल 2 अप्रैल 2025 को पास किया गया। लगभग 12 घंटे से अधिक चली बहस के फैसला लिया गया। स्पीकर ओम बिरला ने चर्चा पूरी होने के बाद मतदान कराया, जिसमें 288 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 232 ने विरोध में वोट डाला। इस तरह, देर रात 2 बजे यह विधेयक लोकसभा से पास हो गया।
वक्फ बोर्ड पर विवाद
इस मुद्दे पर राजनीति और विवाद इतना क्यों बढ़ गया है? इसकी मुख्य वजहें ये हैं –
1. राजनीतिक खींचतान – विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि सरकार मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को निशाना बना रही है, जबकि सरकार कह रही है कि वो केवल गड़बड़ियों को रोकने के लिए जांच कर रही है।
2. हिंदू संगठनों का विरोध – कुछ हिंदू संगठनों का दावा है कि सरकारी जमीनों को भी गलत तरीके से वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया, जिससे गैर-मुस्लिम समुदायों को नुकसान हो रहा है।
3. संशोधन से डर – अगर सरकार कानून बदलती है, तो वक्फ बोर्ड की ताकत कम हो सकती है, और मुसलमानों को लग रहा है कि इससे उनकी धार्मिक-सामाजिक संपत्तियां खतरे में पड़ सकती हैं।
4. सर्वे और जांच से असंतोष – सरकार जब वक्फ संपत्तियों की जांच करने लगी, तो मुस्लिम समाज के कुछ लोगों को लगा कि यह उनके धार्मिक अधिकारों में दखल है, जबकि सरकार इसे भ्रष्टाचार रोकने का तरीका बता रही है।
वक्फ बोर्ड क्या है?
मान लो कि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी जमीन या संपत्ति यह सोचकर दान कर देता है कि इसका इस्तेमाल मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान, गरीबों की मदद या किसी और धार्मिक-सामाजिक काम के लिए होगा। इसे ही “वक्फ संपत्ति” कहते हैं। अब, इन संपत्तियों को संभालने और इनका सही इस्तेमाल करने के लिए सरकार ने वक्फ बोर्ड बनाए हैं। हर राज्य में एक राज्य वक्फ बोर्ड होता है, और इनके ऊपर एक केंद्रीय वक्फ परिषद होती है, जो पूरे देश की निगरानी करती है।
वक्फ बोर्ड के अंदर क्या-क्या आता है?
वक्फ बोर्ड के अंदर वे सारी संपत्तियां आती हैं जो मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए दान की गई हैं। ये संपत्तियां किसी एक व्यक्ति की नहीं होतीं, बल्कि संपूर्ण मुस्लिम समाज की होती हैं। इसमें शामिल हैं –
1. मस्जिदें – जो धार्मिक उपासना के लिए होती हैं।
2. दरगाहें – सूफी संतों के मकबरे और उनके साथ जुड़े धार्मिक स्थल।
3. कब्रिस्तान – जहां मुस्लिम समाज के लोग दफनाए जाते हैं।
4. मदरसे – इस्लामिक शिक्षा देने वाले संस्थान।
5. धार्मिक व समाज सेवा संस्थान – अनाथालय, अस्पताल या गरीबों की मदद के लिए चलाई जाने वाली जगहें।
6. किराए की दुकानें और ज़मीन – ऐसी संपत्तियां जिनसे वक्फ बोर्ड को आमदनी होती है और जिसका पैसा धार्मिक-सामाजिक कामों में लगाया जाता है।
वक्फ बोर्ड में नए बदलाव
हाल के दिनों में सरकार और वक्फ बोर्ड के बीच कई मुद्दों पर तनातनी बढ़ गई है। बड़े बदलावों पर नज़र डालें
1. वक्फ संपत्तियों का दोबारा सर्वे – कुछ राज्यों में सरकार ने आदेश दिया है कि वक्फ की जो भी संपत्तियां हैं, उनकी दोबारा जांच की जाए।
2. रजिस्ट्रेशन पर रोक – कई जगह वक्फ संपत्तियों के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई गलत तरीके से सरकारी या किसी और की निजी जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज तो नहीं करवा रहा।
3. संशोधन की तैयारी – कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार वक्फ अधिनियम, 1995 में बदलाव करने की सोच रही है। अगर ऐसा हुआ, तो वक्फ बोर्ड के अधिकार कम किए जा सकते हैं।
4. कब्जों और गड़बड़ियों की जांच – कई राज्यों में आरोप लगे हैं कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर अवैध कब्जे हैं, या कुछ लोग इन्हें गलत तरीके से बेच या किराए पर दे रहे हैं।
वक्फ बोर्ड का इतिहास
भारत में वक्फ बोर्ड के इतिहास पर कई मान्यताएं है जिनमें से एक है कि वफ़्त की व्यवस्था जो मुगलकाल से चली आ रही है, जब शासक और अमीर मुस्लिम परिवार अपनी संपत्तियां धार्मिक और समाजसेवा के उद्देश्यों के लिए दान करते थे। अंग्रेजों के समय में वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए 1923 में पहला कानून बनाया गया, लेकिन असली संरचना वक्फ अधिनियम, 1954 के तहत बनी। बाद में, 1995 में इसे और मजबूत किया गया और वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद का गठन हुआ। इस कानून के तहत वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की कोशिश की गई, लेकिन समय के साथ इन संपत्तियों पर कब्जे, गड़बड़ियों और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगते रहे।
वक्फ (संशोधन) विधेयक क्यों?
सरकार को लग रहा है कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा और इसमें गड़बड़ियां हो सकती हैं, इसलिए उसने जांच शुरू कर दी है। वहीं, वक्फ बोर्ड और मुस्लिम संगठनों को लग रहा है कि यह एक साजिश के तहत हो रहा है, जिससे उनकी संपत्तियां छीनी जा सकें। इसीलिए दोनों तरफ से बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
‘यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’