प्रयागराज के शंकरगढ़ ब्लॉक के अकौरिया गांव में बाढ़ से घर गिरने, खराब हैंडपंप और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीण लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उर्मिला जैसी महिलाओं का कहना है कि किराया खर्च कर ब्लॉक जाने के बावजूद न तो अधिकारी मिलते हैं और न ही कोई समाधान निकलता है। करीब ढाई हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी पीने के पानी के लिए जुगाड़ पर निर्भर है, जबकि लोग रोज़ मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। प्रधान और अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी का टकराव साफ दिखता है, लेकिन ज़मीनी हालात जस के तस हैं—क्या ऐसे ही रहेगा ग्रामीण विकास का सच?
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