खबर लहरिया Blog UP: दहेज की मांग में गई महिला की जान 

UP: दहेज की मांग में गई महिला की जान 

                      

दहेज लेना कानूनन अपराध है लेकिन गांवों में आज भी इसे एक रिवाज की तरह माना जाता है। दहेज न मिलने पर महिलाओं को मानसिक तनाव दिया जाता है उनके साथ मारपीट की जाती है और कई बार उनकी हत्या तक कर दी जाती है। इसी तरह का एक मामला सामने आया है जहां एक महिला की शादी के बाद लगातार दहेज को लेकर प्रताड़ना दी गई और आखिरकार उसकी जान चली गई।

मृतिका के परिजन (फोटो साभार: सुनीता देवी)

रिपोर्टिंग – सुनीता देवी, लेखन – रचना 

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के कोतवाली क्षेत्र के गांव भिटारी मजरा तिलिहा (चित्रकूट) में दहेज को लेकर एक विवाहिता की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था और आखिरकार मृतिका ने खूद ही फांसी लगाकर अपनी जान ले ली गई।

शादी के बाद से ही होता रहा उत्पीड़न 

मृतिका की मां गायत्री का कहना है कि उनकी बेटी रामदेवी की शादी आठ महीने पहले गांव भिटारी मजरा तिलिहा मऊ कोतवाली क्षेत्र में तोता कुमार के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति दहेज को लेकर उसे मारता-पीटता था। वह कहता था कि “तुम्हारे मां-बाप ने तिलक में तीन लाख रुपये और भैंस नहीं दी इसलिए तुम यहां रहने के लायक नहीं हो।” वह बार-बार उसे अपने मायके से तीन लाख रुपये और भैंस लाने के लिए कहता था।

इसी वजह से वे अपनी बेटी को चार महीने के लिए अपने पास ले आई थीं। उस समय वे प्रयागराज में ईंट-भट्ठे पर काम करती थीं और बेटी भी उनके साथ रह रही थी। होली के समय मृतिका का पति आया और उसे फिर से अपने साथ तिलिहा ले गया। (लड़की का माइका गांव व्यौहरा ब्लाक पहाड़ी था) 

घटना की जानकारी और परिवार का आरोप

परिवार का कहना है कि 16 मार्च की शाम करीब छह बजे फोन आया कि उनकी बेटी ने फांसी लगा ली है और उसकी मौत हो गई। वे तुरंत ईंट-भट्ठे से पहुंचे लेकिन तब तक पुलिस शव को कर्वी ले जा चुकी थी पोस्टमार्टम के लिए। 18 मार्च को पोस्टमार्टम के बाद शव मिला और अंतिम संस्कार किया गया। उसी दिन वे मऊ कोतवाली में आवेदन देने पहुंचे।

उन्होंने बताया कि उनकी बेटी चार महीने की गर्भवती थी इसलिए वह काम नहीं कर पा रही थी। इसी वजह से वे उसे अपने साथ ले आई थीं लेकिन बाद में दामाद उसे फिर अपने साथ ले गया।                                  

फोटो साभार: सुनीता देवी

आर्थिक स्थिति और परिवार की मजबूरी

मृतका की मां ने बताया कि उनके पांच बेटियां हैं और वे सभी को तीन-तीन लाख रुपये कैसे दे सकती हैं। उनके पति विकलांग हैं और एक साल से घर पर ही हैं क्योंकि ईंट-भट्ठे में काम करते समय उन्हें चोट लग गई थी। घर चलाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है और वे मजदूरी करके बच्चों का पालन-पोषण करती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि होली पर जब दामाद आया था, तो उन्होंने भट्ठा मालिक से उधार लेकर 50 हजार रुपये दिए थे ताकि उसका सम्मान किया जा सके। इसके बावजूद वह उनकी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित करता रहा।

रिश्तेदारों के आरोप

मृतका की दाई (दादी) बुधुलिया का कहना है कि परिवार के सभी लोग मजदूरी के लिए बाहर रहते हैं। लड़की का भाई अहमदाबाद में है और मां प्रयागराज में ईंट-भट्ठे पर काम करती है और पिता का पैर खराब है। ऐसे में तीन लाख रुपये दहेज देना उनके लिए संभव नहीं था।

लड़की के मामा का कहना है कि शुरू से ही उसके साथ मारपीट की जाती थी। परिवार को उम्मीद थी कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा इसलिए उन्होंने ज्यादा शिकायत नहीं की। लेकिन जब भट्ठा मालिक से 50 हजार रुपये लाए गए तब से मारपीट और बढ़ गई। उन्होंने सास और चाची सास पर भी आरोप लगाया कि वे मारपीट के लिए उकसाती थीं और घर में नहीं रहने देना चाहती थीं।

पति का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई

मृतिका का पति तोता कुमार का कहना है कि घटना वाले दिन वह सुबह मजदूरी के लिए बमुरी गांव चला गया था। खाना न बनने को लेकर झगड़ा हुआ था जिसके बाद वह काम पर चला गया। उसने कहा कि घर में कोई और नहीं रहता इसलिए उसकी पत्नी ने खुद ही फांसी लगा ली।

मऊ कोतवाली के निरीक्षक दुर्ग विजय सिंह ने बताया कि 18 मार्च को लड़की पक्ष की ओर से तहरीर मिली है। इस आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा और जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक महीने में इस तरह के तीन मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस के अनुसार फांसी का फंदा साड़ी का मिला है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

 

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