खबर लहरिया Blog UP Prayagraj News : बाघला नहर में पानी न होने से किसानों की खेती पर असर

UP Prayagraj News : बाघला नहर में पानी न होने से किसानों की खेती पर असर

खेतों में लहलहाती खड़ी पकी फसल देखने का किसानों को बेसब्री से इंतजार रहता है। फसल को सही मात्रा में पानी दिया जाये तभी उसमें मौजदू पोषक तत्व पूरी तरह से आ पाते हैं। लेकिन सही समय पर फसल को पानी न मिले तो फसल समय से तैयार नहीं हो पाती और किसानों की उम्मीद टूट जाती है। ऐसी ही परेशानी का सामना प्रयागराज के किसानों को करना पड़ रहा है।

नहर की तस्वीर (फोटो साभार : सुनीता देवी)

रिपोर्ट – सुनीता देवी, लेखन – सुचित्रा 

जिला प्रयागराज के बघला नहर अंतर्गत पडुवा प्रतापपुर पम्प कैनाल से इस वर्ष पानी छोड़ा गया है लेकिन इसके बावजूद लगभग पचास से अधिक गांवों के किसान पलेवा (सिंचाई) के लिए परेशान हैं। नहर सिर्फ देखने के लिए बनी हुई लगती है जबकि किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है।

किसानों का कहना है कि हर साल नहर की समय पर साफ-सफाई नहीं होती जिससे नहर में कचरा भर जाता है। नहर की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर दी जाती है जबकि खेतों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता।

नहर में पानी नहीं, सिंचाई भगवान भरोसे

पानी न मिलने के कारण किसानों को मजबूरी में ट्यूबवेल से सौ रुपये प्रति घंटा की दर से पलेवा (सिंचाई) कराना पड़ रहा है। यदि पूरी फसल की सिंचाई इसी तरह ट्यूबवेल से करनी पड़ी तो नहर बनने का कोई लाभ नहीं रह जाता। किसानों का कहना है कि जब नहर से फायदा ही नहीं मिलता तो इससे बेहतर है कि इसे हटवा दिया जाए।

ग्रामीणों ने बताया कि बीते दो वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। जब चना, गेहूं और सरसों की फसल लगभग तैयार हो जाती है, तब कहीं जाकर नहर में पानी छोड़ा जाता है, जिसका कोई उपयोग नहीं रह जाता। किसानों की खेती पूरी तरह भगवान भरोसे हो गई है बारिश हो तो फसल बचे, नहीं तो नुकसान तय है।

खेती ही एकमात्र आजीविका का साधन – किसान

किसान बताते हैं कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। इसी से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, दवा-इलाज, शादी-विवाह और खेती का खर्च चलता है। इस वर्ष भी पलेवा के लिए किसान लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं कि नहर में पानी आए लेकिन अभी तक सही ढंग से पानी नहीं पहुंच पाया है।

खेत की तस्वीर (फोटो साभार : सुनीता देवी)

किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग की है कि नहर की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए और फसलों की जरूरत के अनुसार समय पर पानी छोड़ा जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।

नहर की समय से नहीं होती सफाई

जसरा ब्लॉक के सेहुड़ा गांव निवासी किसान राजेंद्र का कहना है कि यदि नवंबर महीने में नहर से पानी छोड़ दिया जाए तो किसानों को काफी लाभ हो सकता है। लेकिन आज 18 दिसंबर है और अभी तक नहर की साफ-सफाई तक नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में सिंचाई का कोई दूसरा साधन नहीं है। पूरी खेती सिर्फ बघला नहर पर निर्भर है। यदि नहर से पानी न मिले तो खेती पूरी तरह से ठप पड़ जाती है। वर्तमान समय में लगभग हजारों किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। धान की खेती बिना पानी के संभव नहीं हो पाई और अब रबी की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। किसानों का आरोप है कि नहर से समय पर पानी न मिलने के कारण हर वर्ष उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है।

सिंचाई विभाग की शिकायत, पर कोई कार्रवाई नहीं

किसानों का कहना है कि वे कई बार सिंचाई विभाग को लिखित रूप से आवेदन दे चुके हैं कि नहर की समय पर साफ-सफाई कराई जाए। किसानों को समय से पानी उपलब्ध कराया जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नहर की हालत इतनी खराब है कि जगह-जगह यह टूटी-फूटी है। यदि पानी छोड़ा भी जाता है तो वह इधर-उधर बह जाता है और खेतों तक पहुंच ही नहीं पाता। ऐसे में नहर होने का कोई लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।

किसानों का कहना है कि हर वर्ष नहर की सफाई कम से कम एक माह पहले कर दी जानी चाहिए और इसके बाद नवंबर महीने में पानी छोड़ा जाना चाहिए। तभी किसानों को खेती के लिए राहत मिल सकती है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हर साल यही समस्या बनी रहेगी।

फसल के लिए लागत महंगी, पानी न मिलने से फसल ख़राब

किसानों ने बताया कि बिना पानी के उनकी फसलें सूख रही हैं। सरसों की फसल को लेकर किसान विशेष रूप से चिंतित हैं। खेतों की जुताई पहले ही काफी महंगी हो चुकी है, खाद के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और सरसों का बीज भी किसानों को एक किलो 500 रुपये में खरीदना पड़ा है। इतनी लागत लगाने के बावजूद पानी न मिलने से फसल सूख रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

जानवरों के चारे की समस्या

नारीवारी गांव की सोमवती का कहना है कि उनका परिवार पूरी तरह किसानी पर निर्भर है। यदि खेती नहीं होगी तो केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि जानवरों के लिए चारे की भी भारी समस्या खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि आदमी तो किसी तरह इधर-उधर मेहनत-मजदूरी कर भोजन का इंतजाम कर सकता है लेकिन जिन पशुओं को घर में पाला गया है उनके लिए भूसा और चारा कहां से आएगा? यह सबसे बड़ी चिंता है।

सोमवती बताती हैं कि यदि समय पर नहर में पानी नहीं छोड़ा जाता है तो खेती के साथ-साथ पशुपालन भी बुरी तरह प्रभावित होता है।

“नहर की साफ-सफाई का कार्य जारी” – सिंचाई विभाग

सिंचाई विभाग के जेई धरमदास ने बताया कि विभाग की मंशा है कि किसानों को समय पर सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाए। नियम के अनुसार नहरों में पानी छोड़ने की शुरुआत दिसंबर महीने से होती है। हालांकि, इस क्षेत्र के किसान गेहूं की बुवाई थोड़ी देर से करते हैं और अभी हाल ही में धान की कटाई पूरी हुई है।

सिंचाई विभाग के बोर्ड की तस्वीर (फोटो साभार : सुनीता देवी)

फिलहाल नहर की साफ-सफाई का कार्य चल रहा है और जहां नहरें टूटी-फूटी हैं, वहां मरम्मत भी कराई जा रही है। इन कार्यों के पूरा होने के बाद दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा। पड़ुवा प्रतापपुर पंप कैनाल से जब पानी छोड़ा जाएगा, तभी पूरे क्षेत्र में समान रूप से पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

जब सिंचाई विभाग से सवाल किया गया तो उन्होंने यही जवाब दिया कि नहर की साफ़ सफाई का काम चल रहा है यदि ऐसा है तो किसान इतने समय से परेशान क्यों है? क्या किसानों की समस्या का इस तरह का जवाब देकर पल्ला झाड़ देना सही है?

 

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