जिला वाराणसी, ब्लॉक पिंडरा के सरैया गांव की आबादी करीब एक हजार है। आज भी इस गांव में सिर्फ दो लोग ऐसे हैं जो रेडियो की सुरीली आवाज़ सुनते हैं। रेहाना बताती हैं “रेडियो मुझे बचपन से ही बहुत पसंद है। मेरी शादी में भी मुझे रेडियो गिफ्ट मिला था, लेकिन कुछ दिनों बाद वह खराब हो गया। फिर डर रहता था कि कहीं कोई चोरी न कर दे। इसके बाद मैंने 200 रुपए में दूसरा रेडियो खरीदा। जब तक जिंदा रहूँगा, रेडियो मेरे साथ रहेगा। मैं सुबह से रात 11 बजे तक लगातार रेडियो सुनता हूँ। घर में बाकी लोग सिर्फ टीवी और मोबाइल देखते हैं, लेकिन मुझे रेडियो ही अच्छा लगता है। इसमें पुराने गीत, खबरें, स्वास्थ्य से जुड़ी बातें, सोहर, भजन—सब कुछ मिलता है। और सबसे अच्छी बात—रेडियो परिवार को जोड़कर रखता है। इसमें ऐसी कोई चीज़ नहीं आती जिसे परिवार के साथ न सुना जा सके।” “मोबाइल में बहुत अजीब चीज़ें दिखती हैं, जिनका असर लोगों पर पड़ रहा है। इसलिए रेडियो आज भी सबसे ज्यादा फायदेमंद है। हमारे लिए रेडियो सबसे सही और सबसे अच्छा माध्यम है।”
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