खबर लहरिया Hindi UP/Varanasi: बच्चों को अफसर बनाने के सपने के साथ महिलाओं ने थामा ई-रिक्शा का हैंडल 

UP/Varanasi: बच्चों को अफसर बनाने के सपने के साथ महिलाओं ने थामा ई-रिक्शा का हैंडल 

                            

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के मिर्ज़ापुरा इलाके में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है। लोक समिति से जुड़ी इन महिलाओं ने ई-रिक्शा चलाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने जिम्मेदारी ली है और एक नई पहल की है।

रिपोर्टिंग – सुशीला देवी, लेखन – रचना 

ई-रिक्शा के साथ चालक महिलाएं( फोटो साभार: सुशीला देवी)

उनका कहना है कि वे मेहनत करके अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई कराना चाहती हैं ताकि वे आगे चलकर उनके जैसे काम के लिए रोजी रोटी के लिए इधर-उधर नहीं भटके। 

हौसले से बदलती अपनी राह 

उन ई-रिक्शा चलाने वाली महिलाओं से बात की गई और उसमें सभी की अपनी-अपनी अलग-अलग कहानी और मेहनत है। आराजी लाइन क्षेत्र की सीता बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें ई-रिक्शा चलाने में डर लगता था लेकिन अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ गाड़ी चलाती हैं। 

उनका कहना है कि यह काम करके वे साबित करना चाहती हैं कि महिलाएं भी मेहनत और हौसले के दम पर किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। इस फैसले में उनके परिवार और खासकर पति का भी पूरा साथ मिला है। वे कहती हैं “यह कदम न केवल हमारे परिवार बल्कि समाज की और भी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।”      

ई-रिक्शा चलाती महिलाएं (फोटो साभार: सुशीला देवी)                           

बच्चों की पढ़ाई के लिए ये कदम उठाना जरुरी था 

पिलोरी गांव की ई-रिक्शा चालक शारदा कहती हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना है कि उनके बच्चे अच्छी पढ़ाई करें और आगे चलकर बड़े अधिकारी बनें। इसी सोच के साथ उन्होंने यह काम शुरू किया है और तय किया है कि अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगी। शारदा बताती हैं कि पहले घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। उनके पति मजदूरी करते हैं लेकिन बढ़ती महंगाई में सिर्फ उसी से घर चलाना मुश्किल हो रहा था और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी कठिन था। ऐसे में उन्होंने लोक समिति के स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ई-रिक्शा चलाने का फैसला किया। 

शुरुआत में सड़क पर गाड़ी चलाने में उन्हें काफी डर लगता था लेकिन धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ा और अब वे निडर होकर ई-रिक्शा चलाती हैं। शारदा कहती हैं कि इस काम ने उन्हें हिम्मत भी दी है और अब घर चलाने में भी राहत मिलने लगी है।

ई-रिक्शा चालक शारदा (फोटो साभार: सुशीला देवी)                                                                     

ई-रिक्शा के मदद से आंगनबाड़ी तक पहुंचा रही हैं खाना 

हरसोस गांव की सीता बताती हैं कि वे रोज सुबह करीब 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक ई-रिक्शा चलाकर आंगनवाड़ी केंद्रों तक बच्चों के लिए नाश्ता और खाना पहुंचाती हैं। उनका कहना है कि “आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए गाड़ी से खाना पहुंचाने में बहुत अच्छा लगता है और हम चाहते हैं कि हमसे प्रेरणा लेकर गांव की दूसरी महिलाएं भी ई रिक्शा चलाने को लेकर उत्साहित हो।”  उन्होंने बताया वे सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक यह काम करती हैं। वे कहती हैं “हमारे पास तीन बच्चे हैं और हम भी अपने बच्चों को भी एक पढ़ा लिखाकर अच्छा इंसान बनाना चाहते हैं। वह भी हमारा नहीं तो अपने गांव का नाम रोशन करे। 

11 गांव के बच्चों तक पहुंच रहा खाना 

लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर का कहना है कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में कार्यरत सामाजिक संस्था लोक समिति को जोमैटो फीडिंग इंडिया की ओर से चार नए ई-रिक्शा उपहार स्वरूप प्राप्त हुए हैं। 

लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर (फोटो साभार: सुशीला देवी)

इन ई-रिक्शों के माध्यम से जनता रसोई घर में कार्यरत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बेनीपुर और कुरौना सेक्टर के 11 गांवों के 78 आंगनवाड़ी केंद्रों तक प्रतिदिन लगभग 2000 बच्चों के लिए नाश्ता और भोजन पहुंचा रही हैं। कुछ महीने पहले फीडिंग इंडिया के सीईओ अजीत सिंह जी लोक समिति आश्रम नागेपुर आए थे जहां उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित कम्यूनिटी किचन जनता रसोई घर के कार्यों की सराहना की थी। उसी दौरान उन्होंने महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके बाद आशा ट्रस्ट और लोक समिति के सहयोग से महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने का ट्रेनिंग दिया गया। ग्रामीण क्षेत्र में पहली बार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर बच्चों तक भोजन पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सहयोग के लिए फीडिंग इंडिया का आभार व्यक्त किया है। 

 

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