वाराणसी जिले के चोलापुर ब्लॉक के बावन बीगहा गांव की रहने वाली मुनका देवी बताती हैं कि सोलर पंप लगने के बाद उनकी खेती में बड़ा बदलाव आया है। पहले सिंचाई के लिए बिजली का इंतज़ार करना पड़ता था, कभी बिजली रहती, कभी घंटों कट जाती लेकिन अब जब भी पानी की ज़रूरत होती है सोलर पंप तुरंत काम करता है
रिपोर्टिंग – सुशीला देवी, लेखन – रचना
सूरज की ऊर्जा से चलने वाले सोलर पंप अब कम लागत में भरोसेमंद सिंचाई का साधन बनते जा रहे हैं। छोटे किसानों के लिए खेती की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है बिजली कट और महंगा डीजल जिसकी वजह से सही समय पर पानी नहीं मिल पाता और फसलें बर्बाद होने का खतरा रहता है। इन समस्याओं का समाधान सोलर पंप के रूप में सामने आया है। यह न केवल खेतों में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करता है बल्कि बिजली बिल और डीजल के खर्च को भी कम करता है। चूंकि भारत में धूप अधिक मिलने वाला देश है इसलिए सौर ऊर्जा पर आधारित यह तकनीक ग्रामीण इलाकों में बहुत उपयुक्त साबित होती है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के चोलापुर ब्लॉक के बावन बीगहा गांव की रहने वाली मुनका देवी बताती हैं कि सोलर पंप लगने के बाद उनकी खेती में बड़ा बदलाव आया है। पहले सिंचाई के लिए बिजली का इंतज़ार करना पड़ता था, कभी बिजली रहती, कभी घंटों कट जाती लेकिन अब जब भी पानी की ज़रूरत होती है सोलर पंप तुरंत काम करता है और खेतों को समय पर पानी मिल जाता है।
किसान मुनका देवी क्या कहती है?
मुनका देवी कहती हैं कि उन्होंने यह पंप कुछ पैसे लगाकर लगाया था लेकिन इसका फायदा उन्हें लगातार दिख रहा है। अब वह 2 से 3 बीघा खेत की सिंचाई आसानी से कर लेती हैं। सब्ज़ियाँ, धान और गेहूं—इन सभी फसलों को समय पर पानी मिलने से पैदावार पहले से बेहतर हो गई है। आसपास के किसान भी जरूरत पड़ने पर उनके पंप से पानी ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी राहत यह है कि अब बिजली कटने का डर नहीं रहता और न ही बिजली बिल का खर्च बढ़ता है क्योंकि पूरा पंप सौर ऊर्जा से चलता है। धूप वाले दिनों में यह पूरी क्षमता से पानी खींचता है और गर्मी के समय फसलों को सूखने से बचा लेता है। मुनका देवी के मुताबिक “आज हमें अपनी मेहनत का पूरा फल मिल रहा है। खेती समय पर हो जाती है और फसल भी अच्छी तैयार हो रही है।”
‘पहले आओ–पहले पाओ’ के नाम से चलता है योजना
अगर केवल वाराणसी की बात करें तो यहां बड़ी संख्या में किसान सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। वर्ष 2025 तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) के तहत जिले के किसानों ने कुल 9.7 करोड़ से अधिक आवेदन किए हैं और लगभग 20,500 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त की है। यह आंकड़ा सिर्फ PM-Kisan योजना से संबंधित है। इसी के साथ अब प्रदेश सरकार किसानों को सोलर पंप देने के लिए भी बड़ी राहत देने जा रही है। योजना के तहत छोटे और कम खेती करने वाले किसानों को सोलर पंप लगाने पर सिर्फ 10 प्रतिशत लागत खुद वहन करनी होगी जबकि कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में देगी। यानी किसान बेहद कम खर्च में अपनी सिंचाई के लिए सौर पंप लगा सकेंगे।
उत्तर प्रदेश में यह सुविधा ‘पहले आओ–पहले पाओ’ के आधार पर दी जाती है। यह प्रक्रिया 18 अक्टूबर 2022 को शुरू हुई थी और इसे पीएम सुकून योजना से जोड़ा गया है जिसके तहत किसान समय पर आवेदन कर के आसानी से सब्सिडी पा सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य है कि किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती, भरोसेमंद और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध कराना ताकि खेती में खर्च कम हो और उत्पादन बढ़ सके।
गर्मी में फसल सूखने का डर हुआ दूर
