खबर लहरिया Hindi Varanasi News: वाराणसी जिले के गांव में बांस बल्ली के सहारे लगाए गए तार, लगभग 1000 की आबादी पर मंडरा रहा खतरा 

Varanasi News: वाराणसी जिले के गांव में बांस बल्ली के सहारे लगाए गए तार, लगभग 1000 की आबादी पर मंडरा रहा खतरा 

यूपी के आज भी ऐसे कई गांव है जहां बिजली को लेकर समस्या बनी हुई है। ऐसे ही समस्या वाराणसी जिले के वार्ड नंबर 59 के रामरेपुर अनौली से सामने आई है। यहाँ के घरों में बिजली नहीं है इसलिए ग्रामीण बांस बल्ली के माध्यम से बिजली घरों तक ला रहे हैं। उनकी मांग है कि उनके गांव में भी बिजली पहुंचे और खम्भे का इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि लगाए गए बिजली के तारों से यहाँ करीब 1000 आबादी खतरे में हैं। बारिश, आंधी और तेज हवा के दौरान बड़ा हादसा होने का भी डर लगा रहता है। 

गांव रामरेपुर अनौली में लगे बिजली के तारे (फोटो साभार: सुशीला)

रिपोर्ट – सुशीला, लेखन – सुचित्रा 

रामरेपुर अनौली गांव में बिजली का ट्रांसफार्मर लगभग 500 मीटर की दूरी पर लगा हुआ है। वहां से गांव के लोग बिजली के तार को बांस-बल्ली के सहारे घर तक लाते हैं। उनका आरोप है कि बिजली गांव तक नहीं दी गई है इसलिए हमें मजबूरन बिजली लानी पड़ती है। इसके लिए हमें 5 से 6 बांस बल्ली का इस्तेमाल करना पड़ता है, तब जाकर के घर तक बिजली पहुंची है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से वे बिजली के खंभे लगाने और दूसरी बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि शिवपुर विधानसभा क्षेत्र के मंत्री अनिल राजभर चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि बस्ती में पहुंचते हैं और विकास का भरोसा देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता।

उम्र बीत गई लेकिन बिजली के तार वैसे ही 

पप्पू जो जन्म से ही यहां रह रहे हैं। वे कहते हैं कि “मेरा जन्म इसी बस्ती में हुआ और अब बुढ़ापा आ गया लेकिन आज भी यहां बिजली का खम्भा नहीं लगा है। सरकार हर घर तक बिजली पहुंचाने की बात करती है, लेकिन ये कैसा विकास है जहां बिजली के तार खंभों के बजाय बांस-बल्लियों पर लटक रहे हैं। बस्ती के आसपास कई जगहों पर तार इसी तरह खींचे गए हैं। इससे लोगों को बिजली तो मिल रही है, लेकिन सुरक्षित तरीके से नहीं। बिजली का खंभा होना सिर्फ सुविधा का सवाल नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।”

आंधी-बारिश में बढ़ जाता है हादसे का डर

वहीं वहां रह रही ममता बताती हैं कि बांस के सहारे खींचे गए तार बारिश और तेज हवा में तेजी से हिलने लगते हैं और कभी कबार बांस उखड़ भी जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले भी बिजली के तारों की वजह से करंट लगने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। हालाँकि लोगों को साल या महीना याद नहीं है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

मिट्टी के तेल के दीये थे सहारा 

शांति देवी कहती हैं कि “जब साल 2019 में बिजली चली जाती थी तब घरों में मिट्टी के तेल के दीये जलाए जाते थे। लेकिन अब सब महंगा हो गया है और जल्दी मिलता भी नहीं है। परिवार के लोगों ने किसी तरह दूर से बिजली का तार लाकर बांस और लकड़ी के सहारे घर तक पहुंचाया है। इसी के सहारे अब घर में बिजली जल रही है। हर मौसम में डर लगा रहता है कि कहीं तार टूटकर नीचे न गिर जाए या कोई बड़ा हादसा न हो जाए। कई बार शिकायत करने के बावजूद आज तक बस्ती में बिजली का एक खंभा तक नहीं लगाया गया।”

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के समय उन्हें रैलियों और बैठकों में ले जाया गया। विकास, सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया, लेकिन इन वादों में से कोई भी समस्या पूरी तरह हल नहीं हुई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

सभासद बोले- खंभा लगाने के लिए जगह ही नहीं

वार्ड के सभासद संजय जायसवाल का कहना है कि जिस जगह यह बस्ती बसी है, उसके चारों तरफ निजी लोगों की जमीन है। बिजली के खंभे लगाने और रास्ता देने के लिए जगह की समस्या बनी हुई है।

उनका कहना है कि बिजली विभाग के लोग खंभे लगाने के लिए गए भी थे लेकिन जमीन से जुड़े लोगों ने उन्हें वहां से हटा दिया। ऐसे में बिजली के खंभे लगाए जाएं तो कहां लगाए जाएं, यह बड़ी समस्या है। फिलहाल लोग किसी तरह बांस-बल्लियों के सहारे तार ले जाकर अपने घरों में बिजली जला रहे हैं।

लिखित शिकायत मिलने पर दोबारा जांच होगी

बिजली विभाग के अवर अभियंता ऐके मिश्रा के अनुसार, इस बस्ती से पहले भी शिकायतें मिली हैं। यदि बस्ती के लोगों की ओर से दोबारा लिखित शिकायत दी जाती है तो वह मामले की फिर से जांच कराएंगे। जहां बिजली के खंभे लगाने की जरूरत होगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधि दोनों अपनी-अपनी मजबूरियां बता रहे हैं। विभाग जमीन और लोगों की सहमति की बात कह रहा है जबकि स्थानीय लोग वर्षों से खंभे लगाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि प्रशासन, बिजली विभाग और जमीन से जुड़े लोगों के बीच बैठकर रास्ता निकाला जाए। बिजली पहुंचाना जरूरी है लेकिन उससे भी जरूरी है कि बिजली  लोगों के घर तक सुरक्षित तरीके से पहुंचे।

 

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