खबर लहरिया Blog UP School Merger: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल मर्ज के योजना को लेकर केवल सीतापुर स्कूल मर्ज पर लगाई रोक 

UP School Merger: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल मर्ज के योजना को लेकर केवल सीतापुर स्कूल मर्ज पर लगाई रोक 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल मर्ज योजना पर रोक लगा दी है। अब से अगले आदेश तक कोई भी विद्यालय मर्ज नहीं किया जाएगा। जिन विद्यालय के मर्जर के आदेश हो चुके हैं लेकिन जो विद्यालय अभी तक शिफ्ट नहीं हुए हैं वह अपने पुराने स्थान पर ही चलते रहेंगे।

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सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे 5,000 स्कूल मर्ज की योजना पर इलाहाबाद हाई कोर्ट (उच्च न्यायालय) ने रोक लगा दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 21 अगस्त 2025 को होगी तब तक यथास्थिति बनाए रखे जाने का भी आदेश कोर्ट द्वारा दिया गया है। यानी अब से अगले आदेश तक कोई भी विद्यालय मर्ज नहीं किया जाएगा। जिन विद्यालय के मर्जर के आदेश हो चुके हैं लेकिन जो विद्यालय अभी तक शिफ्ट नहीं हुए हैं वह अपने पुराने स्थान पर ही चलते रहेंगे। यह आदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 24 जुलाई 2025 को सुनाया। अदालत ने यह निर्देश उन याचिकाओं के आधार पर दिया है जिसमें स्कूली बच्चों ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई थी और इसे अपने अधिकारों का हनन बताया था। 

इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह कदम आरटीई अधिनियम 2009 के तहत मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करता है क्योंकि इससे युवा छात्रों को अपने नए निर्धारित स्कूलों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

क्या है मामला 

बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश ने 16 जून 2025 को एक आदेश जारी कर प्रदेश के हजारों परिषदीय स्कूलों को मर्ज करने का निर्णय लिया था। इस आदेश के अनुसार, जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 से कम है उन्हें नजदीकी उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूल में विलय कर दिया जाना था। सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद बच्चों को बेहतर सुविधाएं और अच्छी शिक्षा देना है। यह कदम नई शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2020 के अनुसार स्कूलों में संसाधनों का साझा इस्तेमाल और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

बच्चों द्वारा याचिका दायर 

सीतापुर की छात्रा कृष्णा कुमारी समेत 51 बच्चों ने सरकारी आदेश को चुनौती दी थी। 2 जुलाई को एक और याचिका दायर की गई। बच्चों ने अपनी याचिका में कहा कि छोटे बच्चों के लिए दूर स्थित स्कूल तक पहुंचना कठिन होगा खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में। इसके चलते उनकी शिक्षा बाधित होगी और सामाजिक असमानता भी बढ़ेगी और बच्चों को कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ेगा। इससे पहले 7 जुलाई 2025 को कोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के फैसले को सही ठहराया था। अब मामले में चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की डबल बेंच ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

कोर्ट का आदेश सिर्फ सीतापुर के स्कूल के लिए लागू होगा

Live Law के रिपोर्ट के अनुसार, सीतापुर जिले के कुछ बच्चों ने स्कूल मर्ज (एकीकरण) को लेकर हाईकोर्ट में अपील की थी। इसी पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फिलहाल जिस स्कूल की बात हो रही है उस पर ही रोक (स्टे) लगाई है। यानी यह आदेश सिर्फ उसी स्कूल पर लागू होगा पूरे जिले या राज्य पर नहीं। कोर्ट ने कहा है कि जब तक अगला आदेश नहीं आता तब तक उस स्कूल को किसी और में मिलाया नहीं जाएगा। 21 अगस्त 2025 के सुनवाई के बाद ही कोर्ट द्वारा और स्पष्ट किया जाएगा कि यह आदेश पूरे यूपी के लिए है या सिर्फ सीतापुर ज़िले की। अब सरकार को अपनी बात रखनी है फिर बच्चों की ओर से वकील जवाब देंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

बच्चों की ओर से केस लड़ रहे वकील डॉ. एलपी मिश्रा ने बताया कि यह मामला सिर्फ सीतापुर जिले से जुड़ा है इसलिए कोर्ट का फैसला भी सिर्फ सीतापुर के लिए ही मान्य होगा। उन्होंने साफ किया कि यह स्टे पूरे राज्य पर लागू नहीं होता केवल उसी जिले तक सीमित रहेगा जहां से याचिका आई है। याचिकाकर्ता के वकील डॉक्टर एलपी मिश्रा का भी कहना है कि पूरा प्रकरण सीतापुर का ही था इसलिए स्टे केवल सीतापुर के लिए ही हुआ है।

 

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