इसी से संबंधित राधेश्याम जो लगभग चार बीघा जमीन पर खेती करते हैं वे बताते हैं कि शुरू-शुरू में वे सोलर पंप लगाने को लेकर थोड़े चिंतित थे। उन्हें डर था कि कहीं सिंचाई समय पर न मिल पाई तो फसल खराब न हो जाए लेकिन परिवार के कहने पर उन्होंने साल 2025 में 72,000 रुपये का सोलर पंप लगवा लिया जिस पर उन्हें अच्छी खासी सब्सिडी भी मिली। राधेश्याम कहते हैं कि उनकी खेती में सब्ज़ियाँ, गेहूं, चना और मटर जैसी फसलें होती हैं जिन्हें समय पर पानी चाहिए होता है। खासतौर पर गर्मियों में। गर्मी इतनी तेज़ पड़ती है कि फसलें सूखने लगती हैं लेकिन सोलर पंप ने यह सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी। तेज़ धूप में पंप पूरी तरह चार्ज रहता है और अच्छी मात्रा में पानी खींचता है जिससे खेतों की सिंचाई आसानी से हो जाती है।
उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में हमें रोज़ खूब पानी चाहिए होता है और सोलर पंप उसी समय सबसे अच्छी तरह काम करता है। इससे फसलें सुरक्षित रहती हैं और पैदावार भी बेहतर मिलती है। वे कहते हैं कि साल भर में करीब आठ महीने यह पंप बिना किसी दिक्कत के लगातार पानी देता है। बारिश और बदली वाले दिनों में ही इसका असर थोड़ा कम होता है।
सरकारी योजनाओं में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ से किसानों को बड़ा लाभ
राज्य सरकार और कृषि विभाग सीमित कोटा वाली योजनाओं में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की प्रक्रिया अपनाते हैं जिसके तहत समय पर आवेदन करने वाले किसानों को प्राथमिकता के साथ लाभ मिलता है। इसी प्रक्रिया के तहत पीएम सुकून योजना में सोलर पंप सब्सिडी दी जाती है जिसमें किसानों को 60 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक की आर्थिक सहायता मिलती है। हाल ही में मंडल के चारों जिलों में 47.770 नलकूप कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान सिंचाई के लिए सोलर पंप का लाभ उठा सकें। योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बिजली और कृषि विभाग द्वारा नियमित रूप से जागरूकता कैंप लगाए जाते हैं ताकि किसान समय पर आवेदन कर सकें और सरकारी सहायता का लाभ उठा सकें।
सोलर पंप होता क्या है?
सोलर पंप वह पंप होता है जो बिजली या डीज़ल से नहीं बल्कि सूरज की रोशनी यानी सौर ऊर्जा से चलता है। इसे चलाने के लिए खेत या घर में सोलर पैनल लगाए जाते हैं जो धूप को ऊर्जा में बदलकर पंप की मोटर को चलाते हैं और कुएं, बोरवेल या तालाब से पानी खींचकर खेतों तक पहुंचाते हैं। इसमें न बिजली का इंतज़ार करना पड़ता है और न ही डीज़ल का खर्च होता है इसलिए यह किसानों के लिए कम लागत और भरोसेमंद सिंचाई का सबसे अच्छा साधन बनता जा रहा है। समय पर पानी मिलने से फसलें सूखने से बचती हैं और पैदावार भी बेहतर होती है यही वजह है कि सोलर पंप आज किसानों के लिए एक बेहद उपयोगी और आसान तकनीक साबित हो रही है।
किसानों को कम लागत में अधिक लाभ देने की पहल
उत्तर प्रदेश में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर मिलने वाली पीएम सोलर पंप योजना फरवरी 2025 से लागू है और वाराणसी के किसान बड़ी संख्या में इससे जुड़कर लाभ उठा रहे हैं। इच्छुक किसान कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यदि सिर्फ वाराणसी की बात करें,तो 2025 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत जिले में 9.7 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिल चुका है हालाँकि यह संख्या केवल पीएम किसान योजना से संबंधित है।
सोलर पंप योजना का उद्देश्य किसानों को बिजली और डीज़ल पर निर्भरता से मुक्त करना सिंचाई को सरल बनाना और कम लागत में अच्छी पैदावार सुनिश्चित करना है।
राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में बढ़ते खर्च, पर्यावरण प्रदूषण और अनियमित बिजली सप्लाई को ध्यान में रखते हुए सोलर पंपों को सिंचाई व्यवस्था से जोड़ रही है। वर्तमान में इस योजना के तहत किसानों को लगभग 60 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है जिससे किसान बड़ी संख्या में इसमें भाग ले रहे हैं और अपनी खेती को अधिक सुरक्षित और लाभकारी बना रहे हैं।
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